धूमधाम से सम्पन्न हुआ सामूहिक वर्षीतप का विराट पारणा-महोत्सव

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धूमधाम से सम्पन्न हुआ सामूहिक वर्षीतप का विराट पारणा-महोत्सव
देश भर और शहर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने 108 तपस्वियों का किया अनुमोदना और अभिनंदन
जोधपुर। देश भर और शहर से आए हजारों श्रद्धालुओं के बीच कायलाना रोड़ स्थित प्रसिद्ध साधना स्थली संबोधि धाम के पास मंगलम निकुंज में अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर सामूहिक वर्षीतप पारणा का विराट महोत्सव का आयोजन हुआ। राष्ट्रसंत महोपाध्याय ललितप्रभ सागरजी, राष्ट्रसंत पूज्य चन्द्रप्रभ सागरजी एवं डॉ. मुनि शांतिप्रिय सागरजी महाराज साहब और साध्वी कीर्ति प्रभाजी महाराज आदि साधु-साध्वियों के सान्निध्य में आयोजित इस महोत्सव में सर्वप्रथम अष्टापद मंदिर
में विराजमान आदिनाथ भगवान की दिव्य प्रतिमा का अठ्ठारह अभिषेक महापूजन किया गया जिसमें इक्षुरस से अभिषेक करने का लाभ श्रीमती विमला भंडारी एवं महाआरती का सौभाग्य प्रकाश बोहरा श्रीमती प्रीति बोहरा ने लिया। प्रकाशचंद, अशोककुमार दफ्तरी परिवार ने मंदिरजी का वार्षिक ध्वजारोहण सम्पन्न किया। वर्षीतप आराधकों के सम्मान में संबोधि धाम से विराट वरघोड़ा का आयोजन हुआ। इस शोभायात्रा में सम्मिलित सभी तपस्वियों का तिलक करके हरी झंडी दिखाने का सौभाग्य सुधा सुकन राज धारीवाल, सुनील मेहता एवं अर्जुन राज भंसाली ने प्राप्त किया। इस शोभा यात्रा में बाइक रैली, 108 फीट जैन ध्वज की आकर्षक यात्रा, घोड़ा बग्गियों पर बैठे तपस्वियों को देखकर पूरा शहर तपो मय हो गया।
संबोधि धाम के अध्यक्ष अशोक पारख  के अनुसार पारणा महोत्सव के अवसर पर देश के अलग-अलग कोने से आए 35 तपस्वी और जोधपुर के 73 वर्षीतप तपस्वियों का सार्वजनिक अभिनंदन किया गया।तपस्वियों को तिलक-श्रीफल-माला का सम्मान जीतो अपेक्स के डायरेक्टर महावीर सिंह चौधरी ने, अभिनंदन पत्र कालू लाल जैन उदयपुर ने समर्पित किया। तपस्वियों को इक्षुरस से पारणा करवाने का सौभाग्य सुकन राज धारीवाल परिवार ने लिया। वर्षभर कठिन तपस्या करने वाले तपस्वियों का विधिवत पारणा करते और उनके दृढ़ साधना, संयम और त्याग की भावना को देखकर उपस्थित जनसमूह भाव-विभोर हो उठा। इस दौरान इंडिगो पब्लिक स्कूल की बालिकाओं ने भगवान आदिनाथ को राजा श्रेयांश कुमार द्वारा करवाए गए के पारणे की भाव नृत्य द्वारा दी गई प्रस्तुति को देखकर सबके चेहरे खिल उठे।
इस अवसर पर संत ललितप्रभजी ने वर्षीतप आराधकों की अनुमोदना करते हुए तपस्वियों का इंटरव्यू लिया तो उन्होंने अपनी वर्षभर की तपस्या से जुड़े हुए खड्ढे-मीठे अनुभव सुनाए तो सभी लोग अभिभूत हो उठे।
इस अवसर पर संत चन्द्रप्रभजी ने तपस्वियों को गृहस्थ संत की उपमा देते हुए कहा कि हम तपस्या के साथ मन में पलने वाली क्रोध और वैर-विरोध की गांठों का भी त्याग करें, प्रतिदिन माता-पिता को प्रणाम करने का लाभ लें, धर्मशास्त्र की 10 मिनट अध्ययन करने की आदत डालें और रोज एक जरूरतमंद की सेवा करें। उन्होंने कहा कि जब हम पुराना केलेण्डर घर में नहीं रखते तो पुरानी बातों को मने में क्यों ढोते रहते हैं। समारोह में मधुर गायिका सीमा दफतरी जयपुर ने सुमधुर भजन सुनाए तो भक्तगण झूम उठे।
समारोह में देश के विभिन्न शहरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में जायंट्स ग्रुप, महावीर युवा संस्थान, वीर प्रभु संस्थान, बाड़मेर जैन युवा मंडल, कुशल मणि बहू मंडल, खरतर गच्छ महिला परिषद, संबोधी सेवा परिषद सहित अनेक मंडलों की अपनी सक्रिय सेवाएं समर्पित की।

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