विश्व साँप दिवस —- विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैनभोपाल

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जैन तीर्थकर पार्श्वनाथ का प्रतीक चिन्ह सर्प! ये जैन धर्म के 23वे तीर्थंकर है।
हर साल 16 जुलाई को आयोजित होने वाले विश्व साँप दिवस का उद्देश्य दुनिया भर में मौजूद 3,500 से अधिक साँप प्रजातियों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।
सांपों को लेकर फैली विभिन्न भ्रांतियों और इनकी प्रजातियों के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 16 जुलाई को विश्व सर्प दिवस मनाया जाता है।
भारत में सांपों को लेकर लोगों की अलग-अलग अवधारणाएं हैं, जहां एक तरफ नाग पंचमी पर सांप या नाग की पूजा की जाती है तो वहीं दूसरी ओर अपने आस-पास दिखने पर लोग इन्हें खतरा समझकर लाठी-डंडे लेकर मारने के लिए इकट्ठा हो जाते हैं।
सांपों की पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने वाले पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका होती है, ऐसे में यह दिवस लोगों से उनके संरक्षण का आग्रह भी करता है।
सांपों की सभी प्रजातियां जहरीली नहीं होती यह पृथ्वी पर उन जीवों में से है जिनके बारे में सबसे ज्यादा गलतफहमियां फैली हुई है। हमें सांपों को मारने की नहीं बल्कि इनसे सजक होकर रहने की आवश्यकता है।
इतिहास
लोगों का कहना है कि टेक्सास में वर्ष 1967 में शुरू हुई सांपों से संबंधित एक फर्म ने लोगों के भीतर सांपों से जुड़े भ्रमों को दूर करने के लिए जागरूकता फैलाने की शुरुआत की।
1970 तक यह फर्म काफी मशहूर हो गई और इसके द्वारा 16 जुलाई को इस विषय पर एक विशेष आयोजन किया गया, इसके बाद से यह कई अन्य संस्थाओं तक फैला और धीरे-धीरे आम लोगों बीच भी प्रचलित हो गया। आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इसे कई देशों द्वारा मनाया जाता है।
महत्व
दुनिया भर में सांपों की 3000 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती है जिनमें से 600 के करीब ही जहरीले होते हैं।
भारत में इनकी लगभग 300 प्रजातियां है, जिनमें से 50 प्रजातियां ही जहरीली होती हैं और केवल 15 प्रजातियां ही ऐसी हैं जिनके काटने से इंसान की मौत हो सकती है।
लेकिन लोग अक्सर आसपास सांप दिखने पर उसे विषैला मानकर मार देते हैं, ऐसे में इनकी विभिन्न प्रजातियों के बारे में लोगों को बता कर हम सांपों का संरक्षण कर सकते हैं।
यह पारिस्थितिक तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और पृथ्वी पर जीवन बनाए रखने में योगदान करते हैं।
ये किसानों के अच्छे साथी कहे जा सकते हैं क्योंकि यह फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़े मकोड़ों और चूहों को खा जाते हैं।
रोचक तथ्य
किंग कोबरा जहरीले सांपों में सबसे लंबा सांप होता है।
सांप धरती पर पाए जाने वाले सबसे पुराने जीवो में से एक हैं और इनका जिक्र लगभग सभी सभ्यताओं और संस्कृतियों में मिलता है।
यह दुनिया के लगभग हर कोने में पाए जाते हैं, चाहे वो बर्फीले पहाड़ हो, घने जंगल हो, महासागर हो या तपता मरुस्थल।
ये अधिकतर कीड़े, मकोड़ों चूहों और मेंढक आदि जानवर को अपना शिकार बनाते हैं, बड़े सांप तो हिरण, बंदर और सूअर जैसे जानवरों को भी निगल जाते हैं।
दुनिया भर में कुछ लोग इनको पालते भी हैं भारत में इन्हें पालने वाली जनजाति होती हैं। हालांकि अब इन्हें पकड़ना, पालना दोनों ही कानूनन अपराध है।
किंग कोबरा एकमात्र ऐसी प्रजाति है जो अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है इसके अलावा रसैल वाईपर जैसे कुछ साँप अंडों की बजाय सीधा सपोले को जन्म देते हैं।
इनकी सूंघने की क्षमता काफी तेज होती है, ये अपनी जीभ से सूंघते हैं, इसीलिए अक्सर जीभ बाहर निकालते हैं।
इनके कान नहीं होते लेकिन उनके जबड़े की निकली हड्डी में पानी या धरती की सतह के करीबी साउंड वेव को पहचानने की क्षमता होती है।
साँपों से जुड़े लोगों के बीच फ़ैले कुछ मिथक
भारत में सांपों को लेकर कई फिल्में और कहानियां प्रचलित है जो अंधविश्वास को बढ़ावा देती हैं इनमें अक्सर इन्हें बदला लेते, बीन की धुन पर झूमते, दूध पीते, इच्छाधारी सांप को इंसान बनते या नागमणि निकालते हुए दिखाया जाता है, जो अब तक बस एक कल्पना से बढ़कर कुछ नहीं है।
इंसानों को लगता है कि सांप उनके दुश्मन है और उन्हें देखते ही काट लेंगे, लेकिन सच तो यह है कि जितना हम इनसे डरते हैं उतना ही ये भी हमसे डरते हैं, और खतरा महसूस होने पर अपने बचाव के लिए ही किसी पर हमला करते या उसे काटते हैं।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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