प्रशममूर्ति आचार्य श्री शांतिसागर जी (छाणी) आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी वर्ष 2026–27 राष्ट्रव्यापी आयोजनों की भव्य रूपरेखा बनी

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केशवराय पाटन। श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवरायपाटन (जिला बूंदी, राजस्थान) में स्वस्तिधाम प्रणेत्री, परम विदुषी लेखिका, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी के पावन सान्निध्य में प्रशममूर्ति आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज (छाणी) आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी वर्ष 2026–27 के आयोजन को लेकर एक गरिमामयी मंथन बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में देशभर से जुड़े शताब्दी महोत्सव के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने सहभागिता करते हुए वर्षभर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की व्यापक एवं सुविचारित रूपरेखा तय की।
बैठक का शुभारंभ डॉ. सुनील जैन संचय (ललितपुर) द्वारा मंगलाचरण से हुआ। महोत्सव के महामंत्री ज्ञानेंद्र जैन (जहाजपुर) ने गत बैठक की कार्यवाही प्रस्तुत कर पूर्व निर्णयों की समीक्षा की। महोत्सव समिति के अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी (इंदौर) ने बैठक का संचालन करते हुए शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक एवं समाजोपयोगी बनाने हेतु प्रस्तावित आयोजनों का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया।
वर्षभर रथ प्रवर्तन, कीर्ति स्तम्भ निर्माण, संगोष्ठी, डॉक्यूमेंट्री व स्मारिका सहित बहुआयामी आयोजन तय : बैठक में वर्षभर विविध धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया। प्रमुख आयोजनों में प्रशममूर्ति आचार्य शांतिसागर रथ प्रवर्तन, चयनित स्थानों पर कीर्ति स्तम्भ निर्माण, जन्मभूमि छाणी एवं समाधि भूमि सागवाड़ा में चरण छतरी निर्माण, डाक टिकट एवं विशेष डाक आवरण जारी करना, विद्वत् संगोष्ठियों का आयोजन (माताजी के सान्निध्य एवं विभिन्न विश्वविद्यालयों में), पत्रकार सम्मेलन, डॉक्यूमेंट्री फिल्म निर्माण, शुभकामना परिवार द्वारा निबंध, भाषण एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताएँ, पत्र-पत्रिकाओं के विशेषांक एवं स्मारिका प्रकाशन, स्मृति द्वार निर्माण तथा स्मृति सिक्कों का विमोचन शामिल हैं।
शताब्दी वर्ष बने साधना, सेवा व समाज-जागरण का प्रभावी माध्यम : गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी-
इस अवसर पर परमपूज्य, गणिनी आर्यिका श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने उदबोधन में कहा कि  यह शताब्दी वर्ष केवल उत्सव न होकर साधना, सेवा और समाज-जागरण का प्रभावी माध्यम बने। उन्होंने प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि प्रत्येक आयोजन में किसी प्रकार की कमी न रहे तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को आचार्यश्री के तप, त्याग और आदर्शों का अधिकतम लाभ प्राप्त हो, ऐसा सुनियोजित एवं उद्देश्यपूर्ण कार्य किया जाए। माताजी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में उपस्थित पदाधिकारियों ने गहन मंथन कर सर्वसम्मति से अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
शताब्दी महोत्सव का भव्य शुभारंभ 31 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 तक प्रस्तावित है। महोत्सव का केंद्रीय कार्यालय स्वस्तिधाम, जहाजपुर में स्थापित रहेगा, जहाँ से समस्त गतिविधियों का संचालन किया जाएगा।
बैठक में महोत्सव समिति के अध्यक्ष हसमुख जैन गांधी (इंदौर), ज्ञानेंद्र जैन (जहाजपुर), योगेश जैन (खतौली), के.सी. जैन (ग्वालियर), बालचंद्र जैन (सिद्धक्षेत्र सोनागिर), आनंद जैन (दिल्ली), विनोद जैन टोरड़ी (पारस चैनल), नरेंद्र जैन (बुढ़ाना), कमल बाकलीवाल (ग्वालियर), राजेन्द्र जैन महावीर (सनावद), डॉ. सुनील जैन संचय (ललितपुर), पवन बागड़िया (इंदौर), शरद पानोत (इंदौर), महावीर प्रसाद जैन, विकास जैन (सहारनपुर), आर.के. जैन एक्साइज (इंदौर), गुलाबचंद जैन (अध्यक्ष, अतिशय क्षेत्र केशवराय पाटन), सुरेंद्र जैन (सहारनपुर), अशोक पाटनी (मदनगंज-किशनगढ़), आशीष जैसवाल, मनीष पिड़ावा, रजनीश जैन (सनावद), माधो अग्रवाल सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
प्रेषक : डॉ.सुनील जैन संचय ललितपुर
             राजेन्द्र महावीर सनावद

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