दक्षिण कोरिया में आयुर्वेद को बढ़ावा दे रही डॉ. आस्था जैन सनावद

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सनावद ।  जैन जगत के वरिष्ठ पत्रकार, ओजस्वी वक्ता, श्री राजेन्द्र जैन जी महावीर सनावद की सुपुत्री डॉ. आस्था जैन आयुर्वेद योग एवं भारतीय चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने दक्षिण कोरिया में अपनी सेवाएँ दे रही हैं। धर्म आयुर्वेद भोपाल  व वेलपार्क हास्पीटल दक्षिण कोरिया के नालेज एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत उनको दक्षिण कोरिया बुलाया गया। अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य प्रशांत तिवारी के मार्गदर्शन में डॉ. आस्था को यह उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।
पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल से प्राचार्य प्रो उमेश शुक्ला के कुशल नेतृत्व में बीएएमएस आयुर्वेदाचार्य की उपाधि प्राप्त करने के पश्चात डॉ. आस्था जैन ने बोन एवं ज्वाइंट पर अप‌नी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। अध्ययन के दौरान उन्होंने अपने शोध आलेख लिखे व पीपीटी प्रेजेन्टेशन के माध्यम से अपनी प्रतिभा को सिद्ध किया। विश्व आयुर्वेद कांग्रेस 2022 में डॉ. आस्था का शोध अन्तरर्राष्ट्रीय स्तर पर जर्नल में प्रकाशित हुआ था। भारत सरकार में केंद्रीय आयुष मंत्री सर्वानंद सोनोवाल पर्यटन मंत्री श्री पद नाईक ,म.प्र. शासन में तत्कालीन केबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सकलेचा आदि से भी उसे सराहना प्राप्त हुई थी।
आयुर्वेद एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है- डॉ. आस्था जैन
डॉ. आस्था जैन ने बताया कि आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना उनका लक्ष्य है। अपने गुरू वैद्य प्रशांत तिवारी धर्म आयुर्वेद भोपाल के मार्गदर्शन व पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय भोपाल में उन्होंने भगवान धनवन्तरी की भावना, महर्षि चरक की चिकित्सा पद्धति, महर्षि सुश्रुत की शल्य चिकित्सा, महर्षि वागभट्ट का आयुर्वेद आधुनिक स्वरूप उन्होंने समझा है, आयुर्वेद एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति है, जिसके माध्यम से गंभीर से गंभीर रोगों से मुक्ति मिल सकती है। दक्षिण कोरिया का वेलसिटी हास्पीटल केंसर रोगियों के लिए प्रसिद्ध है, यहाँ वे डॉ. किम मीयंग के साथ आयुर्वेद के प्रयोग केंसर रोगियों पर कर रही है, जिस पर वे अपना शोध लेख भी तैयार करेगी। आयुर्वेद के पंचकर्म आहार, विहार, निहार, चिकित्सा से कैंसर मरीजों को ठीक करने का उपक्रम कर रही है।
भारत सरकार व प्रधानमंत्री की सोच आयुर्वेद को बढ़ावा देती है
डॉ. आस्था ने कहा कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म विद्या व योग विद्या के साथ जीवन जीने की कला सिखाती है, आयुर्वेद एक चिकित्सा पद्धति जिसे भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पहल किये जाने से आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति बेहतर व वैश्विक स्तर पर स्थापित हो रही है। एलोपेथी में एम्स व आयुर्वेद में ‘अय्या’ – अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान दिल्ली व गोआ में बहुत ही कुशलता से देश-विदेश  के नागरिकों को आकर्षित कर रहे है।
ठण्डा व विकसित राष्ट्र है दक्षिण कोरिया:
माइनस 8 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान के बीच आयुर्वेद को प्रोत्साहित करने नववर्ष 2024के प्रथम सप्ताह में कोरिया पहुंची डॉ. आस्था ने बताया कि यह एक प्राकृतिक देश है जहाँ प्रकृति को नजदीकी से महसूस किया जा सकता है। भारतीय मुद्रा सौ रुपये के पन्द्रह सौ वान मिल जाते है, वान दक्षिण कोरिया की मुद्रा है। वहाँ रहने के लिए घर आदि की व्यवस्था वेलपार्क हॉस्पीटल द्वारा की गई है।
कम समय में उपलब्धि पूर्ण कार्य किये डॉ. आस्था ने
– वैद्य प्रशांत तिवारी:
धर्म आयुर्वेद भोपाल के प्रमुख व एक दशक से आयुर्वेद चिकित्सा को प्रतिष्ठापित कर रहे अन्तरर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सक वैद्य प्रशांत तिवारी ने बताया कि अध्ययन के दौरान ही डॉ. आस्था ने अपने कार्य के प्रति समर्पण व लगन दिखाई, उसका धैर्य, मरीज के प्रति जिम्मेदारी पूर्ण व्यवहार उसे एक अच्छा आयुर्वेद चिकित्सक वैद्य बनाता है। कोरिया जाकर वो और अधिक निखर कर भारतीय आयुर्वेद को वैश्विक परिदृश्य पर स्थापित करने में अपना योगदान देगी। पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय भोपाल के प्राचार्य प्रो उमेश शुक्ला ने डॉक्टर आस्था को बधाई देते हुए कहा कि उन्हें गर्व है कि उनके महाविद्यालय की छात्रा  डॉ आस्था ने भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठापित कर रही हैं।
अपना भोजन स्वयं बनायेगी डॉ आस्था जैन :
शुद्ध शाकाहारी भोजन के लिए समर्पित डॉ. आस्था ने अपने साक्षात्कार में यही शर्त रखी कि वे वहाँ होने वाले  मांसाहारी भोजन नहीं करेगी, न ही वहाँ का बना भोजन ले पायेगी। इस पर डॉ. किम मीयंग ने उन्हें सेप्रेट किचन उपलब्ध कराने को मंजूरी दी। डॉ. आस्था कोरिया में अपना भोजन स्वयं बनाकर अपनी संस्कृति  के प्रति समर्पित है व दिन का शुभारंभ णमोकार महामन्त्र व सायंकाल भक्तामर स्त्रोत कर करती है। पिता राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ ने कहा कि उन्हें गर्व है कि भारतीय श्रमण संस्कृति के संस्कारों को बेटी ने जीवित रखा है।
इस उपलब्धि पर अनेक स्नेही जनों ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

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