रथयात्रा के साथ दस दिवसीय महाकुंभ का हुआ समापन

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  • भगवान महावीर की उत्सव प्रतिमा को किया मंदिर में विराजमान –
  • मस्तकाभिषेक महोत्सव का आठवां एवं अंतिम दिन…..
  • तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय परिवार ने की भगवान महावीर की भू गर्भ से प्रकटित मूलनायक प्रतिमा की शांतिधारा के जयकारों के बीच
  • महामस्तकाभिषेक -क्षेत्र कमेटी ने किया पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव कमेटी का सम्मान

जयपुर/ श्री महावीरजी – गत 24 नवम्बर से दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी में चल रहे दस दिवसीय महाकुंभ का रविवार को रथयात्रा के साथ समापन हो गया।इस दौरान 24 नवम्बर से 28 नवम्बर तक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव तथा 27 नवम्बर से 4 दिसम्बर तक भगवान महावीर महामस्तकाभिषेक महोत्सव सम्पन्न हुआ।
चांदनपुर वाले बाबा के नाम से पूरे विश्व में प्रसिद्ध भूगर्भ से प्रकटित 1100 वर्ष प्राचीन भगवान महावीर की मूंगावर्णी अतिशयकारी प्रतिमा के महामस्तकाभिषेक महोत्सव में आठवें एवं अंतिम दिन रविवार को तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय मुरादाबाद परिवार ने कुलपति सुरेश जैन लुहाड़िया के नेतृत्व में अंतिम कलश एवं शांतिधारा की। महामस्तकाभिषेक महोत्सव के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चार के साथ महामस्तकाभिषेक किये।

इस मौके पर मंदिर परिसर जयकारों से गुंजायमान हो उठा। ।इन आठ दिनों के दौरान पुण्यार्जक श्रद्धालुओं एवं इन्द्र-इन्द्राणियों द्वारा 2651 कलशों से भगवान का महामस्तकाभिषेक किया गया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल एवं महामंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी ने बताया कि रविवार को टीले से निकली अतिशयकारी 1 हजार वर्ष प्राचीन भगवान महावीर की मूंगावर्णी मूलनायक प्रतिमा के विनोद कुमार जैन ने वर्धमान कलश के माध्यम से प्रथम महामस्तकाभिषेक किये। नवरत्न कलश के माध्यम से समाजश्रेष्ठी एस पी जैन एवं परिवारजनों द्वारा द्वितीय कलश, रत्न कलश के माध्यम से अर्जुन जैन ने तृतीय कलश का पुण्यार्जन किया।

इस मौके पर भारत सरकार में संयुक्त सचिव वैभव बजाड़, आईं ए एस राहुल जैन, करौली एस पी नारायण टोगस, कोटा एडीशनल एसपी पवन जैन समाजसेवी प्रवीण चन्द्र छाबड़ा,श्री वीर सेवक मण्डल जयपुर के अध्यक्ष महेश काला, समाज श्रेष्ठी अजय काला, महोत्सव समिति के प्रचार संयोजक विनोद जैन कोटखावदा सहित कई गणमान्य श्रेष्ठीजनों ने सहभागिता निभाई। चरण छतरी के नजदीक नव प्रतिष्ठित 24फुट 1इंच की उतंग खड्गासन बिजोलिया पत्थर से निर्मित भगवान महावीर की प्रतिमा के सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा जयकारों के बीच मंत्रोच्चार के साथ महामस्तकाभिषेक किये गये।

महामस्तकाभिषेक महोत्सव के दौरान अध्यक्ष सुधान्शु कासलीवाल , कार्याध्यक्ष विवेक काला, उपाध्यक्ष एस के जैन,सी पी जैन,महामंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी , कोषाध्यक्ष उमरावमल संघी,मुख्य संयोजक सुभाष चन्द जैन, संयोजक सुरेश सबलावत, राकेश सेठी,प्रबंध समिति एन के सेठी,सुभद्र कुमार पाटनी, पूनमचंद शाह, डॉ कमल चन्द सौगानी, नगेन्द्र कुमार जैन हेमन्त सोगानी, अशोक जैन,कमल कुमार बड़जात्या, जस्टिस नरेन्द्र कुमार जैन, देवेन्द्र कुमार जैन, सतीश अजमेरा, सुधीर कासलीवाल, डॉ पदम कुमार जैन, प्रदीपकुमार जैन,अनिल पाटनी (दीवान),रुपेन्द्र काला, पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति अध्यक्ष राज कुमार कोठ्यारी, संयोजक योगेश टोडरका , सदस्य प्रदीप ठोलिया एवं जनमंगल कलश समिति समन्वयक देवेन्द्र अजमेरा, प्रशासनिक समन्वयक भारत भूषण जैन, मनीष बैद, प्रचार संयोजक विनोद जैन कोटखावदा,अजीत पाटनी, सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रेष्ठीजनों ने सहभागिता निभाई। आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में रविवार को प्रातः 8.15 बजे से हुए महामस्तकाभिषेक भगवान महावीर स्वामी की भूगर्भ से प्रकटित मूंगावर्णी मूलनायक प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक करने हेतु श्रद्धालु नाचते गाते शुद्ध पीत वस्त्र धारण कर बैण्ड बाजों के साथ विशाल जुलूस के रूप में मुख्य मंदिर पहुंचे।

इस मौके पर पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। कार्याध्यक्ष विवेक काला एवं मुख्य संयोजक सुभाष चन्द जैन के मुताबिक लगभग 501 कलशों से पुण्यार्जक परिवारों के सैकड़ों श्रद्धालुओं द्वारा ज्योति कलश,स्वर्ण कलश,रजत कलश,ताम्र कलश,शुभ मंगल कलश,जन मंगल कलश के माध्यम से आठवें दिन जयकारों के बीच मंत्रोच्चार से महामस्तकाभिषेक किये गये।

महोत्सव समिति के प्रचार संयोजक विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक आचार्य वर्धमान सागर महाराज के मुखारविंद से शांतिधारा का उच्चारण किया गया। पुण्यार्जक तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय परिवार द्वारा मंत्रोच्चार के साथ विश्व में सुख शांति और समृद्धि की कामना करते हुए भगवान के सिर पर शांतिधारा की गई। इस मौके पर आचार्य विमल सागर महाराज, आचार्य वैराग्य नन्दी महाराज,गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी, सृष्टि भूषण माताजी ससंघ सहित कई संतों का सानिध्य प्राप्त हुआ। भगवान महावीर की आरती के बाद समापन हुआ। महोत्सव समिति के प्रचार संयोजक विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि रविवार ,04 दिसम्बर को प्रातः 8.15 बजे से सायं तो5.15 बजे तक भगवान का महामस्तकाभिषेक हुआ।

इससे पूर्व पाण्डाल में दोपहर 3.00 बजे से आयोजित सम्मान समारोह में प्रतिष्ठाचार्य पं.हसमुंख जैन धरियावद वालों का तथा पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष राज कुमार कोठ्यारी, संयोजक योगेश टोडरका एवं सदस्य प्रदीप ठोलिया सहित पूरी समिति का तथा सहयोगियों का तिलक, माल्यार्पण, प्रशस्तिपत्र एवं भगवान महावीर का चित्र भेंट कर क्षेत्र कमेटी की ओर से अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल एवं महामंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी के नेतृत्व में सम्मान किया गया। इस मौके पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज एवं आचार्य विमल सागर महाराज ने आशीर्वचन देते हुए इस विशाल आयोजन के सफलतापूर्वक संपन्न होने हेतु सभी पदाधिकारियों, कार्यक्रताओं तथा अन्य सभी सहयोगियों को आशीर्वाद दिया। अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल ने स्वागत उदबोधन दिया। क्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी ने महोत्सव की पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए सभी का आभार व्यक्त किया।

श्री जैन ने बताया कि आचार्य वर्धमान सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में दोपहर बाद पाण्डाल से विशाल रथयात्रा निकाली गई जिसमें उत्सव प्रतिमा को विराजमान कर जुलूस के रूप में बैण्ड बाजों के साथ मंदिर तक लाया गया।रथ पर सारथी के रूप में समाजश्रेष्ठी रामभज जैन पानीपत, क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल बैठे। प्रतिमा लेकर योगेश टोडरका एवं प्रदीप ठोलिया बैठे।राज कुमार कोठ्यारी, विनोद जैन कोटखावदा, अशोक पाटनी रथ पर खड़े होकर चंवर ढो रहे थे।
रथयात्रा बाजार में होते हुए मुख्य मंदिर पहुंची जहां उत्सव प्रतिमा के अभिषेक, शांतिधारा के बाद श्री जी को जयकारों के बीच वेदी में विराजमान किया गया।

अध्यक्ष सुधान्शु कासलीवाल एवं महामंत्री महेन्द्र कुमार पाटनी ने बताया कि रविवार को रात्रि में 8.00 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम की श्रृंखला में भगवान महावीर के वृत्त चित्र का प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण शामिल हुए। सोमवार, 05 दिसम्बर से मंदिर दर्शन का समय पूर्व की भांति रहेगा। दर्शनार्थियों को प्रातः 5.00 बजे से रात्रि 9.30 बजे तक दर्शन हो सकेंगें।

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