नैनवा 15 अप्रैल बुधवार 2026
अल्फाबेट पब्लिक स्कूल से प्रारंभ आर्यिका संघ का बिहार होते हुए चुंगी नाका चौराहे पर 7.30 पर दिगंबर जैन समाज द्वारा भव्य अगवानी कर नगर में प्रवेश कराया
जगह-जगह पर आर्यिका के पाद पक्षालन कर पुष्य वर्षा की गई
गाजे-बाजे के साथ आर्यिका संघ एसडीओ कोट भगत सिंह सर्किल होते हुए शांति वीर स्थल पर पहुंचा
वहां पर विशुद्ध वर्धनी मंडल द्वारा थालिया सजाकर माता का पाद पक्षालन किया
धर्म सभा से पूर्व दीवासी ग्रुप द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति दी
संगीता जैन मोडीका का द्वारा एक भजन की प्रस्तुति दी गई
महावीर सरावगी ने दिगंबर जैन समाज की ओर से आर्यिका संघ का नैनवा पधारने पर बहुत-बहुत आभार व्यक्त किया
भगवान के चित्र पर दीप प्रज्वलित समिति के सदस्य द्वारा किया गया
मनुष्य के अच्छे कर्म ही उसकी रक्षक होते हैं
शांति वीर धर्म स्थल पर गणिनी आर्यिका विज्ञ मति माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा
कर्म कहां से आते हैं और कहां समा जाते हैं जब कर्म आते हैं तो 5:30 फुट के व्यक्ति को इंसान को रुला देता है अच्छे कर्म से अपनी स्वयं की रक्षा होती है बुरे कर्म मनुष्य करता है उसे स्वयं को उनका फल भोगना पड़ता है
माता ने यह भी कहा कि अल्फाबेट स्कूल प्रातः काल बिहार करते हुए नैनवा नगरी में 10 वर्ष पूर्व प्रवेश हुआ था तब से जैन पाठशाला विशुद्ध वर्धनि महिला मंडल द्वारा गठन हुआ था आज उसे देखकर बहुत अच्छा लगा जो पौधा लगाया था बहुत ही संस्कारीत हो रहा है हमें बड़ी खुशी हुई महिला मंडल को माता ने अपना आशीष दिया
धर्म के ज्ञान से ही छोटे बच्चे आगे चलकर धर्म मार्ग पर बढ़ते हैं
माता ने बताया कि निम का पेड़ लगाने पर आम खाने के उप्रेक्षा मत करो जैसा बीज बोवोगे वैसा ही फल प्राप्त होगा सत्कर्मों से मनुष्य की पहचान बनती है एक पुत्र शादी के बाद पिता के पास रहे यह साधारण बात नहीं है यह पुत्र का पुण्य है एक कॉलेज में पढ़ने वाला विद्यार्थी उस कॉलेज में लेक्चरार बनकर आ जावे यह बहुत बड़ी बात होना माता ने बताया
माता को पाद पक्षालन शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य दो परिवार ने प्राप्त किया
महावीर प्रसाद पारस कुमार तरुण कुमार मोनू जैन नासिरदा परिवार
महेंद्र कुमार दिनेश कुमार जिनेंद्र राजेंद्र जैन ठौलिया परिवार नैनवा द्वारा
धर्म सभा का संचालन भोपाल से आए आशीष भैया ने किया
गुरु शिष्या का 10 वर्षो बाद नैनवा में मिलन हुआ
आर्यिका विशुद्ध मति माताजी
जो भारत गौरव रत्न के नाम से अपनी विख्यात पहचान है
जिन्होंने अब तक 52 दीक्षाएं दीक्षित की है उनसे दीक्षित शिष्या
आर्यिका विशेष मति माताजी जो नैनवा के नेमिनाथ तीर्थ क्षेत्र पर विराजमान है उनका स्नेह मिलन देईपोल चुंगी नाका पर हुआ गुरु शिष्य का मिलन एक अनोखा मिलन होता है
मीठी वाणी मनुष्य का आभूषण है
आर्यिका विशेष मति माताजी ने धर्म स्थल पर बतलाया इस संसार में गुरु से बढ़कर और कोई नहीं है जिन्होंने हमें दीक्षा देकर जन-जन की माता बना दिया गुरु की प्रशंसा के लिए हमारे पास कोई शब्द ही नहीं है जिन्होंने हमें शत मार्ग बताकर जीवन का उत्कृष्ट रंग भर दिया
उन्होंने बताया की अपनी वाणी ही दूसरे को मन को प्रसंचित करती है जो कार्य हम नहीं कर सकते वह अपनी मीठी वाणी से संपन्न हो जाते हैं हमें हमेशा अपने मुंह से दूसरे के प्रति मीठी वाणी का प्रयोग करना चाहिए जिस प्रकार चीनी के अंदर मिठास होता है इस प्रकार हमारी वाणी में मिठास हो
अपनी वाणी सबसे बड़ा अपना आभूषण है
महावीर कुमार सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान












