संस्कार इंसान के सॉफ्टवेयर है
धर्म से ही ज्ञानी धर्मात्मा कहलाता है
दिगंबर जैन संत विश्रांत सागर महाराज
19 अप्रैल रविवार 2026
गुरसराय नगर मध्य प्रदेश
दिगंबर जैन पारसनाथ जिनालय में धर्म सभा को संबोधित करते हुए बताया
आज का मनुष्य अपने बुद्धि अपने ज्ञान से जो चाहे जो बन सकता है जो चाहे वह कर सकता है
धर्म के नाम पर झूठे आडंबर और दिखावा बिल्कुल भी उचित नहीं है एक दिन सच्चाई सामने आने पर अपने प्रतिष्ठा स्वयं पदाधिकारी खो देता है बड़े-बड़े पदों पर अध्यक्ष मंत्री कोषाध्यक्ष अपने पद की गरिमा का पूरा-पूरा ध्यान रखकर समाज के प्रति उत्कृष्ट कार्य करके अपने नाम की छवि बनावे
..जिस प्रकार हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर निर्जीव और बेकार होता है उसी प्रकार मानव शरीर संस्कारों के बिना अधूरा और दिशाहीन है
*
“बचपन में एक कहावत सुना था, अगर धन खोया तो कुछ नही खोया अगर परिवार खोया तो कुछ तो खो दिया, अगर संस्कार खो दिए तो सब कुछ खो दिया”
संस्कार हमें सही और गलत में भेद कराना सिखाते है, सदाचार, ईमानदारी, कर्तव्य परायणता, प्रेम करुणा, त्याग और सहानुभूति जैसी उच्च नैतिकता की शिक्षा देते है, इसलिए कहा जाता है शिक्षा से पहले संस्कार है क्योंकि ” डिग्री पहचान देती है, पर संस्कार इंसान बनाते है ”
*संस्कार हमारे मन में बार बार दोहराए गए विचार, भावनाएं और कर्मों की छाप होते है, ये छाप इतना गहरी होती है कि हमारे स्वभाव, निर्णय और जीवन की दिशा तय करती है,
जैसे मिट्टी में बीज बोया जाए और उसे बार बार पानी मिले, जैसे ही कोई विचार बार बार आने लगे तो वह संस्कार बन जाते है
संस्कारों का परिष्कार ही आत्मा का विकास है, अच्छे संस्कार आत्मबल, संयम और सद्गुणों को जन्म देते है, जबकि दूषित संस्कार भ्रम, विकार और ओर दुख का कारण बनते है, संस्कार ही वह बीज है जिनसे उज्ज्वल भविष्य का वृक्ष पनपता है
“Honesty is the best policy”..उसका स्वाद चखना है तो बहुत लंबे समय तक ईमानदारी की जिंदगी जीनी पड़ेगी, बहुत समय तक उसने ईमानदारी का जिएगा तो ही उसकी समाज में एक अलग पहचान बनेगी, पहचान के लिए संघर्ष करेगा और लोगों में उसके प्रति अटूट विश्वास होगा लोग उसको जानेंगे कि यह अच्छा इंसान है,ऐसा व्यक्ति कोई बात कहता है तो लोग उसकी बात पर तुरन्त विश्वास करेंगे, ऐसे व्यक्ति कोई भी कार्य करते है उसके कार्य सुगमता से होने लगते है, सच्चे लोगो के साथ दूसरे लोग भी धोखा नहीं कर पाते है क्योंकि अन्दर से उनकी आत्मा इनकार करती है, ये व्यक्ति अच्छा है, इसके साथ धोखा नहीं करना चाहिए
Honesty is the best policy.. उसको कहने का अर्थ बहुत गहरा होता है क्योंकि वह इस आचरण को अपने जीवन उतार चुका होता है, वह ईमानदारी से कार्य करेगा
संस्कार एक दिन में नहीं बनता, संस्कार शिक्षा को लंबे समय तक उसके ऊपर कार्य करने से, अपने जीवन implement करने बनता है, जब एक खाश तरह का स्वाद विकसित होता है और उस स्वाद को जो चख लेता है तो वह व्यक्ति ईमानदारी के लिए ईमानदार नहीं बनता, वह ईमानदारी के स्वाद को बार बार चखने के लिए ईमानदार बनता है
जय जिनेन्द्र
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट सवादादाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान













