नागपुर, तुलसीनगर, अतिशय क्षेत्र श्री आदिश्वरधाम, बाजारगांव के श्री मज्जिनेंद्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव का आयोजन तुलसीनगर में दिनांक 11 से 17 अप्रैल 2026 तक अत्यंत भव्यता एवं श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में धर्म, भक्ति और उत्साह का अनुपम वातावरण बना हुआ है।महोत्सव की शुरुआत भव्य मंगल घटयात्रा एवं शोभायात्रा से हुई, जिसमें हजारों की संख्या मे महिलायें व पुरूष वर्ग शामिल हुए घट यात्रा श्री दिगंबर जैन परवार मंदिर, परवारपुरा (इतवारी) से प्रारंभ होकर श्री 1008 भगवान शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, तुलसीनगर पहुँची। परमपूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ससंघ की पावन उपस्थिति ने आयोजन को दिव्यता प्रदान की। मंदिर के समक्ष विशाल एवं आकर्षक पंचकल्याणक पंडाल सुसज्जित किया गया है, जहाँ निरंतर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं।इसी क्रम में प्रतिष्ठाचार्य बाल ब्रह्मचारी विनय भैया एवं चिद्रूप भैया जी के मार्गदर्शन में भूमि शुद्धि, मंडल शुद्धि एवं वेदी शुद्धि की विधियाँ शास्त्रानुसार संपन्न करवाई गईं, जिससे पूरा प्रांगण पवित्र एवं ऊर्जावान बना।इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारी प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया बंडा ने स्मरण कराया कि तुलसीनगर वासियों को द्वितीय बार पंचकल्याणक का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। वर्ष 2008 में परमपूज्य आचार्य गुरुवर विद्यासागर जी महाराज के सान्निध्य में वर्तमान मंदिर के पीछे (जहाँ आज गार्डन स्थित है) पंचकल्याणक सम्पन्न हुआ था और अब वर्ष 2026 में भगवान के समक्ष पुनः इसका आयोजन होना अत्यंत सौभाग्य का विषय है।परमपूज्य आचार्य श्री समयसागर जी महाराज ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में कहा कि “जो जितना लघु बनने का प्रयास करेगा, वही गुरु बनेगा।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्मसभा में सभी समान होते हैं—वास्तविक तेज उसी का प्रकट होता है जो आत्मिक सुख में स्थित होता है।अनेक जनमानस के मन में यह प्रश्न उठता है कि पंचकल्याणक महोत्सव क्या होता है? साधारण शब्दों में कहा जाए तो जब किसी नए मंदिर का निर्माण होता है, उसमें नई प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है, या किसी प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार कर प्रतिमाओं की पुनर्स्थापना की जाती है, तब ऐसी स्थिति में आचार्य/साधु एवं प्रतिष्ठाचार्य जी की पावन उपस्थिति में पंचकल्याणक महोत्सव का आयोजन किया जाता है।इस महोत्सव में भगवान आत्मा की दिव्य यात्रा का वर्णन किया जाता है—गर्भ अवस्था से लेकर जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष तक—जिसके माध्यम से उन्होंने स्वयं को सिद्ध अवस्था तक पहुँचाया। इसे इस प्रकार भी समझा जा सकता है कि जन्म से लेकर सिद्ध बनने तक का संपूर्ण अनुशासन इसमें सिखाया जाता है। यह आत्मा से मलिनता हटाकर मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर होने का मार्ग दर्शाता है। साथ ही, जो पाषाण या धातु की प्रतिमाएँ होती हैं, उन्हें मंत्रों एवं विधि-विधान के माध्यम से भगवान के चेतन स्वरूप में प्रतिष्ठित (सूर्यमंत्रित) किया जाता है।इस दौरान ध्वजारोहण कार्यक्रम भी अत्यंत श्रद्धा एवं गरिमा के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें पुण्यार्जक परिवार श्री सेठ भरत बाहुबली राजकुमार जैन (झांसी वाले), तिरुपति यूनियन ट्रांसपोर्ट द्वारा ध्वजारोहण किया गया।12 अप्रैल 2026 (रविवार) – गर्भ कल्याणक (पूर्वार्ध) कार्यक्रमप्रातः 6:00 बजे – पात्र शुद्धि, सकलीकरण, नांदीविधान, इंद्र प्रतिष्ठा, अभिषेक, शांतिधारा एवं नित्य महापूजन किए जाएंगेप्रातः 8:45 बजे – आचार्य श्री जी की पूजन एवं आशीर्वचन होंगेदोपहर 12:30 बजे – यागमहामंडल विधान आयोजित होगासायं 4:00 बजे – आचार्य श्री जी के प्रवचन होंगेसायं 7:00 बजे – संगीतमय महाआरती एवं शास्त्रवाचन होगारात्रि 7:30 बजे – सौधर्म इंद्र की इंद्रसभा, आसन कम्पायमान, नगरी रचना, माता-पिता की स्थापना, अष्टदेवियों द्वारा माता की परिचर्या एवं 16 स्वप्नों का मंचन किया जाएगारात्रि 10:00 बजे – गर्भकल्याणक की आंतरिक संस्कार क्रियाएं सम्पन्न की जाएंगीश्री दिगंबर जैन परवार मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष आनंद जैन मंत्री आशीष जैन ने सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस पुण्यमय महोत्सव की शोभा बढ़ाने का विनम्र आग्रह किया।इस भव्य महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बनकर धर्मलाभ अर्जित कर रहे हैं और तुलसीनगर एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो रहा है।प्रचार प्रसार संयोजक
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