पार्श्वनाथ भगवान का मोक्षकल्याणक महोत्सव का आयोजन

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कर्मठ बन कर नहीं पार्श्व बन कर जीना: आचार्य श्री प्रमुख सागर
गुवाहाटी : जैन धर्म के २३वे तीर्थकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष में भगवान महावीर धर्म स्थल मे आज विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर चातुर्मासार्थ ससंघ विराजित आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि जो भी श्रद्धालु सच्चे भाव से एक बार श्री सम्मेदशिखर तीर्थ स्थान के दर्शन कर लेता है, फिर उसको नरक और पशु गति प्राप्त नहीं होती है। पार्श्व के परस में जो जाता है वह निहाल हो जाता है।कर्मठ के मठ में जो जाता है वह कंगाल हो जाता है। आचार्य श्री ने कहा की पार्श्वनाथ और कर्मठ यह दोनों तत्व आज सबमें देखने को मिलते हैं। पार्श्व समता और सहनशक्ति के साथ जीवन जीते हैं। कर्मठ वो जीव है जो उपसर्ग करता है। आप लोग पार्श्वनाथ निर्माण महोत्सव पर एक ही संकल्प करना कि हमें कर्मठ नहीं पार्श्वनाथ बनकर जीना है । उपसर्ग नहीं उपासना करेंगे , आलोचना नहीं अर्चना करेंगे , बुरा नहीं भला करेंगे तभी हमें परमात्मा का लाभ होगा।
उन्होंने कहा जो काम महात्मा गांधी ने 19वीं और 20वीं शताब्दी में अहिंसा को लोक जीवन से जोड़कर किया, वही काम हजारों वर्ष पूर्व भगवान पार्श्वनाथ ने अहिंसा की व्याप्ति को व्यक्ति तक विस्तृत कर सामाजिक जीवन में प्रवेश देकर दिया। धर्म सभा के पूर्व आज प्रातः श्रीजी को पालकी में विराजमान कर एक शोभायात्रा निकाली गई। जो विभिन्न मार्गो से होते हुए वापस आयोजन स्थल में पहुंची। शोभायात्रा में शास्त्र लेकर चल रही महिलाओ ने आयोजन स्थल में गुरुदेव को शास्त्र भेंट कर पुण्याचन किया।इस महोत्सव को ऐतिहासिक मनाने के लिए धर्म स्थल मे शाश्वत तीर्थराज श्री सम्मेदशिखर की पार्श्वनाथ टोंक के साथ भव्य अनुपम रचना श्री दिगंबर जैन यूथ फेडरेशन के सदस्यों द्वारा की गई । इस पार्श्वनाथ टोंक की प्रतिकृति के समक्ष जैन‌ धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के श्री चरणों में संतोष कुमार आलोक कुमार छाबड़ा द्वारा 23 किलो का एक मुख्य लाडू तथा 1 किलो के 23 विशेष लाडू श्रीजी के चरणों में अर्पित किये गए ।
प्रचार प्रसार विभाग के संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं सह संयोजक जय कुमार छाबड़ा ने बताया कि आज प्रातः आचार्य श्री के मुखारविंद से श्रीजी को शांतिधारा करने का परम सौभाग्य झूमरमल- पन्नालाल गंगवाल परिवार एवं ओमप्रकाश- प्रभा देवी सेठी परिवार को प्राप्त हुआ। इस अवसर पर बाल ब्रह्मचारीनी वीना दीदी एवं स्थानीय पंडित संतोष कुमार शास्त्री के सानिध्य में पार्श्वनाथ महामंडल विधान का आयोजन किया गया। जिसमें समाज के बच्चे, पुरुष, एवं महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भाग लिया। मोक्ष सप्तमी के उपलक्ष में समाज के बच्चों ने व्रत (उपवास) कर पुनर्जन किया। समाज के मंत्री वीरेंद्र कुमार सरावगी एवं विजय कुमार गंगवाल ने बताया कि इस मौके पर सम्मेद शिखर की कृति का उद्घाटन झूमरमल पन्नालाल गंगवाल परिवार द्वारा किया गया।कार्यक्रम के दौरान आचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज के आठ दीक्षार्थियों का समाज के द्वारा छोल भराई एवं अभिनंदन किया गया। इस मौके पर सायं 6:00 बजे 23 दीपक से श्रीजी की एवं आचार्य श्री की आरती रामचंद्र सेठी के संयोजन में की गई तत्पश्चा श्री दिगम्बर जैन महिला समिति द्वारा एवं प्रीति सेठी के संयोजन में “वैरागी हो गये पार्श्वनाथ” नामक नृत्य नाटिका का आयोजन किया गया । कार्यक्रम को सफलतापूर्वक आयोजन करने में श्री दिगंबर जैन यूथ फेडरेशन के सभी सदस्यों का सराहनीय सहयोग रहा यह जानकारी समाज के प्रचार-प्रसार विभाग के सह संयोजक सुनील कुमार सेठी द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति मे दी गई है।।

सुनील कुमार सेठी
गुवाहाटी

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