कर्मो के नाश से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है…अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर

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विश्व की 800 करोड़ आबादी एक मात्र कोई पवित्र आत्मा है वह प्रसन्न सागर गुरुदेव है
महापारणा भव्य रूप से सम्पन्न
औरंगाबाद/ऊदगाव नरेंद्र/पियूष/रोमील जैन कूंजवन तीर्थ पर चातुर्मास कर रहे तपाचार्य अन्तर्मना श्री प्रसन्नसागर जी महाराज के ससंघ सानिध्य में लघु सिंहनिष्क्रीडित व्रत करने वाले व्रतियों को महापारणा अत्यंत भब्यता के साथ अपार जनसमूह के बीच सम्पन्न हुआ।
ये लघु सिंहनिष्क्रीडित व्रत की साधना 80 दिन की थी जिसमें 60 पूर्ण उपवास पानी भी नहीं व 20 दिन दिन में केवल एक बार आहार नियम पूर्वक किया जाता है व अनेक पूजन व क्रियायें सम्पन्न की जाती हैं।
उपाध्याय श्री पीयूष सागर,मुनि श्री अप्रमत्त सागर,मुनि श्री परिमल सागर क्षुल्लिका वचनप्रभा माताजी के साथ ही भिंड के श्रावक श्री मनीष जी व मैनपुरी की श्राविका श्री मति साधना जैन ने ये व्रत सफलतापूर्वक पूर्ण किये।गृहस्थ में रहते हुए ये व्रत करने वाली साधना जी विश्व में वर्तमान में अकेली महिला हैं।सर्वप्रथम कुंजवन में एक विशेष पूजा का  आयोजन हुआ फिर मुनिसंघ व जिनप्रतिमा के सहित एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई जो गांव के मदिर जाकर पुनः वापिस कुंजवन पहुँची जहां जिनाभिषेक के बाद सभी व्रतियों ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन किये व फिर संघस्थ व्रतियों केपाद प्रक्षालन किये गये।पिच्छि व शास्त्र भेंट के बाद गुरुपूजन हुई।
इस अवसर पर भारी भीड़ को संबोधित करते हुये अन्तर्मना ने कहा कि मोक्ष कर्म नाश से ही होता है व कर्म काटने के लिए  तप व्रत ही एकमात्र साधन है। इन व्रतियों ने महान तपस्या कर अपने अनंत अनंत कर्मों की निर्जरा की है। । इसी तारतम्य में संघस्थ वर्णी गुरु ने कहा किविश्व की 800 करोड़ आबादी एक मात्र कोई पवित्र आत्मा है वह प्रसन्न सागर गुरुदेव है जो उनके दर्शन भी कर ले व   निकट भव्य जीव है। आयोजन में  व्रतियों के पड़गाहन के बाद आहार चर्या हुई जिसमें लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी सभी ने विधिवत आहार दिया व भारी जय जय कार किया।मंच संचालन बा.ब्र.तरून भैय्या  ने कीया
इस अवसर पर 22 दिसम्बर से आयोजित हो रहे कुंजवन महोत्सव का 1000रुपये के कूपन का विमोचन किया गया।मनीष जी ने व्रत साधना से प्रभावित होकर रात्रि में चारों प्रकार के आहार व रंगीन कपड़े पहिनने का त्याग किया व मुनिदीक्षा का श्रीफल अर्पित किया।क्षुल्लक सहज सागर, पण्डित दीप चंद्र व साधना जी ने भी दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित किये ततपश्चात समस्त संघ की आहार चर्या हुई।पधारे सभी अतिथियों की भोजन व्यवस्था भी रही।अभूतपूर्व कार्यक्रम कुँजवन में सम्पन्न हुआ जिसमे देश भर के लोग पधारे।संघपति दिलीप जी बड़ोदा ,उपसंघपति श्रवण जी नागपुर,नितेश, सुनील, शैलेंद्र जैन इचलकरंजी ,आकाश जी सोनकच्छ, डॉ संजय इंदौर विवेक गंगवाल कोलकाता डॉ सौरभ जैन मैनपुरी, हल्दी परिवार नांदेड़ प्रमोद मामा जी,सतेंद्र भाई,रमेश जी विलासपुर,प्रबीन जी माधवपुर,सन्मति मंडल उदगाव, ब्रह्म पुरातन ट्रस्ट कुंजवन आदि का विशेष सहयोग रहा।नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद रोमील जैन

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