मित्रता दिवस — जानें कैसे जिंदगी बचाती है-विद्यावास्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

0
181

मित्र एक ऐसा संगी साथी होता हैं जिससे अपनी अंतरंगता की बात की जासकती हैं .मित्र बनाने के लिए पहले सही मित्र की परख होना चाहिए ,मित्रता की योग्यता भी होना चाहिए .मित्र घनिष्ठ भी होते हैं तो कुछ विघातक होते हैं तो कुछ कपटी भी होते हैं .पहले इनकी परख होना चाहिए .बचपन की दोस्ती पारिवारिक होती हैं तो छत्र जीवन की दोस्ती लम्बी होती हैं और नौकरी या व्यवसाय की दोस्ती अधिकांश स्तरीय होती हैं ,
अंतरराष्ट्रीय मित्रता दिवस या फ्रैंडशिप डे हर वर्ष अगस्‍त के पहले रविवार को मनाया जाता है। सर्वप्रथम मित्रता दिवस 1958 को आयोजित किया गया था।
विश्व मित्रता दिवस दोस्ती मनाने के लिए एक दिन है। यह दिन कई दक्षिण अमेरिकी देशों में काफी लोकप्रिय उत्सव हो गया था जबसे पहली बार १९५८  में पराग्वे में इसे ‘अंतर्राष्ट्रीय मैत्री दिवस’ के रूप में पहली बार मनाया गया था। शुरुआत में ग्रीटिंग कार्ड उद्योग द्वारा इसे काफी प्रमोट किया गया, बाद में सोशल नेटवर्किंग साइट्स के द्वारा और इंटरनेट के प्रसार के साथ साथ इसका प्रचलन, विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश और मलेशिया में फैल गया। इंटरनेट और सेल फोन जैसे डिजिटल संचार के साधनों ने इस परंपरा को को लोकप्रिय बनाने में बेहद मदद की |
विश्व मित्रता दिवस  का विचार पहली बार २०  जुलाई १९५८  को डॉ रामन आर्टिमियो ब्रैको द्वारा प्रस्तावित किया गया था | दोस्तों की इस बैठक में से, वर्ल्ड मैत्री क्रूसेड का जन्म हुआ था। द वर्ल्ड मैत्री क्रूसेड एक ऐसी नींव है जो जाति, रंग या धर्म के बावजूद सभी मनुष्यों के बीच दोस्ती और फैलोशिप को बढ़ावा देती है।तब से, ३०  जुलाई को हर साल पराग्वे में मैत्री दिवस के रूप में ईमानदारी से मनाया जाता है और इसे कई अन्य देशों द्वारा भी अपनाया गया है।आजकल वाट्सएप फेसबुक जैसे सोशलमिडिया के वजह से ये और प्रसिद्ध हो रहा है॥
अगस्त के पहले संडे को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है। इस साल यह मौका ४ अगस्त को आने वाला है। दोस्ती अकेला ऐसा रिश्ता होता है जो स्वार्थ से परे होता है। एक-दूसरे पर जान छिड़ने वाले और दोस्त के लिए कुछ भी कर गुजरने वालों के लिए यह दिन बेहद खास होता है। दोस्तों से जिंदगी से खुशहाल होती है, यह कहावत तो हम सभी ने सुनी होगी। मगर हम यह नहीं जानते थे कि दोस्ती हमें कुछ गंभीर रोगों से भी बचाती है और यह बात वैज्ञानिक तौर पर साबित भी हो चुका है।
इसलिए लंबी जिंदगी पाने के लिए दोस्त बनाइए। वो भी एक या दो नहीं बल्कि दोस्तों का एक बड़ा ग्रुप होना चाहिए। जिनका सोशल सर्किल बड़ा और अच्छा होता है, उनकी उम्र अकेले रहने वाले लोगों की तुलना में ज्यादा होती है। एक्सरसाइज की तुलना में उम्र दो गुना लंबी हो जाती है।
सेहत और दोस्ती का गजब कनेक्शन
हैरान होने वाली बात नहीं है। बीते साल हुए एक शोध में यह बात साबित हुई है कि बड़ा या अच्छा फ्रेंड सर्किल अच्छी सेहत की भी गारंटी देता है। इस रिसर्च में कहा गया था कि फ्रेंड सर्किल अच्छा या बड़ा होने से उम्र के साथ याद्दाश्त की कमी यानी डिमेंशिया की आशंका कम होती है। व्यक्ति सेहतमंद रहता है। हॉर्मोन संतुलित रहने के साथ-साथ ब्लड प्रेशर भी सामान्य रहता है। इससे दिल और दिमाग दोनों स्वस्थ रहते हैं।
दोस्ती में न गिनें नंबर
बहुत सारे दोस्त बनाएं ताकि मन की बात किसी से भी शेयर कर सकें। जिनसे विचार मिलते हैं, उनसे जरूरत पड़ने पर मदद लें। हिचकिचाएं नहीं। मदद मांगने और मदद करने से रिश्ते मजबूत होते हैं दुख-सुख में साथ रहें, हेल्प करें।
एंग्जाइटी और डिप्रेशन होगा कम
दोस्तों के साथ रहने से सेंस ऑफ सिक्योरिटी बनी रहती है। दोस्तों से बार-बार मिलने पर मन की बातें शेयर करते हैं। दोस्तों के साथ बहस करने से राहत महसूस होती है। इससे मेंटल ग्रोथ होती और भावनात्मक जुड़ाव आता है। बार-बार मिलने से एंग्जाइटी और डिप्रेशन कम होता है। स्ट्रेस से संबंधित डायबिटीज, थायरॉइड और दिल की बीमारी होने की संभावना कम होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इससे आयु लंबी होती है।
संमैत्री  की प्राप्तिसम ,कौन कठिन हैं काम !
उस समान इस विश्व में ,को कवच बलधाम !!
जगत में ऐसी कौन सी वस्तु हैं जिसका प्राप्त करना इतना कठिन हैं जितना की मित्रता का ?और शत्रुओं से रक्षा करने के लिए मित्रता के समान अन्य कौन सा कवच  हैं ?
मैत्री होती श्रेष्ठ की,बढ़ते चंद्र समान !
ओछे की होती वही ,घटते चंद्र समान !!
योग्य पुरुष की मित्रता बढ़ती हुई चन्द्रकला के समान हैं ,पर मूर्ख की मित्रता घटते हुए चन्द्रमा के सदृश्य हैं .
जन्म हो वर वंश में ,और जिसे अघभीति  !
देकर के कुछ मूल्य भी ,करलो उससे प्रीति !!
जिस पुरुष  का जन्म उच्च कुल में हुआ हो और जो अपयश से डरता हैं उसके साथ ,आवश्यकता पड़े  तो मूल्य  देकर  भी मित्रता करनी चाहिए .
एक ह्रदय सन्मित्र का , सच्चे तजें   न साथ !
नाश हेतु होवैं  भले ,चाहे उसका साथ !!
सच्चा मित्र अपने अभिन्न मित्र को नहीं छोड़ सकता ,भले ही वह उसके विनाश का कारण क्यों न हो .
स्वार्थी और खुशामदी ,इनकी प्रीती असाधु !
शत्रुघृणा  उससे कहीं ,है असह्य भी साधु !!
चाटुकार और स्वार्थी लोगों की मित्रता से शत्रुओं की घृणा सौगुनी अच्छी हैं .
मित्रभाव तो शत्रु का अहो “निहाई “जान !
पीटेगा वह काल पा ,तुमको धातु समान !!
जो मित्रता ,शत्रु दिखाता है वह केवल निहाई हैं जिसके आश्रय से मौका मिलने पर वह तुम्हे लोहे के समान पीट देगा .
मैत्री सेव या त्वकचित्तता .
एक चित्त हो जाना ही मित्रता हैं
मित्रों के अप्रिय वचन भी औषधि के समान ग्राह्य हैं .
छिद्रान्वेषी शत्रु अपकार किये बिना नहीं रहते .
इसीलिए मित्र कम बने पर ज्ञानवान ,हितकारी और मार्गदर्शक हो .
विद्यावाचस्पति  डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन ,संरक्षक शाकाहार परिषद् A2/104 पेसिफिक ब्लू नियर डी मार्ट ,होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026  मोबाइल 09425006753

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here