अल्जाइमररोग / डिमेंशिया रोग —- विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल /पुणे

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डिमेंशिया/ शब्द डि ‘ मतलब विथाउट और ‘मेनटिआ मतलब माइंड से मिलकर बना है। ज्यादातर लोग समझते हैं कि डिमेंशिया छोटी-छोटी बातों को भूल जाने की समस्या का नाम है। लेकिन चीजों को भूलना या याददाश्त कमजोर हो जाना ही इसका एकमात्र लक्षण नहीं है।
डिमेंशिया की समस्या इससे कहीं अधिक गंभीर है। इसके तमाम अन्य चिंताजनक लक्षण भी हो सकते हैं। इन लक्षणों का असर मरीज के रोजमर्रा के जीवन पर भी पड़ता है। ये समस्याएं उम्र बढ़ने के साथ और ज्यादा बढ़ती जाती हैं।
बहुत से लोग डिमेंशिया को सठियाना या फिर पागलपन समझ लेते हैं। लेकिन ये जानना बहुत जरूरी है कि डिमेंशिया होने का मतलब ये नहीं है कि मरीज मंदबुद्धि है। ये सन्निपात, उन्माद या सांय-बांय बकना (देलीरियम ) भी नहीं है। डिमेंशिया का मतलब पागलपन भी नहीं है। डिमेंशिया असल में अम्नीसिया , याददाश्त खो जाना, चीजें भूल जाना नहीं है।
लक्षण
डिमेंशिया की समस्या 65 साल से ज्यादा उम्र वाले 10 में से 1 शख्स को हो सकती है जबकि 85 साल की उम्र में ये समस्या 4 में से 1 शख्स को हो सकती है। हालांकि अगर किसी को 65 साल की उम्र से पहले ही डिमेंशिया की शिकायत होने लगे तो माना जा सकता है कि ये अल्जाइमर की शुरुआत है।
प्रमुख लक्षण
किसी बात को यूं ही दोहराते रहना, बात को समझने में समस्या।
सामाजिक तौर-तरीके भूल जाना, अजीब बातें करना।
असभ्य भाषा इस्तेमाल करना, गाली देना, अश्लील हरकतें करना।
किसी काम को बहुत कोशिश के बाद भी याद न रख पाना।
सोचने-समझने की शक्ति कम हो जाना, लगातार खराब डिसीजन लेना।
अपने में ही खोए रहना, मेल-जोल बंद कर देना
बिना कारण ही बौखला जाना, चिल्लाना, रोना, इत्यादि
पहल करने में झिझकना।
सुबह-सुबह भूल जाना कि नाश्ता किया था या नहीं।
लोगों के नाम याद करने में समस्या, छोटी-छोटी मुश्किलों को हल करने में समस्या।
गलत या उल्टे कपड़े पहनना, साफ-सुथरा रहने में समस्या होना।
दिन, तारीख, महीना और साल तक भूल जाना।
अपने ही घर, शहर और देश को भूल जाना।
किसी तस्वीर को देखकर समझने या बताने में समस्या।
गणित के मामूली सवाल भी न हल कर पाना।
गलत शब्द बोलना या लिखना, शब्दों के अर्थ समझने में समस्या।
चीजों को गलत जगह पर रखना, जैसे घड़ी को फ्रिज या लॉकर में डाल देना।
किसी काम को शुरू करने के बाद भूल जाना कि क्या करने वाले थे।
आयुर्वेदानुसार चिकित्सा —
तिल का तेल
आयुर्वेद में तिल के तेल का प्रयोग याददाश्त बढ़ाने में उपयोगी है। तिल के तेल को गुनगुना गर्म कर उसकी ३-३ बूंदें अपने नाक के दोनों नथुनों में डाल सकते हैं। सिर व पैरों के तलवों की मालिश के अलावा तेल को भोजन में भी प्रयोग कर सकते हैं।
अश्वगंधा
अश्वगंधा ऐसी जड़ीबूटी है जो रोग को बढऩे से रोकती है। इसका काम दिमाग को मजबूत करना है। कई शोधों के अनुसार इससे शरीर में ऐसे एंटीऑक्सीडेंट्स बनते हैं जो दिमागी नसों को एक्टिव रखते हुए मानसिक कार्यक्षमता बढ़ाते हैं।
हल्दी व बादाम
हल्दी में मौजूद करक्यूमिन तत्त्व अच्छा एंटीऑक्सीडेंट्स है। रोजाना भोजन में इसके प्रयोग से या फिर दूध में चुटकीभर इसे लेने से दिमाग को ताकत मिलती है। यह दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करती है। वहीं बादाम ब्रेन के लिए हैल्दी फूड है। इसमें मौजूद विटामिन-ई याददाश्त बढ़ाने में सहायक है।
गाजर खाएं
इसमें मौजूद विटामिन-ए से याददाश्त पर हुआ नकारात्मक प्रभाव कम होता है। इसे सब्जी के रूप में, जूस या हल्वे के रूप में खा सकते हैं। बुजुर्गों के लिए इसका सूप काफी फायदेमंद होता है।
शंखपुष्पी
ब्रेन टॉनिक है शंखपुष्पी। इसके खास तत्त्व दिमागी कोशिकाओं को सक्रिय कर भूलने की समस्या दूर करते हैं। 3-6 ग्रा. चूर्ण रोज दूध के साथ पीएं।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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