मनुष्य को सुखी जीवन के लिए संयमित होना बहुत ही जरूरी है
गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी
जैन संतों के प्रवचन धर्म और अपनी आत्मा के लिए बहुत जरूरी है
18 अप्रैल शनिवार 2026
अतिशष क्षेत्र केशव राय पाटन दिगंबर जैन मंदिर में गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी जी विराजमान है उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवचन देते हुए बताया की दुनिया में भारत ही ऐसा देश है जहां साधु संत मिलते हैं सभी प्रकार के धर्म मिलते जिस देश में नदियां बहती है जहां धरती को माता का घर पुकार जाता है गाय को माता कहते हैं इस कारण भारत देश पूज्य है अनेकानेक धर्म मिलते हैं धर्म का काम है इच्छाओं को रोककर दुख से निकलना और सुखी की और ले जाना
इस पूरे संसार में कोई सुखी नहीं है
हर कोई कारण से दुखी है आज के मनुष्य को जीने के लिए रोटी कपड़ा और मकान उनकी पूर्ति करना अधिक कठिन नहीं है कठिनाई इच्छाओं की पूर्ति करना जो दुख का कारण है
जीवन भर इच्छाओं की पूर्ति करते-करते मरण को प्राप्त होते हैं अगर सुखी होना चाहते हैं तो अपने आप को संयमित कर लो
माता ने उदाहरण देते हुए बताया जैसे हाथी को वश में करने के लिए अंकुश घोड़े को वश में करने के लिए लगाम गाड़ी को वश में करने के लिए ब्रेक जरूरी होते हैं वैसे ही स्वयं के मन को वश में करने के लिए संयम आवश्यक होता है
पाठशाला के बच्चों को बताया कि आप पढ़ाई में अपना मन लगाकर पढ़ें सबसे पहले अपने मन को शांत करें फिर एकाग्रता में पढ़ाई में ध्यान लगावे गलत व्यसनों से बच्चों को दूर रहने का संकल्प दिलाया उन्होंने कहा जितना जरूरी पढ़ाई है उतना जरुरी शारीरिक खेल भी जरूरी है
बच्चों को यह भी बताया कि आज पढ़ लिखकर तुम कल देश के बड़े नागरिक बनोगे तुम में से कोई राजनेता कोई डॉक्टर इंजीनियर कोई देश का प्रधानमंत्री कोई मुख्यमंत्री बनेगा इसलिए पढ़ाई पर विशेष ध्यान रखकर अपने जीवन में पढ़ाई का महत्व समझे
पाठशाला के सभी अध्यापक अध्यापिकाओं ने माता की जय जयकार के पाठशाला को गूंजायमान किया
गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी पूरे भारत में विख्यात हैं जिन्होंने स्वस्ति धाम बनवाकर जैन समाज का पूरे भारतवर्ष में गौरांवित किया है जिस नगर गांव में माताजी निकलते हैं वहां उत्सव होने लगते हैं यह आपकी बहुत बड़ी विशेषता रही है
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान















