कविता: संजय बने सामायिक सागर…. अजीत कोठिया डडूका
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बरसो की उसकी चाहत
आज हुई पूरी।
संजय ने छोड़ा घर,
धारा दिगंबर भेष
छोड़ी मैना, मुक्ति, नीरा मां
पुत्र चिंतन का चिंतन त्यागा
दीक्षा को 37वर्षों से बेताब
आज हुआ पूरा संजय का ख्वाब
साधना महोदधि आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने
तराश दिया आज
संजय से एक नवमुनि
श्री सामायिक सागर!
आओ करे नमोस्तु,
आज मिली समाज को नव गणिनी मां ज्ञान प्रभा
बढ़ा परतापुर का गौरव
एक ओर मुनि दीक्षा हुई
मुनि अर्ध सागरजी के रूप में
एक आर्यिका हुई धर्म प्रभा जी
तो दो नव दीक्षित क्षुल्लिकाए,
द्रव्यप्रभा एवं भावप्रभा माताजी
नगर हुआ निहाल!
पांच दिशाएं
26अप्रैल 2026
नया इतिहास बना वैराग्य का!
सभी को नमन!
सभी को वंदन!!
सभी का अभिनंदन!!!
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