शादी शुदा स्त्री और बिना शादी शुदा स्त्री में अंतर करना मुश्किल

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उठता लहंगा,बढ़ती इज्जत (??)—- विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन,भोपाल
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आजकल पहनावे पर बहुत अधिक तीक्ष्ण प्रतिक्रियायें आती रहती हैं .बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता हैं .वैसे कुदरत ने आँखें सुंदरता देखने के लिए दी हैं .जितनी अधिक सुंदरता उतना अधिक प्रदर्शन .सामान्यतया सामान्य को कोई अधिक ध्यान नहीं देता पर जो कोई विशेष होता हैं तो उन्हें विशेष निगाह से देखा जाता हैं .वैसे आजकल शादी शुदा ,बिनाशादी शुदा या विधवा स्त्रियों में अंतर करना बहुत मुश्किल हो गया हैं .पहले शादी शुदा महिला अलग से पहचान में आ जाती थी और बिना शादीशुदा अलग पर आजकल सब गडमड हो गया .
सन १९८० तक लड़कियाँ कालेज में साड़ी पहनती थी या फिर सलवार सूट। इसके बाद साड़ी पूरी तरह गायब हुई और सलवार सूट के साथ जीन्स आ गया। २००५ के बाद सलवार सूट लगभग गायब हो गया और इसकी जगह स्किन तंग काले सफेद स्लैक्स आ गए। फिर २०१० तंक लगभग पारदर्शी स्लैक्स आ गए जिसमे आंतरिक वस्त्र पूरी तरह स्प्ष्ट दिखते हैं।
फिर सूट, जोकि पहले घुटने या जांघो के पास से २ भाग मे कटा होता था, वो २०१२ के बाद कमर से २ भागों में बंट गया और फिर
२०१५ के बाद यह सूट लगभग ऊपर नाभि के पास से २ भागो मे बंट गया जिससे कि लड़की या महिला के नितंब पूरी तरह स्प्ष्ट दिखाई पड़ते हैं और २ पहिया गाड़ी चलाती या पीछे बैठी महिला अत्यंत विचित्र सी दिखाई देती है, मोटी जाँघे, दिखता पेट।
आश्चर्य की बात यह है कि यह पहनावा कालेज से लेकर ४० वर्ष या ऊपर उम्र की महिलाओ में अब भी दिख रहा है। बड़ी उम्र की महिलायें छोटी लड़कियों को अच्छा सिखाने की बजाए उनसे बराबरी की होड़ लगाने लगी है। नकलची महिलाए।
अब कुछ नया हो रहा २०१८ मे, स्लैक्स ही कुछ प्रिंटेड या रंग बिरंगा सा हो गया और सूट अब कमर तक आकर समाप्त हो गया यानि उभरे हुए नितंब अब आपके दर्शन हेतु प्रस्तुत है.
साथ ही कालेजी लड़कियों या बड़ी महिलाओ मे एक नया ट्रेंडऔर आ गया, स्लैक्स अब पिंडलियों तंक पहुच गया, कट गया है नीचे से, इस्लाममिक पायजामे की तरह औरसबसे बड़ी बात यह है कि यह सब वेशभूषा केवल हिन्दू लड़कियों/महिला ओ में ही दिखाई पड़ रही है.
( हिन्दू पुरुषों की वेशभूषा में पिछले ४० वर्ष मे कोई उल्लेखनीय परिवर्तन नही हुआ) जबकि इसके उलट मुस्लिम लड़कियाँ तो अब मॉल जाती है, बड़े होटलों में, सामाजिक पार्टियों में जाती है, तो पूरा ढका हुआ बुर्का या सिर में चारो तरफ लिपटे कपड़े के साथ दिखाई पड़ती है।
हिन्दू लड़कियाँ /महिलायें जितना अधिक शरीर दिखाना चाह रही, मुस्लिम महिलायें उतना ही अधिक पहनावे के प्रति कठोर होते जा रही।
कपिल के कॉमेडी शो में मंच पर आई एक प्रबुद्ध मेहमानों में हिन्दू मुस्लिम महिलाओं की वेश-भूषा में यह स्पष्ट अंतर देखा जा सकता था।
पहले पुरुष साधारण या कम कपड़े पहनते थे, नारी सौम्यता पूर्वक अधिक कपड़े पहनती थी, पर अब टीवी सीरियलों, फिल्मों की चपेट में आकर हिन्दू नारी के आधे कपड़े स्वयं को मॉडर्न बनने में उतर चुके हैं।
यूरोप द्वारा प्रचारित नंगेपन के षडयंत्र की सबसे आसान शिकार, भारत की मॉडर्न हिन्दू महिलाए है, जो फैशन के नाम पर खुद को नंगा करने के प्रति वेहद गंभीर है, पर उन्हें यह ज्ञात नहीं कि वो जिसकी नकल कर इस रास्ते पर चल पड़ी है, उनको इस नंगापन के लिए विज्ञापनों में करोड़ो डॉलर मिलते है।
पहनावे में यह बदलाव न पारसी महिलाओं में आया न मुस्लिम महिलाओं में आया, यह बदलाव सिर्फ और सिर्फ हिंदू महिलाओं में ही क्यों आया है …? जरा इस पर विचार कीजियेगा।
अब जो हिंदू जैन महिलाएं पुरुषों को मंदिर प्रवेश करते समय समुचित परिधान न होने पर अपमान का सामना करना हो सकता हैं .कारण अब हर मंदिरों में ड्रेस कोड लागू होता जा रहा हैं .इससे बचने नियमों का पालन जरुरी हैं .
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन, संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट होशंगाबाद रोड ,भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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