भगवान महावीर स्वामी सज्जन पुरुष थे उन्हें इसीलिए याद करते हैं
जैन संत प्रज्ञान सागर महाराज
नैनवा 27 फरवरी शुक्रवार
दिगंबर जैन संत प्रज्ञान सागर प्रसिद्ध सागर महाराज का मंगल प्रवेश दिगंबर जैन चंदा प्रभु नसिया पर हुआ दिगंबर जैन समाज द्वारा भव्य अगवानी कर नगर में प्रवेश कराया
वहां से गाजे-बाजे के साथ पुष्य वर्षा करते हुए जगह जगह तोरण द्वार रंगोली पाद पक्षालन करते हुए शांति वीर धर्म स्थल पर महिला मंडलों द्वारा थालियां में पुष्प सजाकर मुनि संघ का पदार्पण कराया
शांति वीर धर्म स्थल पर आचार्य विनिश्चय सागर महाराज के चित्र पर बाहर से पधारे अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया
मुनि संघ में कोलकता से चिराग जैन टोंक के काला साहब ज्ञानचंद जैन कन्हैयालाल धर्मचंद आदि का तिलक माला दुपट्टा पहनाकर समिति द्वारा स्वागत सम्मान किया
स्वागत गान पलक जैन संगीता जैन मोडीका का द्वारा किया गया
मंगलाचरण की प्रस्तुति श्रीमती बीना जैन मोडीका का द्वारा
मुनि श्री पर उद्बोधन महावीर सरावगी के द्वारा धर्म सभा का संचालन मोहनलाल जैन मारवाड़ा
मुनि के पादपक्षालन मोहनलाल कमल कुमार जैन मारवाड़ा नैनवा
शास्त्र भेट सुमती प्रकाश अशोक धर्मचंद जैन मोडीका द्वारा
जैन संत प्रज्ञानसागर महाराज ने बताया पर्वत के समान ऊंचा भारी हिलने वाला कोई नहीं होता हवा चलने पर पर्वत अपने स्थान पर यथावत रहता है जबकि पेड़ उखड़ कर धराशाई हो जाते हैं टूट जाते हैं
संत ने उदाहरण देते हुए बताया की एक संत सरोवर तट पर बैठे थे एक बिच्छू पानी में गिर गया उन्हें निकालने पर वह डक मारता है फिर गिरता है फिर मारता है बार-बार डंक मारने पर भी संत अपना स्वभाव नहीं छोड़ते और दुर्जन व्यक्ति अपना स्वभाव नहीं छोड़ते
संत ने बताया की संत सरल स्वभाव के होते हैं सदैव जीव की रक्षा करते हैं और दुर्जन व्यक्ति बुरे आचरण के होते हैं उनका स्वभाव ही बुरा ही रहता है
उन्होंने यह भी बताया कि जिस देश का झंडा तिरंगा हो जिस देश में गंगा बहती हो जिस देश का संत दिगंबर हो वहां सदैव खुशियां ही खुशियां बरसती है
अहिंसा धर्म से बड़ा कोई धर्म नहीं है
जैन संत प्रसिद्ध सागर महाराज
मनुष्य जो भी कर्म करते हैं उन्हें भी उनसे हम धर्म कर सकते हैं भोजन करना दुकान चलाना घूमना देखना यह सब कार्य में हम धर्म की क्रिया कर सकते हैं
भोजन में शुद्ध भक्ष भोजन करें अभक्ष नहीं यही धर्म है
घूमने पर देखकर चलना जिओ की रक्षा करना ही धर्म है
दुकान पर बैठकर वस्तु पर अधिक मुनाफा ना लेना भी धर्म है
एक मांसाहारी शेर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया जयपुर शहर में एक अंग्रेजी गवर्नर की हत्या होने पर पूरे जयपुर को समाप्त करने का निर्णय लिया जयपुर के ही एक अमरचंद दीवार ने अपने ऊपर हत्या का इंतजाम ले लिया ताकि अन्य लोग तो बच सकेंगे उन्होंने शेर के पिंजरे में अमरचंद को छोड़ दिया जो काफी भूखा था
अमर चंद द्वारा एक थाल में जलेबी और दूध लेकर पिंजरे में गया शेर से से कहा कि तुम खाने के लिए जी रहे हो तुम मेरा बक्श कर लो और जीने के लिए जी रहे हो तो दूध और जलेबी खा लो मांसाहारी शेर
जाति स्मरण होने पर उसने दूध और जलेबी खाकर अमरचंद को नहीं खाया यही अहिंसा धर्म मुनि ने बताया
आज दोपहर को 3:00 मुनि संघ विहार देई ग्राम के लिए होगा रात्रि विश्राम अल्फाबेट मारवाड़ा स्कूल में होगा
महावीर कुमार सरावगी
दिगंबर जैन समाज प्रवक्ता नैनवा


















