महामहिम राष्ट्रपति ओर प्रधानमंत्री जी के पास पुरातत्व संरक्षण आधारित खजुराहो अतिशय जैन मंदिर स्वत्व एवं आधिपत्य प्रबंधन कार्य जैन दर्शन पद्धति पुजा यथावत होती रहे भेजा पत्र

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19/9/2023प्रेस विज्ञप्ति मे भूमिपुत्र पवनघुवारा ने बताया कि प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 में संशोधन को मंजूरी
एफ नं. 15-270 / एनएमए / एचबीएल-2023 सार्वजनिक नोटिस खजुराहो के संबंध में आपत्ति पत्र महामहिम राष्ट्रपति ओर प्रधानमंत्री जी के पास पुरातत्व संरक्षण आधारित खजुराहो अतिशय जैन मंदिर स्वत्व एवं आधिपत्य प्रबंधन कार्य जैन दर्शन पद्धति पुजा यथावत होती रहे  भूमिपुत्र पवनघुवारा द्धारा जनयाचिका पत्र भेजा
संदर्भ में विस्तार से पवनघुवारा ने बताया कि जैन समाज के द्वारा उच्च शिक्षा राष्ट्रीय स्तर के साथ अंतराष्ट्रीय पर्यटकों को भी दी जाती है।एवं पर्यटकों के द्वारा श्रीआदिनाथ, श्री पारसनाथ, श्री शांतिनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिरों में स्थापित भगवान (प्रतिमा जी ) के दर्शन कर दर्शनार्थी स्वयं का सौभाग्य मानते है जतः उक्त मंदिर सांसारिक वैभव से मुक्ति के साधन है इसलिए इन मंदिरों के धार्मिक स्वरूप को बनाएं रखने का निवेदन/ अपेक्षा करते हैं,जैन समाज के द्वारा प्रतिदिन नियमित रूप से सुबह श्री जी का अभिषेक, शांतिधारा, पूजन, विधान, स्वाध्याय स्तुति आदि एवं सन्ध्याकालीन आरती पुरूष एवं महिला वर्ग व बच्चों के द्वारा की जाती है  जबकि उक्त भूमि का उपयोग धार्मिक एवं सार्वजनिक उपयोग में किया जाता है खजुराहो अतिशय क्षेत्र जैन धर्माविलवियों का विशेष क्षेत्र है। आध्यात्म की शिक्षा ग्रहण कर भौतिकबाद से मुक्ति की और अग्रसर होने का स्थान है ।खजुराहो – विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल हैं। खजुराहो की स्थापना करने वाले चंदेल राजा चंद्रवर्मन थे चंदेल राजवंश ने लगभग नौवीं से बारहवीं शताब्दी तक राज किया। यहां का मंदिर लगभग सन 850 से 1150 में बनाया गया था।1830 में ब्रिटिश सर्वेक्षणकर्ता टी एस बर्ट ने मंदिरों की पुनः प्राप्ति की खोज की। कुछ समय बाद एलेगजेंडर कन्निंघम ने पेंटिंग की विस्तृत जानकारी दी। 1852 में मैसी ने चित्रांकन की पहली पंक्ति जारी की।खजुराहो जैन मंदिर समूह मे जहां भगवान पार्श्वनाथ मंदिर मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध जैन धार्मिक स्थलों में से एक है जिससे यहाँ की मूर्तियों का अध्ययन करना बहुत आसान हो जाता है साथ ही भगवान शांति नाथ का मंदिर का निर्माण काल 1028 ई.यह मंदिर पुराने मंदिरों के टुकड़ों, स्तंभों और छवियों का एक संयोजन है भगवानआदिनाथ की ऊंची (4.5 मीटर) प्रतिमा है मन्दिर के बाहरी हिस्से को एक अधिष्ठान में विभाजित किया गया है, जिसके ऊपर मूर्तियों की दो पंक्तियाँ और दिव्य संगीतकारों और माला धारकों की एक संकीर्ण टोली है।आलंकारिक कला की पहली धारणा यह है कि यह इतना सुंदर और परिष्कृत है, जो पार्श्वनाथ मंदिर के अपने भारी, कठोर समकक्षों से बहुत अलग है।उसी प्रांगण में जैन तीर्थकर भगवान पदमप्रभु, ,भगवान शीतलनाथ  भगवान मल्लिनाथ इस प्रकार स्वतंत्र रूप से कुल 15 मंदिर स्थित है। एवं जैन संग्रहालय जैन धर्म की माला के संरक्षण एवं प्रदर्शन के लिए समर्पित है। इसका प्रदर्शन 1987 में हुआ था।यहां ऐसी सौ से भी ज्यादा मूर्तियां हैं। इस संग्रहालय में एक विशाल आधुनिक गैलरी है। 24 तीर्थंकर, यक्षी और जैन संस्कृति और परंपरा से संबंधित कई कलाकृतियां से संबंधित बहुत सारी अन्य महत्वपूर्ण कहानियां यह गैलरी भरी हुई हैं।यह जैन मंदिर परिसर में स्थित है। के संग्रहालय बिल्डिंग को स्थानीय लोग साहू शांतिप्रसाद जैन कला संग्रहालय भी कहते हैं गोरतलब है कि समाज सेवी भूमिपुत्र पवनघुवारा द्धारा राष्ट्रपति भवन हेल्पलाइन खजराहो जैन पुरातत्व दर्शन पुजा संरक्षण हेतु  PRSEC/E/2023/0039793 Grievance Registration Number प्रधानमंत्री लोक शिकायत निदेशालय पंजीकरण संख्याः डीसीएलटीआर/ ई/2023/0000581पर अपत्ति दर्ज की गई है साथ ही मा.श्री जे पी नड्डा जी राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय जनता पाटी,मा.श्री मल्लिकार्जुन खडगे जी अध्यक्ष अखिल भारतीय काग्रेंस कमेटी, एवं सचिव महोदय, राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण, नई दिल्ली सहित राष्ट्रीय स्तर मेल के माध्यम से अनुरोध किया है कि अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटक स्थल खजराहो के पुरातत्व संरक्षण यथावत रहे।

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