NCERT की 9वीं की संस्कृत पुस्तक ‘शारदा’ में शामिल हुई ऋषभदेव की कथा, पाठ का शीर्षक ‘णमो अरिहंताणं’
राजेश जैन दद्दू
इंदौर, 29 अप्रैल। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9वीं की नवीन संस्कृत पाठ्यपुस्तक ‘शारदा’ के पाठ-10 में जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की पावन जीवन कथा को सम्मिलित किया है। धर्म समाज प्रचारक राजेश जैन दद्दू ने बताया कि इस पाठ का शीर्षक ‘णमो अरिहंताणं’ रखा गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संस्कृत के साथ-साथ प्राकृत भाषा की प्राचीनता और मिठास से परिचित कराना है।
पाठ की मुख्य विशेषताएं:
पाठ में सृष्टि के आरंभ में महाराज नाभि एवं मरुदेवी के पुत्र ऋषभदेव के जीवन का वर्णन है। राजा बनने के बाद ऋषभदेव ने प्रजा को कृषि, भोजन निर्माण, वस्त्र निर्माण, पशुपालन एवं नगर निर्माण जैसे जीवन के कौशल सिखाए।
ऋषभदेव के सौ पुत्रों में भरत एवं बाहुबली प्रसिद्ध हुए। पुत्री ब्राह्मी के नाम पर ही ‘ब्राह्मी लिपि’ का विकास माना जाता है। संसार की नश्वरता देखकर ऋषभदेव ने राजपाठ त्याग कर तपस्या अपनाई। 400 दिनों के कठोर उपवास तप साधना के पश्चात हस्तिनापुर में उनके प्रपौत्र श्रेयांस ने उन्हें गन्ने का रस पिलाकर पारणा कराया। यह दिन अक्षय तृतीया के रूप में विश्व में मनाया जाता है।
प्रयागराज में अक्षयवट वृक्ष के नीचे उन्हें ‘केवलज्ञान’ प्राप्त हुआ। वे जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ‘आदिनाथ’ कहलाए।
जैन धर्म के सिद्धांत:
पाठ में अहिंसा परमो धर्मः, अनेकान्तवाद, अपरिग्रह एवं सम्यक् दर्शन-ज्ञान-चरित्र रूपी तीन रत्नों का उल्लेख है। साथ ही प्राकृत भाषा में रचित णमोकार महामंत्र एवं 24 तीर्थंकरों की सूची भी दी गई है, जिनमें अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर हैं।
प्राकृत भाषा का महत्व:
पाठ में बताया गया है कि प्राचीन काल में प्राकृत जनसंवाद एवं साहित्य की प्रमुख भाषा थी। _”संस्कृत यदि नदी है, तो प्राकृत उसका सरल प्रवाह है।”_इदौर दिगंबर जैन समाज के वरिष्ठ समाजसेवी डॉ जैनेन्द्र जैन महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, तीर्थ रक्षणी सभा के टीके वेद राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन विश्व जैन संगठन के राजेश जैन दद्दू हंसमुख गांधी, मनोहर झांझरी सुशील पांड्या सुभाष काला एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका श्रीमती पुष्पा कासलीवाल महिला परिषद् की श्रीमती मुक्ता जैन एवं श्रीमती रेखा जैन श्रीफल आदि ने
*भारत सरकार का अभिवादन*करते हुए कहा कि
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा, जैन दर्शन एवं प्राचीन भाषाओं को पाठ्यक्रम में सम्मानजनक स्थान देने के लिए भारत सरकार एवं NCERT का हार्दिक अभिनंदन। यह निर्णय ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ एवं ‘विकसित भारत 2047’ की संकल्पना में नैतिक मूल्यों से युक्त, संस्कारवान पीढ़ी के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। शिक्षा के माध्यम से शासन प्रभावना का यह प्रयास सराहनीय है।
– राजेश जैन दद्दू
धर्म समाज प्रचारक, इंदौर
मो. 9425321169












