महासागर में नदी की भाँति मिलीं आर्यका आर्षमति माताजी, हुआ वात्सल्य मिलन, धरती पर पुण्य का पॉवर हाउस हैं, पिछिधारी दिगम्बर जैन संत

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आगरा मैं विराजमान भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज जिनागम संप्रदाय के प्रवर्तक, “विमर्श लिपि और नई भाषा “विमर्श एबिसा” के रचयिता, भावलिंगी संत श्रमणाचार्य श्री 108 विमर्शसागर जी महामुनिराज उत्तर प्रदेश के आगरा में छिपिटिला श्री चंद्रप्रभु  जैन मंदिर विराग भवन में विराजित हैं, नेपधारी के पवित्र दर्शन गणिनी आर्यिका श्री अर्शयति माताजी (संघ) आचार्य भगमन की। आर्यिका श्री ने गुरुवार को शक्तिवार की तीन परिक्रमा की और अपने सिर पर दो चरण कमल रखे, श्रद्धा के शब्दों को पुरुष के चरणों में समर्पित करते हुए कहा: मेरे परम श्रेष्ठ परम पुष्प आये जिस उत्थान में आज मुझे भगवान के समान मगहर आचार्य गुरुवर के दर्शन प्राप्त हुए हैं। विराग भवन में उपस्थित विशाल धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए पूज्य आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने अपने उद्‌बोधन में कहा- मेरे प्रिय साथियों। अपने परिणामों को संभालना सीखो, आपका सिद्ध भगवान् यम् अंतरंग वैभव स्वयमेव प्रगट हो जाएगा। बन्धुओ ! कोई व्यक्ति पूजा, अभिषेक नहीं करता, जाप-ध्यान- स्वाध्याय भी नहीं करता, बतलाओ वह व्यक्ति पुण्य जीव है या पाप जीव ? आप कहोगे, वह वाक्ति निश्चित तौर पर पाप जीव है। ध्यान रखना, वह पाष जीव है तो “तुम कभी ऐसे मत बनना “मंदिर आते हो भगवान को देखने के लिए, लेकिन सच-सच बताना तुम मंदिर में आकर देखते किसको हो ? मंदिर आए थे भगवान की वीतरागता देखने के लिए, लेकिन आप कषायवान जीवों को ही देखकर अपनी कथायें बढ़ाते रहते हो । ध्यान रखना, यदि आपकी प्रवृति ऐसी है तो मंदिर में आकर आप धर्म-क्रिया करते हुए भी आप पाप जीव हैं। आप कभी सच्चे धर्मात्मा नहीं कहला सकते। आपका धर्मानुष्ठान आपको धर्मात्मा नहीं बना सकता प्रिय धर्मप्रेमियो । आपको यदि पुण्य जीव, धर्मात्माओं की श्रेणी में आना है तो कभी अंतरंग में क्रोध – मान-मायान्चारी- लोभासक्ति पैदा हो तो तत्काल अपने विकारों को बहीं दवा देना, आप उसी समय पुण्य जीव, धर्मात्मा बन जाओगे । जैन धर्म उदारवादी धर्म है। आपके पास यदि एक कलश भरा जल है तो उसमें से एक-एक बूंद सभी को बांट देना, सारी दुनियां मापकी हो जाएगी। जैन धर्म कषायों को बढ़ाने की नहीं, कयायों को जीतने की कला सिखाता है। बन्धुओं । छीपीटोला तो अभी पुष्य का जंक्शन बना हुआ है। आर्थिय आर्षमति माताजी को भी आशीर्वाद देता हूँ, माताजी बी ही सहज-मरल व्यक्तित्व की धनी है। इस धरती पर यदि कोई पुख्य का पॉवर हाउस हैं तो वे पीढीचाली दिगम्बर जैन साधु ही हैं जिनमें आप भी कर्जा प्राप्त करते हैं।

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