बकरों की कुर्बानी आस्था का प्रतीक

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ईद अल-अज़हा—क्या जीवदया /अहिंसात्मक तरीके से नहीं मनाया का सकता ?—- विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल
ईद अल-अज़हा या क़ुरबानी की ईद (अरबी में; ईद-उल-अज़हा अथवा ईद-उल-अद्’हा – जिसका मतलब क़ुरबानी की ईद) इस्लाम धर्म में विश्वास करने वाले लोगों का एक प्रमुख त्यौहार है। रमजान के पवित्र महीने की समाप्ति के लगभग ७० दिनों बाद इसे मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर खुदा कि राह में कुर्बान करने जा रहे थे, तो अल्लाह ने उसके पुत्र को जीवनदान दे दिया जिसकी याद में यह पर्व मनाया जाता है।अरबी भाषा में ‘बक़र’ का अर्थ है भेड़[ लेकिन इधर हिंदी उर्दू भाषा के बकरी-बकरा से इसका नाम जुड़ा है, अर्थात इधर के देशों में बकरे की क़ुर्बानी के कारण असल नाम से बिगड़कर आज भारत, पाकिस्तान व बांग्ला देश में यह ‘बकरा ईद’ से ज्यादा विख्यात हैं।ईद-ए-कुर्बां का मतलब है बलिदान की भावना। अरबी में ‘क़र्ब’ नजदीकी या बहुत पास रहने को कहते हैं मतलब इस मौके पर अल्लाह् इंसान के बहुत करीब हो जाता है। कुर्बानी उस पशु के जि़बह करने को कहते हैं जिसे 10, 11, 12 या 13 जि़लहिज्ज (हज का महीना) को खुदा को खुश करने के लिए ज़िबिह किया जाता है। कुरान में लिखा है: हमने तुम्हें हौज़-ए-क़ौसा दिया तो तुम अपने अल्लाह के लिए नमाज़ पढ़ो और कुर्बानी करो।
इस ईद को विभिन्न नामों से जाना जाता है जैसे—
ईदुल अज़हा
ईद अल-अज़हा
ईद उल-अज़हा
ईद अल-अधा
ईदुज़ जुहा
त्याग का उत्थान
कुरबानी का त्यौहार हिजरी के आखिरी महीने ज़ु अल-हज्जा में मनाया जाता है। पूरी दुनिया के मुसलमान इस महीने में मक्का सऊदी अरब में एकत्रित होकर हज मनाते है। ईद उल अजहा भी इसी दिन मनाई जाती है। वास्तव में यह हज की एक अंशीय अदायगी और मुसलमानों के भाव का दिन है। दुनिया भर के मुसलमानों का एक समूह मक्का में हज करता है बाकी मुसलमानों के अंतरराष्ट्रीय भाव का दिन बन जाता है। ईद उल अजहा का अक्षरश: अर्थ त्याग वाली ईद है इस दिन जानवर की कुर्बानी देना एक प्रकार की प्रतीकात्मक कुर्बानी है।
मस्जिद में भक्त ईद अल-अधा प्रार्थना करते हैं। ईद अल-अधा की प्रार्थना किसी भी समय की जाती है जब सूरज पूरी तरह से जुहर के प्रवेश से ठीक पहले उठता है, 10 वीं तारीख को धु अल-हिजाह पर। एक बल की घटना (उदाहरण के लिए प्राकृतिक आपदा) की स्थिति में, प्रार्थना को धु-अल-हिजाह की 11 वीं और फिर धु-अल-हिज्जाह की 12 वीं तक देरी हो सकती है।
सामूहिक तौर पर ईद की नमाज़ अदा की जानी चाहिए। प्रार्थना मण्डली में महिलाओं की भागीदारी समुदाय से समुदाय में भिन्न होती है। प्रार्थनाओं और उपदेशों के समापन पर, मुसलमान एक दूसरे के साथ गले मिलते हैं और एक दूसरे को बधाई
देते हैं (ईद मुबारक), उपहार देते हैं और एक दूसरे से मिलते हैं। बहुत से मुसलमान अपने ईद त्योहारों पर अपने गैर-मुस्लिम दोस्तों, पड़ोसियों, सहकर्मियों और सहपाठियों को इस्लाम और मुस्लिम संस्कृति के बारे में बेहतर तरीके से परिचित कराने के लिए इस अवसर पर आमंत्रित करते हैं।
ईद अल-अधा के दौरान, लोगों के बीच मांस वितरित करना, पहले दिन ईद की नमाज से पहले तकबीर का जाप करना और ईद के तीन दिनों के दौरान प्रार्थना के बाद, इस महत्वपूर्ण इस्लामिक त्योहार के आवश्यक हिस्से माने जाते हैं।
अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर
ला इलाहा इल्लल्लाहु, अल्लाहु अकबर
अल्लाहू अकबर,
व लिल्लाहिल हम्द
कुर्बानी वाले जानवर के मांस को तीन भागों में विभाजित किया जाना पसंद किया जाता है। परिवार में एक तिहाई हिस्सा बरकरार रहता है; और एक तिहाई रिश्तेदारों, दोस्तों, और पड़ोसियों को दिया जाता है; और शेष तीसरा हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दिया जाता है।
मुसलमान अपने नए या सबसे अच्छे कपड़े पहनते हैं। महिलाएं विशेष पकवानों को पकाती हैं, वे परिवार और दोस्तों के साथ इकट्ठा होते हैं।
अकेले पाकिस्तान में २.० बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक की लागत वाले लगभग दस मिलियन जानवरों की ईद के दिन कुर्बानी कर दी जाती है।इसके अलावा विश्व भर में धर्म के नाम पर करोड़ों की जीव हिंसा की जाना कितना उचित हैं .हर जीव सुख चाहता और दुःख से डरता हैं .कुर्बानी के समय उस जीव की दशा कितनी दयनीय होती हैं .वह बेचारे घास- पत्ती खाते हैं और आप लोग उसे काटते और खाते हैं .”रहिमन हाय गरीब की कभी न निष्फल जाए .”इसी हिंसा के कारण उनमे हिंसात्मक वृत्तियाँ मिलती हैं जो स्वयं .परिवार, समाज .देश और विश्व के लिए नुकसानदायक हैं .एक वर्ष बिना हिंसा किये त्यौहार मनाकर के देखो .समय के साथ धार्मिक ग्रंथों में आवश्यक सुधार करना जरुरी हैं .
कोई भी धर्म हिंसा को स्थान नहीं देता हैं .
वे भी हमारे समान हमारे जैसे नागरिक हैं
वे पंचेन्द्रिय जीव हैं हमारे जैसे
सिर्फ उनके पास अपनी व्यथा कहने की शक्ति नहीं हैं
यदि उनमे अपनी औलाद का चिंतन करोगे
तो तुम्हारा दिल मन मसोसकर हो जायेगा
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू, नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026 मोबाइल ९४२५००६७५३

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