नेत्रदान, रक्तदान मरणोपरांत देहदान हमारी सांस्कृतिक विरासत… ………………

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नेत्रदान, रक्तदान मरणोपरांत देहदान हमारी सांस्कृतिक विरासत… ………………
अजीत कोठिया डडूका बांसवाड़ा राजस्थान की रिपोर्ट
महावीर इंटरनेशनल की ई चौपाल में मंगलवार को रक्तदान, नेत्रदान ओर मरणोपरांत देहदान विषय पर संभागीयों द्वारा व्यापक चर्चा परिचर्चा की गई। चर्चा की शुरुआत करते हुए चौपाल इंटरनेशनल अजीत कोठिया ने देहदान को महर्षि दधीचि की ऐतिहासिक ओर सांस्कृतिक विरासत बताते हुए सभी से देहदान, अंगदान ओर नेत्रदान का आह्वान किया।
कोठिया ने कहा कि रक्त न तो किसी फैक्ट्री में बनता है और नहीं मेडिकल स्टोर्स पर मिलता है, एक स्वस्थ व्यक्ति ही किसी को रक्तदान कर सकता है और इन तीन दानों से बढ़कर ओर कोई दान नहीं है जिसके माध्यम से किसी के प्राण बचाकर उसे नवजीवन प्रदान किया जाता है।
इस अवसर पर सुमेरसिंह कर्णावत, भुवनेश्वरी मालोंत, निधि गांधी, विजया चौधरी, राजलक्ष्मी भंडारी, मीना जैन, आरती मूंड, रतन फलोदिया, प्रदीप टोंग्या, सुरेश चंद्र गांधी, महेश मूंड, वंदना बक्षी,रवींद्र लूनिया तथा सुनीता जम्मार ने भी विचार व्यक्त किए। सभी सदस्यों से अपना अपना ब्लड ग्रुप अपने स्टेट्स पर शेयर करने ओर सभी मित्रों से सभी सदस्यों के नंबर ब्लड ग्रुप सहित सेव करने आग्रह किया गया।
इस अवसर रतन फलोदिया ने सभी सेंटर्स द्वारा अब तक किए गए रक्तदान नेत्रदान ओर देहदान के समेकित आंकड़े एपेक्स को सूचित करने आग्रह किया ताकि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे कार्यों का डाटा बेस तैयार हो सके। चौपाल में 32सदस्यों ने हिस्सा लिया। संचालन अजीत कोठिया ने किया आभार महेश कुमार मूंड ने व्यक्त किया।

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