वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमानसागर जी महाराज और सलूम्बर में विविध प्रभावनामयी आयोजन : एक दृष्टि

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10 जनवरी 024 को सलूंबर जिला उदयपुर राजस्थान के जैन बोर्डिंग में विराजित परम पूज्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज की परंपरा के पट्टाचार्य परम पूज्य वात्सल्य वारिधि, राष्ट्रगौरव आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ससंघ का  दर्शनलाभ व मार्गदर्शन प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। अवसर था चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी के आचार्य  पदारोहण शताब्दी वर्ष 2024 2025 के अंतर्गत प्रभावना जनकल्याण परिषद के वार्षिक पुरस्कार अलंकरण समारोह का।
इस मौके पर अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के शताधिक वर्ष प्राचीन साप्ताहिक जैन गजट के नवीन अंक को आचार्यश्री के कर कमलों में भेंटकर आशीर्वाद प्राप्त किया साथ में साथी सह संपादक श्री राजेन्द्र महावीर सनावद साथ रहे। आचार्यश्री ने जैन गजट के द्वारा निरंतर की जा रही प्रभावना की भूरि-भूरि प्रसंशा की तथा आवश्यक सुझाव व मार्गदर्शन प्रदान किया। साथ ही पूज्य आचार्य श्री वर्द्धमानसागर जी महाराज व संघस्थ पूज्य मुनि श्री हितेंद्रसागर जी महाराज का परम पूज्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य प्रतिष्ठापना के शताब्दी महोत्सव 2024-25 के संदर्भ में चर्चा का अवसर प्राप्त हुआ। इस मौके पर सलूम्बर में आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज पर केंद्रित चित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया जिसमें संघस्थ आर्यिका महायशमती माता जी पूरी चित्र प्रदर्शनी के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया और आगामी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया। चित्र प्रदर्शनी में आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के अनेक दुर्लभ चित्रों को प्रदर्शित किया गया है जो बहुत ही श्रमसाध्य कार्य था जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पूरी चर्चा में सह संपादक श्री राजेन्द्र जी महावीर साथ रहे।
आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का आचार्य पद प्रतिष्ठापना शताब्दी वर्ष मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं। अभी रविवार को ही पूज्य आचार्यश्री के सान्निध्य में उदयपुर- बांसवाड़ा संभाग के जैन समाज के लोगों की इस सम्बंध में सलूम्बर में एक वृहद बैठक का आयोजन किया गया था। महासभा के प्रमुख  पत्र जैन गजट में भी निरंतर पूज्य आचार्य श्री शान्ति सागर जी महाराज पर विशेष सामग्री प्रकाशित की जा रही है।
10 जनवरी को आयोजित पुरस्कार अलंकरण समारोह में विद्यान्वेषी आचार्य श्री वर्धमानसागर पुरस्कार प्रख्यात मनीषी पंडित श्री जवाहर लाल जैन भींडर उदयपुर को प्रदान किया गया। हालांकि वे अस्वस्थता के कारण समारोह में उपस्थित नहीं हो सके। कार्यक्रम के अगले दिन आयोजन समिति ने उदयपुर स्थित उनके निवास पर जाकर उन्हें यह पुरस्कार समर्पित किया। इस पुरस्कार के पुण्यार्जक श्री महावीर प्रसाद, श्री कैलाशचंद ,श्री विनोद पाटनी उरसेवा मदनगंज किशनगढ़ रहे।
पंडित इन्द्रमणी जैन-संगीतकार रविंद्र जैन स्मृति  पुरस्कार  देश के जाने-माने मूर्धन्य मनीषी परम आदरणीय डा शीतलचंद जैन प्राचार्य  जयपुर को प्रदान किया गया। पुरस्कार पुण्यार्जक डा  मणीन्द्र जैन जी दिल्ली रहे। धर्म शिरोमणी आचार्य श्री धर्मसागर पुरस्कार   सी ए पारस लाल जी जैन उदयपुर को प्रदान किया गया। पुरस्कार  पुण्यार्जक श्री पदमचंद महेंद्र जी धगड़ा सीकर वाले चेन्नई रहे।
बाबू बालचंद  मलैया स्मृति पुरस्कार  जैन युवा रत्न श्री हंसमुख गांधी इंदौर को प्रदान किया गया। इस पुरस्कार के पुण्यार्जक श्री महेश कुमार जी कपिल कुमार जी मलैया सागर रहे।
धर्म सभा में  आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज ने अपने देशना में बताया कि विद्वत्ता का सम्मान और ज्ञानियों का सम्मान करने से ज्ञान का क्षयोपशम होता है ।
 आचार्यश्री ने स्याद्वाद महाविद्यालय के अवदान को रेखांकित करते हुए बताया कि पंडित गणेशप्रसाद जी वर्णी ने जैन विद्वानों को तैयार करने के लिए स्याद्वाद महाविद्यालय  को वाराणसी में प्रारंभ किया था। आज पुरस्कृत डॉ शीतलचंद्र  जी  सहित अनेक विद्वानों ने वहां शिक्षा प्राप्त की। आज के परिपेक्ष्य में नए विद्वान करने की आवश्यकता है।  जिनवाणी को विद्वान और मुनिराज समाज के सामने प्रस्तुत करते हैं ।
 आचार्य श्री ने आचार्य शांति सागर जी आचार्य पदारोहण शताब्दी  महोत्सव वर्ष में विद्वानों के सम्मेलन की आवश्यकता प्रतिपादित की। इसके पूर्व  मुनि श्री हितेंद्रसागर जी महाराज ने आचार्य शांति सागर जी महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व प्रकाश डाला और बताया कि आचार्य शांतिसागर जी का अवदान अविस्मरणीय और अनुपम  है।
जब भी पूज्य आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी के पावन चरणों की सन्निधि में पहुँचते हैं पूज्य आचार्यश्री का अतीव ही वात्सल्य प्राप्त होता है। पूज्य आचार्यश्री जिस तत्परता, सहजता और सरलता से छोटे बड़े सबकी की बात को सुनते हैं वह स्तुत्य और श्लाघनीय है। उनका पूरा संघ अपनी कठोर चर्या और साधना के लिए जाना जाता है।
धर्मप्राण नगरी सलूम्बर में पूज्य आचार्यश्री के सान्निध्य में धर्म की गंगा निरंतर प्रवाहित हो रही है। अभी 21 जनवरी से आचार्यश्री के ससंघ सान्निध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन भी होने जा रहा है।

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