अंगदान महादान, एक व्यक्ति के अंगदान से 18 लोगों को दिया जा सकता है जीवन दान

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यमुनानगर, 14 अगस्त (डा. आर. के. जैन):
भारत में अंगदान को लेकर लोग अभी पूरी तरह से जागरुक नहीं है, इसकी बड़ी वजह यह है कि अंगदान को लेकर कई प्रकार भ्रांतीया फैली हुई है। कुछ लोगों को लगता है कि यदि वह अंगदान करते है तो वह अगले जन्म में उन अंगों के बिना पैदा होगें। समाज सेवी डा. आर. के. जैन का कहना है कि अंतिम संस्कार के बाद शरीर के सभी अंग नष्ट हो जाते है, लेकिन जब मनुष्य का दुबारा जन्म होता है तो शरीर के सभी अंग अपने आप ही अपनी पुरानी स्थिति में पुन: ही आ जाते है, इस लिये बिन किसी भय, झिझक और संकोच के अंगदान किया जा सकता है। अंगदान से किसी जरुरतमंद को जीवनदान मिल सकता है। इससे ज्यादा पुण्या का काम कुछ और हो ही नहीं सकता है। उन्होंने बताया कि भारत में ऑर्गन डोनर्स की कमी के कारण 90 प्रतिशत लोगों को मृत्यु हो जाती है। अंगदान करने में आपकी पहल, आपका संकल्प और आपकी प्रतिज्ञा कई लोगों की जिन्दगी बचा सकती है। जीवन में अंगदान से बढ़ कर कोई दान नहीं है, हालांकि रक्तदान, नेत्रदान या देहदान का भी महत्व कम नहीं है, परंतु अंगदान किसी बीमार व्यक्ति को जीवन दान देने का सबसे अच्छा तरीका है। आजकल देखा गया है कि लोगों का रुझान अंगदान करने में अधिक बनता जा रहा है। अंगदान लोगों के जीवन में ऊजाला फैला देता है। मनुष्य स्वयं अंगदान करके और अपने परिजनों-मित्रों को प्रेरित कर के समाज में बहुत बड़ा बदलाव ला सकते है, क्योंकि हम अपने व परिजनों के अंगदान की सहमति से बहुत से लोगों की जान बचा सकते है। समाज सेवकों का कहना है कि इस पुण्य काम को बहुत सारे लोग करना तो चाहते है लेकिन अपने परिवार की उलझन से या कनूनों की अज्ञानता से वह इस क्षेत्र में कुछ भी नहीं कर पाते है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने मानव अंग को निष्काम कर संग्रहण के लिये एक राष्ट्रीय नेटवर्क स्थापित किया हुआ है। इसका एक केन्द्र सफदरजंग होस्पिटल नई दिल्ली में स्थापित है। इसके अतिरिक्त अन्य राज्यों में भी रोट्टो, सोट्टो व नोट्टो से अस्पताल जुड़े है। कानून के तहत अंग प्रत्यारोपण व अंगदान की अनुमति दी जाती है। यह अधिनियम 1994 के तहत कवर किया गया है। इसमें जीवित व ब्रेन डैड दाताओं द्वारा अंगदान की अनुमति दी गई है। अंगदान का कार्ड साथ रखने पर घटना होने पर परिवार के लिये मददगार होगा और किसी कारण मृत्यु पर तुरंत अंगदान करने की प्रक्रिया में सहायक होगा। अंगदान की प्रतिज्ञा मात्र करने से मृत्योपरांत अंगदान नहीं किया जा सकता है, इसके लिये परिजनों की स्कृति आवश्यक है। अत: यह आवश्यक कि दानदात अपनी प्रतिज्ञा के बारे में अपने परिजनों को सूचित करे। यहां यह कहना भी आवश्यक है कि अंगदान के लिये परिवार के सदस्यों की अनुमति आवश्यक है। उन्होंने आगे बताया कि अंगदान दाता अपना प्रतिज्ञा पत्र ऑन-लाईन जमा करा सकता है और वह चाहे तो कार्यालय में जाकर व्यक्तिगत रूप से भी जमा करा सकता है। अंगदान महादान है और यह जीवन देने का उपहार है। उन्होंने बताया कि अकू रिव्यू के माध्यम से शहर में प्रथम बार परिवार के 6 सदस्यों ने अंगदान का प्रतिज्ञा फार्म एक साथ भरा, क्योंकि अंगदान के माध्यम से मर्णोपरांत उनका दिल किसी जरुरतमंद के सीने में धड़केगा और उनकी आंखे जहान की खुबसूरती का नजारा देखती रहेगी। उन्होंने बताया कि एक देह दान करने से 18 लोगों को जीवन दान मिल सकता है। वर्ष 2014 में लगभग 1149 लोगों ने अंग दान किये जो वर्ष 2020 में बढ़ कर लगभग 2070 हो गये। इस प्रकार किडनी, लीवर की ढाई गुना और हृदय दान की साड़े छ: गुना बढ़त है। लोगों का रुझान इस ओर बढ़ता जा रहा है। व्यक्ति मृत और जीवित दोनो ही अवस्थाओं में कुछ खास अंगो का दान कर सकता है। उन्होंने बताया कि जानकारी के अनुसार भारत में हर वर्ष 5000 किडनियों की प्रांस्पलांट हो जाती है। लोगों में अंग के प्रति जागरुक्ता बढ़े और डोनर न होने की वजह से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सके। उन्होंने आगे बताया कि एक ब्रेन डैड व्यक्ति भी अंग दान करके 8 लोगों की जान बचा सकता है।
फोटो नं. 1 एच.
जानकारी देते समाज सेवी डा. आर. के. जैन……………(डा. आर. के. जैन)

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