अमेरिका नरभक्षी बन गया हैं और बना रहा ! – विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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आज मानव मांसाहारियों से पूरा घिर चूका हैं और शाकाहारी अब खुली सांस नहीं ले पा रहे हैं .अब खाना /भोजन का चयन बहुत कठिन होता जा रहा हैं .वैसे भी हम अप्रत्यक्ष रूप से मांसाहार खा रहे हैं ,विशेष तौर चॉकलेट बिस्कुट ,आइस क्रीम ,आदि आदि में सेंधमारी हो चुकी हैं .मांस के कारण अनगिनत जानवरों की हत्याएं नित्य प्रति होती हैं और वे बेचारे निरीह होने से अपना प्रतिकार नहीं कर सकते हैं ,क़ानून जरूर बने हैं पर कोई असरकारक और कारगार नहीं हैं .
अमेरिका देश में एक शहर ओक्लाहोमा में एक ताजातरीन जानकारी आयी हैं की मेक्डोनाल्ड भोजन प्रदाय करने वाली कंपनी ने मानव मांस से निर्मित खाद्य पदार्थों  के प्रदाय की जिम्मेदारी ली हैं और वह प्रदाय कर रही हैं .जिस पर अमेरिका के सी बी आई ने छापा मारकर जाँच शुरू की तो उसमे मानवमांस का निर्माण किया जाकर मैक्डोनाल्ड कोम्पनी ही इसके उत्पादक हैं ! इसके अलावा शिशुओं के मांस को भी प्रदाय किया जा रहा हैं .जो बहुत ही घृणित अपराध के साथ आपराधिक कृत्य हैं .जिसकी सच्चाई में संलंग वीडियो हैं .
एक बात समझ से परे  हो रही हैं ,इनको केंद्र सरकार ,राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ,और नगरनिगम आदि इनको लाइसेंस किस आधार पर देती हैं ?क्या सरकारें आर्थिक लाभ हेतु इनको स्वीकृति देती हैं और ये लोग आक्रामक बाजारीकरण कर हमको खाने के लिए प्रेरित करते हैं और इनमे ऐसे रासायनिक तत्व मिलाये जाते हैं जिस कारण बच्चे ,युवा और खाने वाले व्यसनी होकर उसकी ओर झुकते  चले जाते हैं .
एक बात और हैं इनका खाना बनाने वाली सभी सामग्रियां अमेरिका से ही आती हैं और बिना रसायन मिले ये सामग्रिया बहुत दिनों तक सुरक्षित नहीं रह सकती हैं .हमारे देश में सुबह की बनी  रोटी साग सब्जी शाम को नहीं खाते तब हम लोग इनके द्वारा निर्मित खाद्य सामग्री महीनो बासी कैसे खाते होंगे यदि रासायनिक जहर युक्त भोज्य खाकर हम स्वस्थ्य   न होकर बीमार हो रहे हैं जिससे हमारी आर्थिक अवनति   हो रही हैं
यदि यह सच्चाई हैं तो यह सबको जानकार आश्चर्य नहीं होगा की हमारा देश में अछूता नहीं रहेगा और संभव हो यहाँ भी विक्रय होने लगा हो .इसके बचाव के लिए हमारे पास एक ही विकल्प हैं की हम लोग ऐसे खाद्य सामग्रियों का पूर्ण बहिष्कार करे .क्या हम नहीं कर सकते हैं .मैक्डोनाल्ड ,के ऍफ़ सी जैसे अन्य खाद्य सामग्री बेचने वाले .इनके द्वारा आक्रामक बाजारीकरण होने के कारण हमें भ्रमित कर जानकार मानव मानव ,जानवरों का मांस खिला रहे हैं .अभी नहीं सम्हले तो हम ऐसा न हो अपने निजियों का मांस खाते मिले .कारण बच्चे, महिलाओं, पुरुषों  का अपहरण कर ,बलात्कार, उनको बेचना ,हत्या करना आजकल आम बात हो रही हैं .कानून बहुत लचीला हैं ,खाना पूर्ती भर करना .
अमेरिका ,चीन ,जापान और तो और हम अपने देश में सुरक्षित नहीं हैं .खानपान में इतनी अधिक मिलावट के साथ क्या क्या परोसा जा रहा हैं ,हम स्वाद के दीवाने होने से कुछ भी खाने और खोने को तैयार हैं .
यह घटना लोमहर्षक के साथ चिंतनीय हैं की हम कहाँ जा रहे हैं .मानव मांस भक्षण कितना निंदनीय और घ्रणित हैं ,यह कल्पनातीत हैं और अब बिक रहा हैं ,हम आदिम युग में जा रहे हैं .क्या भविष्य होगा .अब धन ,खानपान के पीछे हम मानव ही मानव का प्यासा होता जा रहा हैं ..
कल हमारा नंबर आएगा हैं और हम काल के मुंह में समा  जायेंगे .
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन  संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104  पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026  मोबाइल  ०९४२५००६७५३

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