भारत का स्वतंत्रता दिवस

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कई साल पहले हमने भाग्य के साथ साक्षात्कार किया और अब समय आ गया है कि अब हम अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करें। आधी रात के समय जब दुनिया सो रही होगी तब भारत अपने जीवन और स्वतंत्रता के लिए जागेगा।’
15 अगस्त 1947 को यह भाषण जवाहरलाल नेहरु ने आज़ाद भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर देश और संविधान सभा को संबोधित करते हुए दिया था।
आज जब हम अपनी स्वतंत्रता के 71 साल मना रहे हैं तब हम उन सब लोगों को अपनी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के चंगुल से आजाद करने के लिए अपने जीवन की आहुति दी।
कई विद्रोहों और सशस्त्र विरोधों के रुप में स्वतंत्रता संग्रामों के कई चरण थे। ब्रिटिश शासन के पहले सौ साल में पूरे देश में कई विद्रोह हुए। इस पारंपरिक विरोध का अंत 1857 के विद्रोह के साथ हुआ जिसमें रियासत के शासकों, सैनिकों और किसानों ने भाग लिया। यह विद्रोह ब्रिटिश साम्राज्य के प्रति इन लोगों के गुस्से और शिकायतों का नतीजा था। विफल होने के बावजूद इसने कई नायक पैदा किए और सभी भारतीयों में एकता पैदा की। मंगल पांडे को 1857 में हुए विद्रोह का महान नायक माना जाता है। इस विद्रोह में लड़ने वाले अन्य लोगों में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहिब शामिल थे। इस विद्रोह ने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी थी। आखिरकार इसके बाद भारत की सत्ता ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के पास से ब्रिटिश क्राउन के पास चली गई।
1885 से 1905 के समय में भारत में राष्ट्रवाद के बीज बोए गए। एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक एओ हयूम के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का गठन हुआ। 1905 में भारत में बढ़ती राष्ट्रवाद की भावना को काबू करने के लिए वायसराय कर्जन ने बंगाल के विभाजन की शुरुआत की। इससे स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई और ब्रिटिश सामानों का बहिष्कार हुआ, साथ ही कर्जन की योजना के विपरीत सारे भारतीय एक हो गए।
एक साल बाद बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल और अरोविंदो घोष ने स्वराज की वकालत की। 1919 में रोलेट अधिनियम के खिलाफ लाला लाजपत राय के नेतृत्व में व्यापक राष्ट्रीय अभियान शुरु हुआ जिसमें वो गंभीर रुप से घायल हो गए।
काकोरी षड़यंत्र मामले में राम प्रसाद बिस्मिल और अश्फाकउल्ला खान को फांसी दी गई। चंद्रशेखर आज़ाद और खुदीराम बोस अपने समय के महत्वपूर्ण क्रांतिकारी थे। मार्च 1931 में साजि़शों की श्रृंखला के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दे दी गई। कुछ अन्य क्रांतिकारी समूह भी थे, जैसे सूर्य सेन के नेतृत्व वाला चिटगांव समूह।
यही वो समय था जब गांधी परिदृश्य में उभरे थे। उनका मुख्य योगदान उनकी अहिंसक क्रांति और सत्याग्रह थे। उनका विश्वास सत्य, अहिंसा और साथी मनुष्यों के लिए प्यार में था। अपने साबरमती आश्रम से दांडी तक मार्च करके गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान सुभाष चंद्र बोस अपने समय के शक्तिशाली नेता बन कर उभरे। उन्होंने आजाद हिंद फौज का नेतृत्व किया था।
इस समय के दौरान कई महिलाओं ने भी स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया था। कुछ प्रमुख महिला स्वतंत्रता सेनानियों में अरुणा आसफ अली, सरोजिनी नायडू, भीकाजी कामा और सुचेता कृपलानी थीं।
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन शुरु हुआ जिसमें ब्रिटिश साम्राज्य से जल्द से जल्द भारत छोड़ने की अपील की गई। जून 1947 में लार्ड माउंटबेटन ने भारत के विभाजन की योजना की घोषणा की। अगस्त 1947 में भारत को दो देशों में बांट दिया गया जिसमें मुस्लिम पाकिस्तान और धर्मनिरपेक्ष भारत बने।
भारत को प्रभावित करने वाली राजनीतिक घटनाओं में सबसे दुखद भारत का विभाजन रहा। भारत को दो हिस्सों में बांटकर ब्रिटिश चले गए। देश का विभाजन धार्मिक आधार पर किया गया जिसमें पाकिस्तान इस्लामी राष्ट्र और भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश बना।
यह सवाल आज भी उठता है कि क्या विभाजन सही था और उसे टाला नहीं जा सकता था। बंटवारेे ने दोनों ही देशों को तबाह किया। बंटवारे के बाद पलायन ने लोगों को अंतहीन पीड़ा और दुख दिया। ना सिर्फ देश का विभाजन हुआ बल्कि पंजाब और पश्चिम बंगाल राज्यों का भी विभाजन हुआ जिससे कई दंगे हुए और कई लोगों की जान गई। हिंदू और मुसलमानों ने महिलाओं का इस्तेमाल ताकत के यंत्र के तौर पर किया। कई का बलात्कार किया गया और कई को लूटा गया।
भारत और पाकिस्तान में आज भी विभाजन के घाव भरने बाकी है । सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के बीच कई युद्ध हुए हैं। आधिकारिक सीमा तय होने के बाद भी यह विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है। कश्मीर पर हक के मुद्दे को लेकर आज भी गतिरोध है। हाल के समय में नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों के बीच कारगिल युद्ध भी हुआ था। दोनों देशों में आज भी दुश्मनी की स्थिति है।
स्वतंत्रता के बाद से आज तक भारत ने लंबा सफर तय किया है। यहां कई क्षेत्रों में विकास और व्यापक पैमाने पर प्रगति हुई है। चाहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी हो या सूचना प्रौद्योगिकी या अन्य क्षेत्र, जैसे स्वास्थ देखभाल, शिक्षा आदि, भारत ने सभी में उंचाई को छुआ है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत ने बहुत विकास किया है। पूरे देश में जन्मदर और मृत्युदर में काफी कमी आई है। पिछले सालों में देश में साक्षरता दर में इज़ाफा हुआ है।
परमाणु उर्जा के क्षेत्र में भारत ने बहुत प्रगति की है। आज के समय में भारत एक प्रमुख परमाणु शक्ति है। इसके अलावा भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी में भी बहुत तरक्की की है। पूरी दुनिया में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी की मांग है। भारत उन कुछ देशों में शामिल है जिसने विभिन्न उपग्रह लाॅन्च किए हैं।
वर्तमान में भारत विश्व स्तर पर अपना महत्वपूर्ण स्थान बनाये हुए हैं .और इस समय भारत आर्थिक ,राजनैतिक ,स्वतंत्रता में अपना स्थान बनाये हैं इसके बावजूद भारत को स्वछता ,शिक्षा ,स्वस्थ्य ,बिजली पानी सड़क जैसी बुनियादी समस्यायों से जूझ रहा हैं तो हमने औद्योगिक ,तकनीकी,सूचनातंत्र ,उपग्रह आदि के क्षेत्रों में आशातीत सफलता प्राप्त की .इस समय हम धार्मिक उन्माद से भी जूझ रहे हैं .
आजादी के बाद से भारत ने बहुत कुछ हासिल किया है। लेकिन अब भी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। भारत को अब भी विश्व का सबसे उन्नत देश बनना बाकी है। यह भविष्य में कुछ महान उन्नति करने की ओर बढ़ रहा है।
हमारे देश के युवाओं का बहुत कुछ करना हैं और धर्मनिरपेक्षता ,और अनेकता में एकता बहुत बड़ी शक्ति हैं .और हमारे देश में सत्ता का हस्तांतरण विश्व में अपने किस्म का हैं .हमारी प्राथमिकता आबादी का नियंत्रण और रोजगार के अवसर जिस पर वर्तमान सरकार कटिबद्ध हैं .
हम ७७ वे स्वन्त्रता दिवस के अवसर पर मंगल कामना करते हैं की हम विश्व में अहिंसा शांति के साथ भाईचारेदेश के विकास में प्रत्येक नागरिक महती भूमिका निभाकर उन्नत हो.
विद्या वॉचसपति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद्, A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट ,होशंगाबाद रोड भोपाल 462026 मोबाइल 09425006753

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