पांडुक शिला पर बाल तीर्थकर आदिकुमार का सौधर्म इंद्र ने किया जलाभिषेक

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द्रोणगिरि (सेंधपा) / –
बुन्देलखण्ड के जैनियों के पवित्र सिद्धक्षेत्र द्रोणगिरि में भारतगौरव गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज एवं उच्चारणाचार्य श्री विनम्र सागर जी महाराज ससंघ (पचास पिच्छिका से अधिक) श्री मानस्तंभ जिनबिंब प्रतिष्ठा महोत्सव में गुरुवार को जन्म कल्याणक महोत्सव मनाया गया। रात में गर्भ कल्याणक की क्रियांयें संपन्न हुई जहां छप्पन कुमारियों ने माता की सेवा की और भेट अर्पित की । वही सोलह सपने दिखाएं गए और महाराजा नाभिराय के दरबार में तत्वचर्चा स्वप्न फल जिज्ञासा महाराज द्वारा सपनों का फलादेश बताया गया। पंचकल्याणक महोत्सव की सभी क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य बा. ब्र. जयकुमार जी निशांत टीकमगढ़, पं. सनत कुमार पं. विनोद कुमार रजवांस के निर्देशन में विधि विधान से संपन्न कराई जा रही है ।
पांडूक शिला पर हुआ अभिषेक
जन्मकल्याणक के दिन विशाल भव्य जुलूस निकाला गया। जहां हाथियों पर बैठकर भगवान तीर्थंकर का भ्रमण हुआ। सौधर्म इंद्र ने तीर्थंकर कर को पांडुक शिला पर ले जाकर सहस्त्र कलशों से जलाभिषेक किया । वही पालना का कार्यक्रम भी हुआ जहां इंद्र और भारी जनसमुदाय ने पालना झुलाया ।

कुबेर और सौधर्म इंद्र ने की भक्ति
जन्म कल्याणक के दिन सौधर्म इंद्र कमल कुमार जैन , कुबेर प्रमोद बड़े पाटन , यज्ञनायक हेमचंद कर्री वाले , ईशान इंद्र बाबूलाल समर्रा वाले , सानतकुमार इंद्र संदीप फौजदार बड़ामलहरा , माहेंद्र इंद्र शोभालाल पनवारी वाले परिवार ने भक्ति की । वही सायं कालीन महाआरती शील देवडिया परिवार बड़ामलहरा ने भक्ति की ।
86 जिनबिम्बों की होगी प्रतिष्ठा
जैन तीर्थ द्रोणगिरि के उपाध्यक्ष राजेश रागी ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि इस पंचकल्याणक महोत्सव में मानस्तंभ तथा जिनालयों में विराजमान होने वालें 86 जिनबिम्बों की प्रतिष्ठा की क्रियाएं सम्पन्न कराई जा रही है । इस अवसर पर विरागोदय तीर्थ पथरिया में आगामी 10 से 15 फरवरी 2024, तक आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव हेतु महोत्सव समिति एवं क्षेत्रीय सामाज ने पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर जी महाराज को श्रीफल अर्पित करते हुए आशीर्वाद प्राप्त किया और महोत्सव पंचकल्याणक की पत्रिका का विमोचन कराया गया ।
आज होंगी तप कल्याणक की क्रियाएं
आज 19 जनवरी शुक्रवार को तपकल्याणक के अवसर पर प्रातःकाल त्रिकाल चौवीसी जिनालय में महामस्तकाभिषेक , दोपहर दोपहर में राज दरबार, आदि कुमार का पाणिग्रहण, राज्याभिषेक राजतिलक, राजव्यवस्था, 3200 मुकुटबद्ध राजाओं द्वारा 6 कालक्षेत्र की 6 विधाओं की प्रस्तुति, ट्रस्ट एवं प्रबंध समिति द्वारा भेंट ,महाआरती एवं कवि सम्मेलन आदि कार्यक्रम किए जाएंगे।

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