भाग्योदय तीर्थ: गुरु-आशीर्वाद से जन-कल्याण का एक स्वर्णिम अध्याय

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भाग्योदय तीर्थ: गुरु-आशीर्वाद से जन-कल्याण का एक स्वर्णिम अध्याय

​सागर (मध्य प्रदेश)। वर्ष 1993 में सागर की पावन धरा पर परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के मंगल सानिध्य में भव्य ‘पंचकल्याणक महोत्सव’ संपन्न हुआ। धर्म की उस सरिता में जहां पूरा नगर सराबोर था, वहीं कुछ उत्साही युवाओं के मन में एक वैचारिक मंथन चल रहा था। विचार यह था कि इस ऐतिहासिक महोत्सव की स्मृति में कुछ ऐसा रचनात्मक और परोपकारी कार्य किया जाए, जो सदैव मानवता की सेवा करता रहे।
​व्यक्तिगत लाभ से ‘सर्वजन हिताय’ का संकल्प
​उसी दौरान, सुप्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अमरनाथ जी अपने निजी अस्पताल की स्थापना के लिए आचार्य श्री का आशीर्वाद लेने पहुंचे। युगद्रष्टा आचार्य श्री ने उन्हें एक नई दृष्टि प्रदान करते हुए कहा— “कार्य ऐसा करो जो व्यक्तिगत लाभ तक सीमित न होकर, संपूर्ण समाज के लिए उपयोगी हो।”
​गुरु ji के इन शब्दों ने संकल्प की दिशा बदल दी। डॉ. अमरनाथ जी और उनके युवा साथियों ने एक विराट योजना तैयार की और पुनः आचार्य श्री के चरणों में उपस्थित हुए। गुरुवर ने योजना को आशीर्वाद देते हुए मार्ग प्रशस्त किया कि— “संस्थान ऐसा हो जहाँ मानव कल्याण सर्वोपरि हो, अहिंसा का व्यापक प्रचार-प्रसार हो और जो सभी के लिए मंगलकारी सिद्ध हो।”
​नामकरण और स्थापना
​आचार्य श्री ने स्वयं इस पावन संकल्प को नाम दिया— ‘भाग्योदय तीर्थ’ (मानव कल्याण एवं चिकित्सा अनुसंधान केंद्र)। इस संस्थान का मूल उद्देश्य एक ऐसी चिकित्सा पद्धति का विकास करना था, जहाँ विभिन्न पद्धतियों के समन्वय के साथ-साथ उपचार पूर्णतः अहिंसक हो। लक्ष्य केवल शरीर का उपचार नहीं, बल्कि आत्मा के कल्याण की भावना को जागृत करना भी था।
​इस भगीरथ कार्य के लिए 16 एकड़ भूमि का चयन किया गया और 2 मई 1995 को आचार्य श्री के सानिध्य में इसका भव्य भूमि पूजन संपन्न हुआ।
​शून्य से शिखर तक का सफर
​प्रारंभिक अवस्था में संसाधनों और धन की चिंता स्वाभाविक थी, किंतु गुरु-आशीर्वाद का ही प्रताप था कि विघ्न स्वतः दूर होते गए। संस्थान ने अपनी सेवाओं की शुरुआत ग्रामीण अंचलों में निःशुल्क चिकित्सा शिविरों, रक्तदान अभियानों और दिव्यांगों को कृत्रिम उपकरण वितरित करने जैसे सेवा कार्यों से की।
​वर्तमान स्वरूप: आधुनिकता और आध्यात्मिकता का संगम
​आज ‘भाग्योदय तीर्थ’ सफलता के नए आयाम गढ़ रहा है। वर्तमान में यहाँ:
​400 बिस्तरों वाला सर्वसुविधायुक्त अस्पताल: जहाँ CT-Scan, MRI, Cath Lab, Echo और आधुनिक ऑपरेशन थिएटर जैसी विश्वस्तरीय सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
​विशेषज्ञ टीम: अनुभवी और वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे मानवता की सेवा में समर्पित है।
​शिक्षा का केंद्र: स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ यहाँ फार्मेसी कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज का सफलतापूर्वक संचालन हो रहा है।
​आध्यात्मिक गौरव: संस्थान परिसर में ‘सर्वतोभद्र जिनालय’ का निर्माण कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है, जो आने वाले समय में श्रद्धा का प्रमुख केंद्र होगा।

भाग्योदय तीर्थ केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल है। आचार्य श्री विद्यासागर जी के चरणों में मेरा बारम्बार नमोस्तु 🙏🙏🙏🙏🙏
भाग्योदय तीर्थ हॉस्पिटल, सागर
योगेश जैन संवाददाता, टीकमगढ़

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