नई दिल्ली, 26 अप्रैल 2026 — जैन दर्शन एवं प्राकृत भाषा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात विद्वान प्रो. (डॉ.) अनेकांत कुमार जैन को आज सिद्धांतचक्रवर्ती आचार्य विद्यानंद मुनिराज की 101 वीं जन्मजयंती के अवसर पर कुंदकुंद भारती,नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य समारोह में “आचार्य विद्यानन्द पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम परमपूज्य आचार्य श्री श्रुतसागरजी मुनिराज के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्री सतीश चंद्र जैन (SCJ) परिवार की ओर से प्रो. जैन को सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र एवं विशेष सम्मान-चिह्न भेंट किया गया । मंच पर उनकी धर्म पत्नी डॉ रुचि जैन का भी विशेष सम्मान किया गया ।
ज्ञातव्य है कि प्रो. (डॉ.) अनेकांत कुमार जैन जैनधर्म दर्शन एवं प्राकृत भाषा के एक उत्कृष्ट विद्वान, प्रखर वक्ता, कुशल शिक्षक तथा विशिष्ट लेखक के रूप में जाने जाते हैं। आप वरिष्ठ विद्वान् प्रो.फूलचंद हैं प्रेमी एवं विदुषी डॉ मुन्नीपुष्पा जैन ,वाराणसी के ज्येष्ठ सुपुत्र हैं तथा वर्तमान में आप श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में दर्शनशास्त्रपीठ के प्रमुख तथा जैन दर्शन के आचार्य हैं।
समारोह में मूडबद्री के भट्टारक स्वामी जी एवं हस्तिनापुर के स्वामी रवीन्द्र कीर्ति जी, राज्यसभा सांसद मीनाक्षी जैन जी, तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष श्री जंबूप्रसाद जी , वरिष्ठ विद्वान् प्रो.वीरसागर जैन जी आदि दिल्ली NCR जैन समाज के अनेक प्रतिष्ठित श्रेष्ठियों पदाधिकारियों की अपार उपस्थिति रही।
आचार्य श्रुतसागर जी महाराज ने विशेष आशीर्वाद देते हुए कहा कि प्रो.जैन ने प्राकृत भाषा में पहला अखबार ‘ पागद भासा ‘ प्रकाशित करके इतिहास बनाया है । अनेक शोध पूर्ण लेख एवं ग्रंथ लिखकर जो योगदान दिया है उसके आगे यह पुरस्कार कुछ भी नहीं है ।
कुंदकुंद भारती के महामंत्री श्री अनिल जैन की ओर से बताया गया कि प्रो. जैन का कार्य युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है और यह सम्मान उनके दीर्घकालीन योगदान का प्रतीक है।












