पंचकल्याणक महोत्सव का भुमि-पुजन के साथ हुआ शखनाद

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गुवाहाटी : पंचकल्याणक हमारे जीवन की पंचम गति अर्थात मोक्ष की व्यवस्था है। नर से नारायण, पशु से परमेश्वर, कंकर से शंकर, शंकर से तीर्थंकर की यात्रा का नाम है पंचकल्याण। जिस भूमि पर साक्षात तीर्थंकर भगवान का पंचकल्याणक होता है वह भूमि तीर्थ हो जाती है। तीर्थंकर भगवान की शाश्वत जन्मभूमि इस काल की अयोध्या है और मोक्ष भूमि सम्मेद शिखर है। उन्होंने कहा कि आगामी 26 से 31 जनवरी तक गुवाहाटी में श्री 1008 आदिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक महोत्सव का आज भूमि पूजन के साथ शंखनाद हुआ। इस भूमि का पुण्य तीव्र उदय है जो यहां पंचकल्याण के की महापूजन होने जा रही है। यह उक्त बातें आचार्य श्री प्रमुख सागर महाराज ने भगवान महावीर धर्म स्थल में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि भगवान राम 22 जनवरी को अपने महल- मंदिर में विराजमान होने जा रहे हैं। वैसे ही सूर्य पहाड़ के भगवान आदिनाथ भी अपनी वैदियो – सिंहासनो पर विराजमान होने जा रहे हैं। यह जानकारी समाज के प्रचार-प्रसार के मुख्य संयोजक ओम प्रकाश सेठी एवं संयोजक सुनील कुमार सेठी द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है।।

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