यात्राएं तनाव और अवसाद से भी बचाती हैं

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विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन (भोपाल /पुणे) – ऑफिस और घर के बीच समय निकालकर यात्रा पर जरूर जाएं। इससे आप तनाव मुक्त होंगी और आपका मेंटल हेल्थ मजबूत होगा। यदि आप अकेले यात्रा करते हैं, तो आपको अपने-आपको समझने का अवसर मिलता है। अपनी पसंद-नापसंद को जान पाते हैं।

कोरोना महामारी की आशंकाओं के बीच यात्रा पर रोक नहीं लगाई गई है। यात्रा करने वाले लोगों से एहतियात बरतने को कहा जा रहा है। ताकि लोग यात्रा का आनंद ले सकें और वे कोरोना महामारी से भी बचे रहें। हर प्रकार के तनाव को दूर कर देती है यात्रा। इसलिए मेंटल हेल्थ के लिए जरूरी है यात्रा।

फायदेमंद है यात्रा –

ट्रेवल आप अकेले करें या साथ में, ये तनाव और अवसाद को दूर कर मेंटल हेल्थ को मजबूती देता है।

(1) यात्रा हैप्पीनेस बढ़ाती है –

जो लोग नियमित रूप से यात्रा करते हैं वे उन लोगों की तुलना में लगभग १० प्रतिशत अधिक खुश रहते हैं। जो शायद ही कभी यात्रा करते हैं या बिल्कुल यात्रा नहीं करते हैं। महामारी के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि लोग तनाव और अवसाद के अधिक शिकार हुए। क्योंकि लोगों ने लॉक डाउन के कारण यात्रा नहीं की। यात्रा और खुशी के बीच एक कड़ी की पहचान की गयी। यदि आप अकेले यात्रा करते हैं, तो आपको अपने-आपको समझने का अवसर मिलता है। अपनी पसंद-नापसंद को जान पाते हैं।

(2) सकारात्मक भाव उत्पन्न होते हैं –

जब यात्रा की योजना बनती है, तो ख़ुशी की लहर दौड पडती है। आप सारे काम ख़ुशी और आनंद के साथ निपटाते जाते हैं। आप पर डेडलाइन पर काम पूरा करने का कोई भार नहीं होता है। जिन लोगों ने घर से बाहर प्रकृति के बीच समय बिताया। उन्होंने उन लोगों की तुलना में अधिक सकारात्मक भावनाओं की सूचना दी, जिन्होंने घूमने को प्रश्रय नहीं दिया। उनके मष्तिष्क में हैप्पी हॉर्मोन डोपामाइन और सेरेटोनिन का सीक्रेशन अधिक देखा गया।

(3) यात्रा अवसाद के जोखिम को कम कर सकती है –

अवसाद के जोखिम को कम करने के लिए यात्रा जरूरी है। ऑफिस स्ट्रेस का सामना कर रही महिलाओं /पुरुषों को जब ट्रेवल के लिए भेजा गया, तो उनमें अवसाद के लक्षण में कमी देखी गई।
ब्रेक के दौरान उन्होंने कम तनाव और अवसाद की सूचना दी। दरअसल, यात्रा लोगों को रोजमर्रा के जीवन से बाहर निकालती है। यदि व्यक्ति किसी प्रकार के तनाव का सामना कर रहा है, तो यात्रा के अनुभव उसे तनावमुक्त करते हैं।

(4) यात्रा क्रिएटिव बनाती है –

यदि आप थका हुआ महसूस कर रही हैं, तो ट्रैक पर वापस आने के लिए यात्रा उपयोगी हो सकती है। यात्रा और रचनात्मकता के बीच गहरा संबंध है। यात्रा क्रिएटिविटी पर प्रभाव डालती है। ट्रेवल करते समय हमें अलग-अलग कल्चर, लोगों, खानपान, जीवनशैली से रूबरू होने का अवसर मिलता है। इससे रचनात्मकता को बढ़ावा मिलता है।

(5) यात्रा रिश्तों को मजबूत बनाती है –

ट्रेवल के दौरान यदि आप अपने किसी रिलेटिव से मिलते हैं, तो उनके करीब महसूस करती हैं। आपका सामना उन सुखद अनुभवों से हो पाता है, जिनकी कभी आपने कल्पना की होगी। इससे घर-परिवार के लोगों के साथ संबंध मजबूत हो पाते हैं।

जिन लोगों ने अपने पार्टनर के साथ यात्रा की, यात्रा के बाद उनमें अधिक संतुष्टि देखी गई। यात्रा के कारण साथ समय बिताने का अधिक अवसर मिला। इससे दोनों को एक-दूसरे को अधिक बेहतर तरीके से समझने का अवसर मिला। दोनों के बीच कम्युनिकेशन बेहतर हुआ। उनके संबंध लंबे समय तक बने रहे।

(6) आजकल संचार संसाधन उपलब्ध होने पर समय से पहले यात्रा का आरक्षण करा लेना चाहिए –जैसे रेल बस ,प्लेन रुकने की जगह जैसे होटल्स, रिसॉर्ट्स आदि .

जिस जगह जा रहे हैं वहां की जलवायु ,वहां की भाषा ,संस्कृति ,खान पान के साथ कौन कौन से दर्शनीय स्थल हैं . जिससे मानसिक तैयारी होने से आप भरपूर यात्रा का आनंद उठा सकते हैं . जितना कम आवश्यक सामान सुखद यात्रा होती हैं

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