आचार्य 108 श्री सौरभ सागर जी महाराज का जयपुर शहर में हुआ पहली बार मंगल प्रवेश

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उमड़ा श्रद्धा-भक्ति का सैलाब

फागी संवाददाता

जयपुर।
जयपुर में 25 जून 2023 को दिगम्बर जैन आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के शिष्य आचार्य सौरभ सागर महाराज की ऐतिहासिक रूप से सारे सकल जैन समाज ने बैंड बाजा के द्वारा भव्य आगवानी की जो अपने 29 वर्षों की कठोर तपस्या के मार्ग पर चलते हुए पहली बार जयपुर नगरी में मंगल प्रवेश किया, इस बार का पावन चातुर्मास 2023 प्रताप नगर सेक्टर 8 दिगम्बर जैन मंदिर में करेगे,2 जुलाई को कलश स्थापना, 3 जुलाई को गुरुपूर्णिमा महोत्सव और 4 जुलाई को वीरशासन जयंती के कार्यक्रम सम्पन्न होगे।प्रचार संयोजक अभिषेक जैन बिट्टू ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य सौरभ सागर महाराज ने रविवार को प्रातः 6.15 बजे सूरजपोल गेट स्थित मोहनबाड़ी दिगम्बर जैन मंदिर से विहार यात्रा प्रारम्भ करते हुए हवामहल, बड़ी चौपड़ पर मंगल प्रवेश किया इस दोरान जयपुर की विभिन्न कॉलोनियों सहित पुष्प वर्षायोग समिति के पदाधिकारियो और कांग्रेस नेता, पूर्व राष्ट्रीय सचिव संजय बापना, गौरवाध्यक्ष राजीव जैन गाजियाबाद, सुनील साखूनियाँ, प्रताप नगर सेक्टर 8 के पदाधिकारियों ने पुष्पवर्षा कर आचार्य श्री आगवानी की और यहां से भव्य शोभायात्रा के रूप में चलते हुए ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ जोहरी बाजार, सांगानेरी गेट, बापू बाजार, न्यू गेट, अजमेरी गेट, टोंक रोड़, एसएमएस हॉस्पिटल, नारायण सिंह सर्किल होते हुए भट्टारक जी की नसियां में प्रवेश किया जहां पर जयपुर जैन महिला मंडल द्वारा 29 कलशों को सर पर रखकर आगवानी की इसके उपरांत 29 थालों पर पाद प्रक्षालन एवं आरती करके आचार्य श्री को जिनालय में प्रवेश करवाया। जहां आचार्य श्री ने श्रीजी के दर्शन कर धर्म सभा में अपना सानिध्य प्रदान किया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में जैन महासभा के प्रतिनिधि राजाबाबू गोधा ने शिरकत करते हुए बताया कि धर्म की संस्कृति और संस्कार जयपुर के कण-कण में सम्मिलित है, इन्ही संस्कृति और संस्कारों ने एक बार फिर जयपुर का सम्मान बढ़ाया कार्यक्रम में आचार्य सौरभ सागर महाराज ने बताया कि धर्म की पहचान संतो से नही श्रावकों से है – आचार्य सौरभ सागर कार्यक्रम में आचार्य श्री ने कहा की किसी भी धर्म की पहचान संतो से नही श्रावकों से होती है, श्रावक होंगे तभी धर्म पूजा जाएगा,संत शिक्षक है अगर सारे शिक्षक हो जायेंगे तो शिक्षा लेने वाले श्रावक कहा मिलेंगे, सबकी अपनी-अपनी जिम्मेदारी है जिसका निर्वहन होना चाहिए। धर्म संत और श्रावक दोनों से मिलकर बना है। चातुर्मास के मंगल कलश स्थापना के बाद साधु श्रावक से बंध जाता है, गुरुपूर्णिमा पर श्रावक साधु से बंध जाता है और वीर शासन जयंती पर साधु और श्रावक भगवान से बंध जाते है,गोधा ने बताया कि उक्त कार्यक्रम में अनेक गणमान्य लोगो के अलावा पूरे भारतवर्ष से श्रृदालुओं ने कार्यक्रम में शिरकत कर सहभागिता निभाते हुए कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई आचार्य श्री की जयपुर में अगवानी करने को लेकर दिल्ली, यूपी, एमपी, हरियाणा सहित जयपुर की विभिन्न कॉलोनियों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण सम्मिलित हुए। इस अवसर पर आचार्य श्री के गृहस्थ अवस्था के पिताजी श्रीपाल जैन सहित पूरा परिवार साथ-साथ था, कार्यक्रम में कांग्रेस राष्ट्रीय के पूर्व सचिव संजय बापना, हैरिटेज पार्षद पारस जैन, ग्रेटर से मनोनीत पार्षद चेतन जैन निमोडिया, अतिशय क्षेत्र श्री महावीर जी कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कासलीवाल, मानद मंत्री महेंद्र पाटनी, महेश काला, अशोक जैन नेता, राकेश छाबड़ा, राजस्थान जैन सभा अध्यक्ष सुभाष पांड्या, पूर्व न्यायाधीश एन.के. सेठी, कमलबाबू जैन, धर्म सरंक्षणी महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष रमेश जैन तिजारिया, तीर्थ संरक्षणी महासभा के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष धर्मचन्द पहाड़िया, ज्ञानचंद झांझरी, उमराव मल संघी, समाज सेवी मनोज सोगानी, विनय सोगानी, भाजपा नेता रामपाल जैन, अशोक जैन खेड़ली, जितेंद्र गंगवाल, नरेंद्र जैन आंवा,यशकमल अजमेरा, छोटा गिरनार बापू गांव के अध्यक्ष प्रकाश बाकलीवाल, पदम बिलाला, विनोद जैन कोटखावदा, प्रदीप लाला, अशोक पाटनी,निर्मल पांड्या,धीरज पाटनी, झोटवाड़ा राजाबाबु गोधा फागी तथा प्रताप नगर सेक्टर 8 कमेटी के पदाधिकारी, जोहरी बाजार महिला मंडल मंत्री पुष्पा सौगानी, वीर सेवक मंडल, राजस्थान जैन युवा महासभा, मुनि संघ व्यवस्था समिति सहित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी सम्मिलित हुए। चेतन जैन निमोडिया ने कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन किया।

राजाबाबु गोधा जैन गजट संवाददाता राजस्थान

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