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1 दिसंबर 1895 से प्रकाशित जैन समाज का सर्वाधिक प्रसार संख्या वाला साप्ताहिक

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अमृत वाणी

कविता – पर्वाधिराज

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पर्वाधिराज पर्युषण पर्व, वर्ष में तीन बार आते है। जिनालयों में भक्तिभाव से, पूजा अर्चना हम करते है।।1।। उत्तम क्षमा से शुरू होते, क्षमा वाणी तक हम मनाते है। दशलक्षण...

माँ बाप रूपी नीव पर मजबूत कंगूरे की तरह होती हैं संताने – आचार्य...

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कामां के विजय मती त्यागी आश्रम में वर्षायोगरत आचार्य विनीत सागर महाराज ने रविवारीय विशेष प्रवचन में कहा कि माता पिता के अहसानों को...

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