वैराग्य की राह पर अग्रसर संजय भैया बने मुनि सामायिक सागर परतापुर में ऐतिहासिक पांच दीक्षा महोत्सव में 37 वर्ष पूर्व की पुनरावृत्ति दिगम्बर धर्म में तप को ज्यादा महत्व दिया, तप के बिना स्वर्ण भी नहीं निखरता है, तपने वाला ही मोक्षगामी बन जाता है अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज

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औरगाबाद नरेंद्र पियुष जैन         धर्म नगरी में दिगम्बर जैन परंपरा का एक ऐतिहासिक क्षण उस समय साकार हुआ जब वैराग्य भाव से ओतप्रोत संजय भैया ने गृहस्थ जीवन का त्याग कर संयम मार्ग को स्वीकार किया। समाज के चिंतन दोसी एवं दिलीप दोसी ने बताया कि अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज के सान्निध्य में आयोजित भव्य दीक्षा महोत्सव में बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच उन्हें दिगम्बर जैन साधु परंपरा में दीक्षित कर मुनि सामायिक सागर महाराज के रूप में नया आध्यात्मिक जीवन प्रदान किया गया। दीक्षा समारोह से पूर्व भैया ने जिनेन्द्र देव की शांतिधारा की और उनकी आज्ञा लेकर संजय भैया एवं अन्य दीक्षार्थी शोभायात्रा के रूप में नगर के सुभाष चन्द्र बोस स्टेडियम में पहुंचे, पांडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं ने सफेद सरसों एवं अक्षत से उनका स्वागत कर मंच पर पहुंचाया। प्रारंभ में दीक्षार्थी संजय भैया की पत्नी सहित परिवारजनों ने चौक पुराई कर आसन बनाया, जिस पर बैठकर दीक्षार्थियों ने संयम मार्ग की ओर प्रथम कदम बढ़ाया। दीक्षा समारोह में बताया गया कि 1989 में परतापुर की पावन भूमि पर आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज ने पांच दीक्षाएं प्रदान की थीं, जिनमें एक दीक्षार्थी आगे चलकर आचार्य प्रसन्न सागर महाराज बने। अब 2026 में पुनः वही इतिहास दोहराया गया, जब इसी भूमि पर फिर से पांच दीक्षा संस्कार संपन्न हुए। दीक्षा संस्कार की पावन
परतापुर। कार्यक्रम में दीक्षार्थी एवं क्षुल्लिक को दीक्षा प्रदान करते गुरुदेव।
बेला में आचार्य ने पंच मुष्ठी केशलोच करा कर दीक्षा संस्कार प्रारंभ किए तथा सभी के मस्तक पर स्वास्तिक चिन्ह बना कर वैराग्य की यात्रा प्रारंभ की। इस अवसर पर संचालन कर रहे बाल ब्रह्मचारी विज्ञानाचार्य तरुण भैया कहा कि कन्यादान तो हमेशा सुना है पर आज इस धरा पर गुरु के चरणों में पतिदान करके मैनादेवी ने अपनी नारी पर्याय को धन्य कर दिया। परतापुर का सौभाग्य ऐसा है कि गुरु और शिष्य दोनों की दीक्षा भूमि यही है। संजय भैया की जन्म, कर्म और दीक्षा भूमि बन गई, वहीं आचार्य प्रसन्न सागर महाराज की दीक्षा भूमि पवित्र भी यही है। आचार्यश्री ने दीक्षा महोत्सव पर कहा कि पांच पापों का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा प्राप्त होती है। दिगम्बर धर्म में तप को ज्यादा महत्व दिया, तप के बिना स्वर्ण भी नहीं निखरता है, तपने वाला ही मोक्षगामी
बन जाता है। 37 वर्षों पूर्व इसी भूमि पर दीक्षार्थी के माता-पिता शीला देवी और तेजपाल पंचोरी को सौभाग्य मिला था। आज उसी गुरू से एक दिन पहले श्रीफल भेंट कर दीक्षा देने की भावना शीला देवी ने रखी और गुरु ने आशीर्वाद दिया और दीक्षा देना प्रारंभकिया। विशेष क्षण वह था, जब जिस मां ने पहले केशलोंच प्राप्त किया था, आज उसी का धर्म पुत्र मां का केशलोच कर दीक्षा दे रहा था। यह दृश्य देखकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। दीक्षा से पूर्व संजय भैया ने अपने भाव व्यक्त करते हुए कहा कि वे 38 वर्षों से समाज सेवा और धर्मकार्य में लगे रहे। जीवन में आचार्य विद्यासागर जैसे महान आचार्यों सा मेरा चरित्र हो, आचार्य कनकनंदी जैसी त्याग समता हो, आचार्य सुन्दर महाराज जैसा मेरा वात्सल्य हो, आचार्य श्री सन्मति एवं आचार्य प्रसन्न सागर
जैसी मेरी साधना, तप हो आज्ञा सागर जैसी मेरी सरलता हो और आर्यिका मां विज्ञानमति माताजी जैसी चर्या हो मेरी। क्षमा को आदर्श मानकर साधना करने की भावना व्यक्त की। इस अवसर पर आचार्य श्री ने ज्ञानप्रभा माताजी को गणिनी पद से सुशोभित किया, जो संघ की सभी आर्यिकाओं का संचालन करेंगी। दीक्षा संस्कार के दौरान आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने आचार्य कुंदकुंद आम्नाय परंपरा के अनुसार नामकरण संस्कार कर संजय भैया को मुनि सामायिक सागर महाराज के नाम से संबोधित किया तो हजारों श्रद्धालुओं ने दोनों हाथ जोड़कर पहला नमोस्तु करते हुए इनके उत्कृष्ट साधना की कामना की। दीक्षार्थियों के लिए पिच्छिका तथा कमंडल और शास्त्र परिवारजनों ने आचार्य श्री को भेंट किए। इसके बाद आचार्य श्री ने मुनि सामायिक सागर महाराज सहित पांचों दीक्षार्थी को पिच्छिका व कमंडल व शास्त्र प्रदान कर संयम जीवन का प्रारंभ कराया। दीक्षा महोत्सव में भोजन प्रभावना के दातार मैयावत परिवार का सम्मान किया । संजय भैया-मुनि सामायिक सागर महाराज, क्षुल्लक अर्घ सागर मुनि अर्घ सागर महाराज, क्षुल्लिका धर्म प्रभा माताजी, आर्यिका धर्म प्रभा माताजी, कनक दीदी-क्षुल्लिका द्रव्य प्रभा माताजी, सुशीला पंचोरी-क्षुल्लिका भाव प्रभा माताजी। इस कार्यक्रम में देश विदेश एवं कई राज्यों से आए श्रद्धालु मौजूद रहे। ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है
– Piyush Kasliwal
9860668168

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