कैंसर के लक्षण, कारण और बचाव के तरीके – डॉ. राजेश जैन बीएचयू वाराणसी

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विश्व कैंसर दिवस 2024: विश्व कैंसर दिवस, जो हर साल 4 फरवरी को मनाया जाता है, उसका उद्देश्य लोगों को कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति जागरूक करना है। यह दिन 2000 में विश्व शिखर सम्मेलन के उद्घाटन के दौरान स्थापित किया गया था. कैंसर, जो एक गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्या है, वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रहा है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो रही है। 2022 में ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के अनुसार, 20 मिलियन नए कैंसर के मामले और 9.7 मिलियन मौतें हुईं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद- राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार, देश में कैंसर के मामलों की संख्या 2022 में 14.6 लाख से बढ़कर 2025 में 15.7 लाख होने का अनुमान है। भारत में कैंसर से मरने वालों की दर विकसित देशों से लगभग दोगुनी है, और हर 10 कैंसर मरीजों में से सात की मौत हो जाती है।

ऐसे लोगों में कैंसर का खतरा अधिक
कैंसर का खतरा उन लोगों में अधिक हो सकता है जिनमें कुछ खराब आदतें हैं, जैसे कि धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन, धुएं में मौजूद केमिकल और पराबैंगनी किरणों के संपर्क का। बढ़ता हुआ मोटापा और असुरक्षित यौन संबंध भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। आनुवांशिकी भी एक मुख्य जोखिम है, और जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को कैंसर हुआ है, उनमें कैंसर होने का खतरा अधिक हो सकता है। कुछ लोग मानते हैं कि सिर्फ गुटखा, तम्बाकू, और सिगरेट का सेवन करने वाले को ही कैंसर हो सकता है, लेकिन आजकल के समय में फास्ट फूड और उसमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, प्लास्टिक का अधिक उपयोग भी आजकल कैंसर की सबसे बड़ी वजहों में से एक माना जाता है। गरम चीजों को प्लास्टिक की प्लेट या बॉक्स में रखकर और उन्हें खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।

कैंसर के इलाज के लिए विभिन्न तरीके हैं, जिनमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियेशन थेरेपी, और टारगेटेड थेरेपी शामिल हो सकती हैं। आधुनिक मेडिकल रिसर्च और तकनीक ने कैंसर के इलाज में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कैंसर का पूरी तरह से इलाज अब तक मौजूद नहीं है। इसलिए, बचाव और जागरूकता महत्वपूर्ण हैं, और लोगों को नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट्स और जाँचों के लिए उत्साहित किया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय पर अगर कैंसर का निदान हो जाए तो इसका उपचार और रोगी की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है। कैंसर के कई उपचार उपलब्ध हैं। कैंसर का प्रकार और अवस्था जैसी स्थितियों के आधार पर दवाओं, थेरेपी, सर्जरी के माध्यम से इसका इलाज किया जाता है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में उपयोग होने वाली कुछ हेर्बल मेडिसिन और आहार से भी कैंसर के खिलाफ लड़ा जा सकता है, जैसे सदाबहार: इसमें कैंसररोधी तत्व पाए जाते हैं, टमाटर : इसमें कैंसररोधी बीटा कैरोटीन व लाइकोपीन तत्व पाए जाते हैं। एक शोध के अनुसार ज्यादा टमाटर खाने से प्रोस्टेट कैंसर का होने का खतरा लगभग 45 प्रतिशत तक कम हो जाता है, हरिद्रा : करक्यूमिन हल्दी में मुख्य रसायन है और कैंसर कोशिकाओं के विकास और प्रसार की रोकथाम में बहुत प्रभावी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, हल्दी को कैंसर रोगियों में जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जाना जाता है, गुडूची : गिलोय का उपयोग आमतौर पर आयुर्वेदिक दवाओं में इसके इम्यूनोमॉड्यूलेटरी और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए किया जाता है। शोध बताते हैं कि गिलोय में एंटीकैंसर गुण होते हैं, जो कि कैंसर कोशिकाओं में एपोप्टोसिस को प्रेरित करने की क्षमता। इसके अलावा, यह ट्यूमर के विकास को रोकता है और मेटास्टेसिस के जोखिम को कम करता है, त्रिफला : इसमें आमलकी हरीतकी व विभीतक के चूर्ण होता है। इसमे पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट ट्यूमर और कैंसर की कोशिकाओं से लड़ने में भी बहुत प्रभावी ह, कालमेघ : यह कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करता है और प्रभावी रूप से नष्ट कर सकता है। कालमेघ का अर्क मानव प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इसके अलावा, यह विभिन्न प्रकार के कैंसर पैदा करने वाले और रोगजनक एजेंटों के खिलाफ अच्छी तरह से काम करता है, अश्वगंधा : –रोग के लक्षणों, निदान और इसके उपचार के जटिल रूपों के कारण कैंसर रोगियों में बहुत अधिक तनाव होता है। इसके अलावा, बीमारी की पुनरावृत्ति का डर एक प्रमुख कारक हो सकता है जिससे अवांछित तनाव हो सकता है। यही कारण है कि कई रोगी तनाव उपचार के लिए दवाओं के विकल्प तलाश रहे हैं। इसके लिये अश्वगंधा क प्रयोग बहुत लाभदायक है, आमलकी/आंवला: शोधकर्ताओं के अनुसार आंवला के अर्क का सेवन कैंसर के विकास को रोकने में करता है। यह ढाल बनाने वाले सेलुलर डीएनए संरचना के स्तर को नुकसान को सीमित करता है और रोकता है, गोमूत्र: गोमूत्र के रोजाना सेवन करने से कैंसर के कोश नष्ट होते हैं। गोमूत्र के अर्क के सेवन का असर कैंसर से प्रभावित हिस्से पर होता है ।
(उपरोक्त किसी भी दवा का सेवन अपने चिकित्सक की सलाह से ही लें ।)

 

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