तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ – पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार

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संपूर्ण भारत में जितने भी तीर्थ क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र हैं उनकी भव्यता प्राचीनता ऐतिहासिकता पुरातत्वता की रखना रक्षा सुरक्षा के लिए अतिशीघ्र चारो ओर बाउंड्री वॉल किया जाए

देवी अहिल्या की नगरी इंदौर में स्थित श्री गोमटगिरी तीर्थ की स्थिति सभी के सामने है। वहां पर गुर्जर समाज ने गोमटगिरी जैन पहाड़ी पर देव नारायण मंदिर जाने हेतु सीडीया बनाने के लिए लाइन खीच दी। यदि पूर्व ने जब यह पहाड़ी जैन समाज को दी गई थी उस समय यदि इस पहाड़ी के चारो ओर बाउंड्री वॉल बना दी जाती तो आज वर्तमान समय में यह स्थिति देखने को नही मिलती।। अभी हाल में जो एकता पूरे इंदौर जैन समाज ने दिखाई तारीफे काबिल है । अब भी समय है संपूर्ण भारत में जितने भी तीर्थ क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र हैं उनकी भव्यता प्राचीनता ऐतिहासिकता पुरातत्वता बचाए रखना है तो एक दो वर्ष के जितने भी धार्मिक अनुष्ठान पंचकल्याणक महोत्सव और जैन संतो चातुर्मास सिर्फ तीर्थों की रक्षा सुरक्षा के लिए समर्पित हो। एक दो वर्ष की संपूर्ण राशि सभी तीर्थों पर बाउंड्री वॉल करने में खर्च हो ।इस पर तुरंत सकारात्मक निर्णय लेना चाहिए। अभी नहीं तो फिर कभी नहीं। तीर्थ हमारी समाज की अमूल्य धरोहर संस्कृति है। हमारी आन बान शान हैं। तीर्थों की भूमि का कण कण पवित्र पावन है वंदनीय पूजनीय अभिनंदनीय है। तीर्थ स्थलों से करोड़ों जीवों ने संसार, शरीर और भोगों को छोडकर अपने तप, त्याग और साधना के द्वारा मोक्ष को प्राप्त किया है ।तीर्थ नर से नारायण, तीतर से तीर्थकर, पाषाण से परमात्मा की यात्रा के पवित्र पावन स्थल हुआ करते है।जन्मों जन्मों के पापो के बंधन यहां आने से कट जाते हैं पापो से मुक्ति का स्थल होता है तीर्थ क्षेत्र। इसकी रक्षा सुरक्षा करना हमारा परम प्रथम कर्तव्य बनता है। गिरनार जैन पर्वत पर जहां भगवान नेमीनाथ की चरण पादुका थी उसी के समीप दत्रातय की मूर्ति स्थापित कर दी गई। दत्रा मंदिर गेट बना दिया गया। और जैन समाज देखता रह गया। जब श्रद्धालु गण गिरनार तीर्थ राज की वंदना करने जाते है ये जो दूसरे संप्रदाय के लोग उनको डराते धमकाते और गलत व्यवहार करते है। अभी हाल में मध्यप्रदेश के ओमकारेश्वर जी के करीब प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र सिद्धवरकूट के बाहर मेन गेट के पास अवैध रुप से मजार बना दी गई है ।
अभी यह छोटे रूप में है ,और लग भी रहा है नव निर्माण है, अभी समाज के जिम्मेदार लोगों ने ध्यान नहीं दिया तो कल यहां एक बड़ा दरगाह बनेगा । अभी तीर्थ राज की स्थिति भी सभी के सामने है। हमारे तीर्थों पर चारो ओर से नाजायज कब्जे हो रहे है। एक दिन सभी तीर्थ हमारे हाथो से निकल जाए उससे पहले सभी जैन एकता के सूत्र में बंधकर पंथवाद संतवाद ग्रंथवाद में न पड़कर प्री प्लानिंग से जैन तीर्थ पर बाउंड्री वॉल करने में कार्य में गति देना परम आवश्यक है। जैन धर्म दर्शन के बड़े बड़े संतो बड़ी बड़ी संस्थाओं के पधाधिकारियो और युवा शक्तियों के द्वारा ये कार्य अतिशीघ करवाया जाए। मैं राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पारस जैन पार्श्वमणि सभी से आत्मीय आग्रह करता हूं कि 2023 एवम 2024 के संपूर्ण भारत के चातुर्मास तीर्थ क्षेत्र, अतिशय क्षेत्र, सिद्ध क्षेत्र के लिए समर्पित हो।मेरी भावना किसी के कोमल हृदय को दुख पहुंचाने की कदापि नही है। तीर्थ बचाओ धर्म बचाओ ।

 

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