जैन दर्शन में व्यक्ति नहीं गुणों की पूजा – मुनि अक्षय सागर

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मुनि श्री अक्षय सागर जी महाराज का आगमन, जैन समाज ने की अगवानी

सनावद – जैन दर्शन में ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग रत्नत्रय है। रत्नत्रय के बिना मोक्ष की प्राप्ति असंभव है। जैन धर्म में वीतराग भगवान की पूजा उनके गुणों की प्राप्ति के लिए की जाती है। जैन दर्शन में व्यक्ति की नहीं गुणों की पूजा को महत्व दिया गया है। यदि आराधना करनी है तो ज्ञान के साथ गुणों की आराधना करो।उपरोक्त विचार सोमवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के प्रवचन हॉल में श्रीमती रेखा जैन के मंगलाचरण से प्रारंभ हुई धर्मसभा में पूज्य मुनि श्री अक्षय सागर जी महाराज ने व्यक किये।

उपरोक्त जानकारी देते हुए मुकेश जैन,  धीरेंद्र बाकलीवाल एवं प्रियम जैन ने बताया कि पूज्य मुनि श्री अक्षय सागर जी महाराज ने अपने धारावाहिक प्रवचन में मिथ्यात्व को पाप बंध का कारण बताते हुए कहा कि जो व्यक्ति उठो, जागो और उनके पास ( परमात्मा) जाओ की नीति का पालन करता है वह परमात्मा के अनंत गुणों की आराधना करता है। अज्ञान, मिथ्यात्व, और सत्य का ज्ञान न होने के कारण मनुष्य बुद्धि,शक्ति, समय और धन का सदुपयोग नहीं कर पाता। भगवान की भक्ति अभिषेक, पूजा, पाठ से दूर होने के कारण परिवार का ह्रास होता है। जो मंदिर जाता है वह निर्वाण प्राप्त करता है। सनावद का सौभाग्य है कि यहां भक्ति भावना है। भक्तों को सूर्योदय के साथ भगवान की भक्ति अभिषेक पूजा करनी चाहिए। संघ में मुनि श्री नेमि सागर जी, श्री शैल सागर जी, मुनि श्री अचल सागर जी, एवं ऐलक उपशम सागर जी हैं।सभा में डॉ नरेंद्र जैन भारती, संतोष बाकलीवाल, नरेंद्र जिरभार, सुनील जैन, सुधीर चौधरी , इंदरचंद जैन ने दीप प्रज्वलन किया।

समाजजनों जनों ने की अगवानी- प्रवचन से पूर्व समाज जनों ने रेलवे फाटक पहुंचकर गाजे-बाजे एवं मुनि जी की जयकारों के बीच मुनि संघ को नगर में प्रवेश कराया। जगह-जगह संघ का पाद प्रक्षालन किया । मुनिराजों ने सुधीर चौधरी,किरण लस्करे, सावित्री जटाले के घर पर आहार चर्या पूरी की। इस मौके पर नरेंद्र पंचोलिया,कमलेश जैन, राजा जैन बडूद,सीमंधर जैन, सुनील पंचोलिया सन्मति काका,  मंजुला भुज, मीना जैन, प्रिया जैन, वीनस  जैन सहित अनेक समाज जन मौजूद रहे। संचालन प्रशांत जैन ने किया।

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