गणतंत्र : वसंतोत्सव और कुंदकुंदाचार्य जन्मोत्सव

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परम पूज्य चर्या चक्रवर्ती आचार्य श्री सुनीलसागरजी महाराज सत्संग का श्री आदिनाथ दिगंबर जैन संघीजी मंदिर से देश के 74 वे गणतंत्र दिवस एवं भारतीय संस्कृति मानीत वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर श्री दिगंबर जैन आचार्य संस्कृत महाविद्यालय में एक भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ। पूज्य आचार्य श्री सत्संग के मंगल पदार्पण से यह महाविद्यालय  का प्रांगण धन्य हुआ; पवित्र हुआ ।और इस कार्यक्रम का सयोग शुभ अवसरों का समागम मिला ।जहां देश का 74 गणतंत्र दिवस तो बसंत पंचमी का पवित्र उत्सव और पर्वधिराज पर्युषण का शुभारंभ और सबसे महत्वपूर्ण हमारे दिगंबर श्रमण परंपरा के मुकुट मणि अध्यात्म की आधारशिला ऐसे महान पूर्व आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी का जन्मोत्सव का शुभ संयोग कार्यक्रम का अवसर गौरवमई बना रहा था।
सबसे पहले समस्त अचार्यश्री सत्संग के साथ अनेकों युवा छात्रों ने झांज पथक ऊर्जा पूर्ण जयकारों के साथ हर्षोल्लास पूर्वक महाविद्यालय में आचार्य श्री सत्संग का स्वागत किया ।महाविद्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी गण विद्वतगण द्वारा मुख्य द्वार पर पूज्य आचार्य श्री का पाद प्रक्षालन व सौभाग्यवती महिलाओं द्वारा मंगल आरती उतारी गई ।जगह-जगह रंगोली बनाकर गुरु भक्ति का प्रदर्शन हुआ ।तत्पश्चात पूज्य आचार्य श्री ससंघ ने नवनिर्मित आधुनिकता के साथ अध्यात्म परोसनेवाला “स्वरूप ऑडिटोरियम” का अवलोकन किया। पूरे भारतवर्ष में किसी जैन शिक्षण संस्थान में इस तरह का हाईटेक ऑडिटोरियम शायद ही अभी तक देखने मिलेगा। और फिर सभी महाविद्यालय की लाइब्रेरी वाचनालय को देखते हुए सीधा आयोजित कार्यक्रम स्थली खुले मैदान के परिसर में जाकर मंचासीन हो गए ।
कार्यक्रम की शुरुआत श्री सुधासागर बालिका छात्रावास की बालिकाओं द्वारा प्राकृत भाषा में पंच परमेष्ठी की स्तुति करते हुए मंगलाचरण किया गया । साथ ही एक बालिका द्वारा संस्कृत भाषा में संपूर्ण वक्तव्य दिया गया । जिसे सुनकर मन प्रसन्न हुआ ;गौरवान्वित हुआ ।कि आज भी प्राचीन संस्कृति जीवित है ।श्री दिगंबर जैन आचार्य महाविद्यालय संस्थान है जहां विद्यार्थियों को संस्कृत ,प्राकृत भाषा के साथ लौकिक शिक्षा प्रदान की जाती है ।तत्पश्चात इस अवसर पर गणतंत्र दिवस मनाते हुए देश की शान देश का मान तिरंगा लहराते हुए मुख्य अतिथि स्वरूप श्री सुभाष चंद्र जी बगड़ा ,महाविद्यालय के वर्तमान कमेटी अध्यक्ष श्री एन .के .सेठी जी , पूर्व प्राचार्य विद्वान श्री शीतलचंद्र जी जैन ; वर्तमान प्राचार्य श्री अनिल के जैन द्वारा ध्वजारोहण किया गया । बालिकाओं द्वारा राष्ट्रगान करते हुए तिरंगा लहराया गया । इसी के साथ सुधासागर बालिका छात्रावास की बालिकाओं द्वारा गुरु की भूमिका ,गुरु की महिमा हमारे जीवन में इस संदर्भ में अत्यंत सुंदर सारगर्भित प्रतिभाशाली प्रस्तुति दी गई ।जिसमें नाटिका द्वारा दिखाया गया की डाट के बिना शिष्य और शीशी का भविष्य क्या है ?
जैसे बिना ढक्कन के पानी बिखर जाता है ,वैसे ही बिना गुरु के अनुशासन ,संयम हमारे जीवन से गुण बिखर जाएंगे | गुरु अपने अनुशासन से हमारे गुणों का विकास करते हैं ।हमें पतन से उठाकर उत्थान की ओर ले जाते हैं | साथ ही हारे को भी जीता देते हैं । हताश होते हुए को अपने वात्सल्य से प्रोत्साहित कर देते हैं । हमें आगे बढ़ाते हैं , तीसरे भाग में दिखाया कि केवल हारे को ही नहीं जीताते तो जीत कर भी हार गया है , टूट चुका है  उसको भी संभल देते हुए उन्नत कर देते हैं । गुरु केवल शिष्य को ही नहीं उसके माता-पिता को भी सही मार्गदर्शन देते हैं | कि माता-पिता बच्चों को केवल सुनाएं नहीं उनकी भी सुने माता-पिता की भावना के साथ बच्चों की भी भावनाओं का ध्यान रखें इस रूप से एक शिक्षक एक गुरु जीवन निर्माण की नींव है , आधार है । भारत को भी विश्वगुरू कहा जाता है , क्योंकि यहां आज भी गुरु विराजमान है । विचरण करते हुए कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं ।
और श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान के छात्रों द्वारा जिमनास्टिक स्टंट् ( Gymnastic stunts) करते अद्भुत ऊर्जा पूर्ण जोश हॉर्स के साथ सुंदर झांकियों की प्रस्तुति दी गई ।इस तरह अध्यात्म, शिक्षा, शक्ति व प्रगति का समन्वय होता हुआ नजर आया। तत्पश्चात कुछ बालक बालिकाओं को अपनी उपलब्धियों होने पर पुरस्कृत किया गया । और फिर पूज्य आचार्य श्री का बहु भाषा में उद्बोधन हुआ ।पूजा आचार्य श्री ने प्रवचन देते हुए संस्कृत भाषा में शुभारंभ किया कि;” अद्य मम अत्यंत प्रसन्नोस्मी !श्री दिगंबर जैन महाविद्यालय संपूर्ण संघ आगदम! इस तरह आगे संस्कृत के साथ प्राकृत हिंदी मराठी अंग्रेजी आदि एक ही प्रवचन में तत्कालीन और भषा में अपना आशीर्वाद उपस्थित मान्यवर छात्र-छात्राओं को दिया गया। आगे आचार्य श्री कहते हैं तिरंगा हमारे सामने लहरा रहा है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत के नाम से रखा गया ।जिसे आगे श्री राम के भाई  भरत ने सुशोभित करते हुए आगे बढ़ाया  ऐसा यह भारत देश अपने आप में महान हैं। ऐसे गौरवमई देश भारत जो सदैव शोभायमान है ।यह भारत अपनी संस्कृति व संस्कारों से शोभायमान और सबसे महत्वपूर्ण यह संत महंतों की जन्म तिथि प्रमाण है। आज बसंत पंचमी है।
और ऐसा विशाल संतों का समूह महाविद्यालय में आया है। इन्हीं संतो से ही हमारी संस्कृति जीवित है, कहते हैं; वसंत आता है तो प्रकृति। खिल उठती है, और संत आता है तो संस्कृति महक उठती है ।और ध्यान रखना कि जहां संत आते हैं वही बसंत आता है और जहां संतों का आगमन नहीं होता वहां बस अंत आता है ।संस्कृति व संस्कार प्रतीत होते हो जाते हैं ।ऐसे संतो के आचरण से कृषि प्रधान देश भारत को हमेशा भारत ही कहा जाना चाहिए ।भारत के नाम से ही जाने जाना चाहिए ।सब तरफ अशांति अज्ञानता का कोलाहल हो रहा है ।वहां यह देश अहिंसा सदाचार शाकाहार सुख शांति व समृद्धि का संदेश पूरे विश्व में दे रहा है ।इस देश को स्वतंत्रता दिलाने में कई क्रांतिकारी पुरुषों ने अपना योगदान दिया ।वह जैन समाज भी पीछे नहीं है ,और जैनों के योगदान में जयपुर के ही श्री अर्जुन लाल सेठी सिरोंमोर रहे। गांधी जी, सुभाष चंद्र बोस ,बाल गंगाधर तिलक ,भगत सिंह आदि पुरोधा सलाह लेते थे ।इनकी मान्यता रखते थे ।तो ऐसे हमारे गौरव श्री अर्जुन लाल सेठी केवल क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे क्रांतिकारियों के गुरु थे ।
जैसे आज अध्यात्म शिक्षा शक्ति प्रगति का समन्वय नजर आया कि बालिकाओं द्वारा सारगर्भित सुंदर नाटिका गुरु महिमा भूमिका पर प्रस्तुत हुई। ऐसी यह प्रस्तुति पूरे देश भर में दिखाना जाना चाहिए ।और साथ में फिर रेड आर्मी आदिनाथ (red _Army _Adinath) के जोश भरे युवा छात्रों द्वारा तो कमाल ही कर दिया अपनी शक्ति भक्ति प्रदर्शन करते हुए पूरी सभा को हिला दिया ।ऐसे जोशीले  कर्मठ युवा अगर उस समय श्री अर्जुन लाल सेठी को मिलते तो देश 1925 में ही आजाद हो जाता। जैसा यह महाविद्यालय ऐसी ही परिकल्पना उन्होंने भी श्री वर्धमान शिक्षण संस्था के नाम से खोलकर छोटा-मोटा पुरुषार्थ किया था । पर लोग उसे झेल नहीं पाए ।लेकिन आज भी कुछ युवा कार्यकर्ता केसरिया ज्योत के माध्यम से वह कार्य की मशाल आगे जला रहे। बढ़ा रहे ।क्योंकि एक क्षत्रिय क्षत्रिय के खून की कीमत खून को समझ सकता है। ऐसे विद्यालय महाविद्यालय आदर्श है; ऐसे 1400 वर्ष प्राचीन संस्था को तो विश्वविद्यालय का स्तर दीलाना चाहिए।
यहां अभी भले ही 400-500 विद्यार्थी दिखाई दे, रहे हैं लेकिन यह एक एक विद्यार्थी हजारों हजारों नागरिकों की जीवन को सुसंस्कृत संस्कारित सुशिक्षित करके उनका जीवन उज्जवल करने के आधार बनेंगे। यह भवन व भवन के विद्यार्थी हमारे भविष्य का चमकता सितारा है ।आज गणतंत्र दिवस है ।हमारा गणतंत्र भी आदर्श है। भगवान महावीर के नाना राजा चैटक ही इस आदर्श गणतंत्र के प्रारंभ करने वाले रहे ।बुद्ध, महावीर गण तंत्र सिद्धांत संविधान हमारी धरोहर है। संस्कृत प्राकृत भाषा में शिक्षा की रुचि रखने वाले आज के समय में यह छात्र ,छात्राएं आदर्श यही प्रेरणा है। कि केवल अंग्रेजी से ही उन्नति हो यह जरूरी नहीं। प्रगति नहीं है। आज विश्व में भी दूसरे नंबर पर कोई भाषा बोली जाती है तो वह है हिंदी ही है ।जो अत्यधिक उपयोग की  जाती है। हिंदी हमारी संस्कृति की भाषा है ।
किसी के पास एक ही है तो वह उसे ही अपनाएगा। हमारी संस्कृति में अनेक भाषा का प्रयोग होता आया है ।अनेक प्रांत प्रदेश और अनेक भाषाएं संस्कृत ,प्राकृत ,हिंदी के साथ अंग्रेजी जोड़दे किसी भाषा के प्रति अपमान नहीं है। प्राकृत संस्कृत मां है ।और देश की भाषा हिंदी बहन बेटी है ।तो अंग्रेजी को पत्नी का सम्मान दें ।इस तरह किसी भी एक चीज में बंधना नहीं ,सीमित नहीं रहना चाहिए ।एक बहुआयामी व्यक्तित्व होना चाहिए ।संस्कृत के साथ संस्कृति भी सुरक्षित रहना चाहिए ।संस्कृत ,संस्कृति व संस्कार ऐसे विद्यालय के बल पर ही जीवित रहेंगे विद्यार्थी को पुरस्कृत करते हैं। तो कहीं ना कहीं विद्यालय भी पुरस्कृत होता है। सभी का मंगल हो ऐसी भावना के साथ सभी के लिए मंगल उन्नति का आशीर्वाद ।
    तत्पश्चात विद्वत श्री शीतल चंद्र जी जैन द्वारा कृत प्राकृत भाषा के अवदान में आचार्य का योगदान यह प्राकृत ग्रंथ का विमोचन हुआ।
तत्पश्चात आचार्य श्री ससंघ दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान में आयोजित गणतंत्र दिवस महोत्सव में पहुंचे ।जहां कार्यकारिणी सदस्य के निवेदन पर आचार्य श्री ने उद्बोधन देते हुए कहा कि; यह बात जरूर कहेंगे कि विद्या सुधा ने ज्ञान का बीज बोया है, समाज में फैले अज्ञान के कलंक को धोया है। जो शिक्षा के पौधे हमारे सामने लहरा रहे ।अपना विकास कर रहे हैं ।ज्ञान की उर्जा फैला रहे ।आचार्य श्री विद्यासागर जी के आशीर्वाद का ही फल है यह देश का भविष्य बनते हैं, और बनाते हैं ।यहां केवल ज्ञान व अध्यात्म की बात ही नहीं ,बल्कि चरित्र आचरण की बात सिखाई जाती है। अध्यात्म की बात कर लेना आसान है, लेकिन अध्यात्म को जीना अलग और अध्यात्म को जीने वाले ऐसे साधकों के प्रति आदर भी  होना उनका समागम पाने का उत्साह रखना यह भी प्रशंसनीय है ।कोई यहां से शिक्षा लेकर अधिकारी बन के निकलेंगे निकल रहे हैं ।जिसमें आज यहां एस श्री नवीन जी, हमारे जमाने के हैं ।और कोई अध्यात्म जगत के साधक  बनके निकले हैं। वह भी हमारे सामने  आचार्य श्री शशांक सागर जी मुनि श्री सुश्रुतसागर जी के रूप में बैठे हैं।  तो ऐसे ही अपना कल्याण करते रहें सभी को आशीर्वाद।
और दोपहर 2:00 बजे आचार्य श्री  ससंघ सांगानेर से बिहार करते हुए ,मानसरोवर के वरुण पथ पर स्थित श्री महावीर दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ। जहां आज आचार्य श्री कुंदकुंद स्वामी जन्मोत्सव के अवसर पर विशाल शोभायात्रा अपार जन समुदाय से  निकाली गई। आगे तीन दिवसीय कार्यक्रम जिसमें तपस्वी सम्राट आचार्य श्री सन्मति सागर जी का 50 वा जन्म जयंती महोत्सव व परम पूज्य आचार्य श्री का 17 वां चार्यपदा रोहन दिवस मनाते हुए नवीन काज नाले का शिलान्यास संपन्न होगा।
-आरिका सुस्वरमति माताजी

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