भारतीय डाक विभाग के द्वारा जारी डाक सामग्री में ऐतिहासिक जैन धरोहर।

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जैन धरोहर दिवस

भारतीय डाक विभाग के द्वारा जारी डाक सामग्री में ऐतिहासिक जैन धरोहर।

जैन धरोहर गिरनार पर्वत पर सबसे पहला डाक टिकट आजादी के पहले जारी हुआ था।

इंदौर (ओम पाटोदी)। हमारी प्राचीन धरोहर हमें अपनी गौरवपूर्ण सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है। भारत एक ऐसा देश है जो कई युद्ध और विदेशी आक्रांताओं आक्रमणों को झेलने के बाद भी अपनी सांस्कृतिक पहचान को अच्छून बनाए रखने में सफल रहा है। यह भारतीय जनता का अपनी विरासत के प्रति भावनात्मक लगाव का परिणाम है। आज भी भारत की ऐतिहासिक विरासत और धार्मिक धरोहर विश्व में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखती है। दिनांक 27 अप्रैल सोमवार को श्रद्धेय निर्मल कुमार जी सेठी की पुण्यतिथि के अवसर पर 5वां जैन धरोहर दिवस मनाया जाएगा।

उक्त जानकारी देते हुए निर्ग्रन्थ सेंटर आफ आर्कियोलॉजी के पुरातत्व संयोजक एवं वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के ओम पाटोदी ने बताया कि भारतीय डाक विभाग द्वारा समय-समय पर डाक टिकटों एवं अन्य डाक सामग्री के माध्यम से भारत की ऐतिहासिक विरासत से जनता को रूबरू करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसी तारतम्य में जैन धरोहर पर भी कई डाक सामग्री जारी की गई है। यह शुरूआत अंग्रेजी शासन काल से ही हो चुकी थी। जैन धरोहर पर पहला डाक टिकट 18 अक्टूबर 1929 में सौराष्ट्र रियासत के द्वारा जैन तीर्थ गिरनार (जूनागढ़) पर एक सुंदर डाक टिकट जारी किया था यह डाक टिकट 3 पाई मूल्यवर्ग का था और इस पर भगवान नेमीनाथ स्वामी की निर्वाण स्थली गिरनार पर्वत का चित्र प्रकाशित किया गया था। इसी प्रकार वर्ष 1935 में  6 मई को जैन धरोहर पर दूसरा डाक टिकट कलकत्ता के भगवान श्री शीतलनाथ जिनालय पर जारी किया गया था ये दोनों टिकट आजादी के पहले जारी हुए थे आजादी के बाद जैन विरासत पर जो पहली डाक टिकट जारी की गई वह जैन तीर्थ शत्रुंजय (पालीताणा) जैन मंदिर पर जारी हुईं थीं। यह टिकट 15 अगस्त 1949 को जारी किया गया था। इसके बाद तो कई ऐतिहासिक विरासत के डाक टिकट जारी हुई है जिसमें भगवान महावीर स्वामी जी के 2500वें निर्वाण महोत्सव पर पावापुरी जैन मंदिर, मुंबई का राजाबाई क्लॉक टावर, जैन सरस्वती प्रतिमा, रणकपुर दिलवाड़ा जैन मंदिर के डाक टिकट, खजूराहो के जैन शिल्प का टिकट ओर विश्व प्रसिद्ध मूर्ति शिल्प भगवान श्री गोमटेश्वर बाहूबली आदि के डाक टिकट उल्लेखनीय है।

इसी प्रकार पाटोदी ने बताया कि भारतीय डाक विभाग डाक टिकटों के अलावा चित्रात्मक पोस्टकार्ड,  विशेष कैंसिलेशन मुहरों आदि के माध्यम से भी जैन ऐतिहासिक धरोहरों को प्रकाशित प्रचारित किया हैं। बाहुबली स्वामी के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मूर्ति शिल्प एवं दक्षिण भारत की ऐतिहासिक धरोहरों पर कई चित्रात्मक पोस्टकार्ड एवं स्पेशल केंसिलेशन जारी हुए हैं उसमें से मात्र कुछ की झलक यहां प्रस्तुत की गई है।

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