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1 दिसंबर 1895 से प्रकाशित जैन समाज का सर्वाधिक प्रसार संख्या वाला साप्ताहिक

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अमृत वाणी

शब्द और जिव्हा हिलाकर माफ करने में वक्त नहीं लगता.. अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर

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आचार्य प्रसन्न सागर औरंगाबाद। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल शब्द और जिव्हा हिलाकर माफ करने में वक्त नहीं लगता.. अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागर लेकिन मन...

जो दु:ख, परेशानी, बीमारी, तकलीफ हमको मिली है, वो मेरे दुश्मन को भी ना...

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औरंगाबाद। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल परमात्मा से नित्य यह प्रार्थना करो -- किहे  परमात्मा -- जो दु:ख, परेशानी, बिमारी, तकलीफ हमको मिली है, वो...

जिसके दिल में क्षमा, वह सबके दिल में जमा – आचार्य अतिवीर मुनि

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परम पूज्य आचार्य श्री 108 अतिवीर जी मुनिराज ने क्षमावाणी महापर्व की व्याख्या करते हुए कहा कि क्षमा मांगने की वस्तु नही बल्कि धारण...

मोबाइल आने के बाद आदमी झूठ बोलने में मास्टर माइण्ड बन गया है- अंतर्मना...

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तुम- तुम्हारी उम्र से नौ महिने बड़े हो, यह बात सिर्फ एक ही शख्स जानता है। सत्य को शब्दों का जामा नहीं पहनाया जा...

सत्यं ब्रूयात् प्रियम् ब्रूयात् – डॉ. महेन्द्रकुमार जैन ‘मनुज’

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उत्तम सत्य आत्मा का एक गुण है। जैसे किसी पर बनावटी आवरण पड़ा हो और वह हट जाये तो वास्तविक तस्वीर निकल आती है,...

उत्तम शौच का अर्थ है, जिसे चाहो – उससे कुछ मत चाहो..! अंतर्मना आचार्य...

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औरंगाबाद - 83 लाख 99 हजार 9 सौ 99 योनियों में सिर्फ एक मानव है जो धन कमाता है। अन्य कोई भी जीव बिना...

भावों की निगरानी से होगा बेड़ा पार – आर्यिका पूर्णमति माताजी

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इंदौर - व्यक्ति यदि सही ज्ञान रखें व सही समझ से कार्य करें तो सभी समस्याएं सुलझ सकती हैं। अज्ञानी की शरण में अज्ञान...

पर्याय रूप से कुछ भी शाश्वत नहीं है – आचार्य सुनील सागर

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भागदौड़ की इस जिंदगी में भी श्रावक सुबह-सुबह भोर होते ही चातुर्मास स्थल भट्टारकजी की नसिया पहुंच जाते हैं। प्रातः बेला में भगवान जिनेंद्र...

राष्ट्र के ख्याति प्राप्त जैन ज्योतिष आचार्यों का सम्मान मनुष्य की आकांक्षाओं का समाधान...

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20अगस्त 2022 - श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत विराजमान परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी...

परंपराएं-मर्यादाओं में भले ही भेद, पर ‘सबका मालिक एक’

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औरंगाबाद (नरेंद्र कुमार अजमेरा पीयूष कासलीवाल ) -  स्वतंत्रता दिवस पर विविधताओं के बीच एकता का दृश्य था, ताे आज इसी औरंगाबाद की धरा...

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