स्कूली शिक्षा में प्राकृत अतिरिक्त विषय के रूप में शामिल

लागू करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य 

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उदयपुर – माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान द्वारा कला संकाय के अंतर्गत पूर्व में संचालित प्राकृत भाषा वैकल्पिक विषय को शैक्षणिक सत्र 2023-24 से अतिरिक्त विषय के रूप में भी सम्मिलित कर लिया गया है। बोर्ड सचिव मेघना चौधरी के आदेश के अनुसार कक्षा 11 एवं 12 में कला संकाय के अंतर्गत लिये जाने वाले तीन वैकल्पिक विषयों के साथ ही विद्यार्थी अब चौथे अतिरिक्त वैकल्पिक विषय के रूप में अध्ययन कर सकेंगे। पहले ऐसा संभव नहीं था। स्कूली शिक्षा के स्तर पर प्राकृत भाषा को अतिरिक्त विषय के रूप में लागू करने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य है।
श्रमण डॉ पुष्पेन्द्र ने बोर्ड के निर्णय का स्वागत किया और कहा कि अब विद्यार्थी संस्कृत, हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, भूगोल, कम्प्यूटर विज्ञान, इतिहास, संगीत में से कोई भी तीन विषयों के साथ प्राकृत भाषा के अध्ययन का विकल्प भी ले सकेंगे।
उल्लेखनीय है कि प्राज्ञ शिक्षण संस्थान के निदेशक डॉ. नवलसिंह जैन के अनुसार इस संबंध में श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति, बिजयनगर ने भी बोर्ड को पत्र लिखा था।
अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन शोध केन्द्र के पूर्व निदेशक डॉ. दिलीप धींग ने कहा कि प्राकृत का अध्ययन भाषाई सौहार्द बढ़ाता है, क्योंकि प्राकृत जानने से संस्कृत, हिंदी, राजस्थानी और अन्य भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों और आंतरिक समरूपता को आसानी से जाना जा सकता है।
इस अवसर पर राजस्थान समग्र जैन युवा परिषद् के अध्यक्ष जिनेन्द्र जैन ने बताया कि प्राकृत भाषा के शिक्षण के उत्थान के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए राज्य एवं केन्द्र सरकार को निवेदन किया था राजस्थान सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा में प्राकृत भाषा को अतिरिक्त विषय के रुप में शमिल कर बेहद महत्वपूर्ण निर्णय लिया है इसके लिए अल्पसंख्यक वर्ग का सम्पूर्ण जैन समुदाय माननीय मुख्यमंत्री अशोक गहलोत,कैबिनेट शिक्षा मंत्री बुलाकी दास कल्ला,शिक्षा राज्य मंत्री जाहिदा खान,उच्च शिक्षा राज्य मंत्री राजेन्द्र सिंह यादव,अल्पसंख्यक मामलात मंत्री शाले मोहम्मद,अल्पसंख्यक राज्य मंत्री सुभाष गर्ग,राजस्थान अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष रफीक खान एवं समस्त अल्पसंख्यक विधायकों तथा शासन सचिव स्कूल शिक्षा एवं भाषा विभाग का तहेदिल से आभार व्यक्त करता है l

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