अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि पूज्य *आचार्य भगवंत श्री कनकनंदी जी गुरुदेव* के ५० वर्षों के अखंड *निष्काम लेखन पुरुषार्थ* और *जिनवाणी सेवा* को ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’ के माध्यम से अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल रही है। [९, १०, १६]
🏔️ *ज्ञान का हिमालय और आचार्य श्री का सृजन:*
५० वर्षों की अनवरत साधना, 430 से अधिक ग्रंथों और १४,००० से अधिक कविताओं के माध्यम से गुरुदेव ने *ज्ञान का जो ‘हिमालय’ खड़ा किया है*, वह विश्व में अद्वितीय और विरल है। [१०, १२, ५०] ३० भाषाओं के प्रकांड विद्वान के रूप में आपका यह भागीरथ पुरुषार्थ और निस्पृही,सादगी,सरलता और निराडंबर वृत्ति’ वाली कार्यशैली संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। [३४, ६३]
🔭 *डॉ. राजमल जी का ऐतिहासिक और महान प्रयास:*
इसरो (ISRO) के पूर्व वैज्ञानिक *डॉ. राजमल जी* की गुरुभक्ति वास्तव में अनुकरणीय है:
* *स्वाध्याय का नया युग (२०२०):* डॉ. राजमल जी के ही प्रथम प्रयास से वर्ष *२०२०* के कठिन कोरोना काल में गुरुदेव का *’स्वाध्याय वेबिनार’* प्रारंभ हुआ था, जो आज तक अनवरत जारी है। [७, ८६]
* *सात समंदर पार प्रभाव:* इस वेबिनार के माध्यम से *’सात समंदर पार’* से अनेक श्रावक जुड़कर गुरुदेव की अमृतवाणी का लाभ ले रहे हैं और अपने जीवन का उद्धार कर रहे हैं। [७, ६६]
* *वर्ल्ड रिकॉर्ड की पहल:* उन्होंने अपनी स्व-प्रेरणा से गुरुदेव के कार्यों को *’गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड’* तक पहुँचाया और गोल्ड मेडल की आधिकारिक स्वीकृति प्राप्त कर हम सभी शिष्यों को गौरवान्वित किया है। [१६, १७]
**हम हृदय से गुरुदेव के चरणों में त्रिवार नमोस्तु करते हैं और डॉ. राजमल जी के इन महान समर्पित प्रयासों की हृदय से मंगल अनुमोदना करते हैं। ये जानकारियां शाह मधोक जैन चितरी ने दी।
– अजीत कोठिया डडूका की रिपोर्ट













