विश्व आदिवासी दिन —–विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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विश्व आदिवासी दिवस, विश्व में रहने वाली पूरी आबादी के मूलभूत अधिकारों (जल, जंगल, जमीन) को बढ़ावा देने और उनकी सामाजिक, आर्थिक ओर न्यायिक सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को विश्व के आदिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। यह घटना उन उपलब्धियों और योगदानों को भी स्वीकार करती है जो मूलनिवासी लोग पर्यावरण संरक्षण, आजादी, महा आंदोलनों, जैसे विश्व के मुद्दों को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। यह पहली बार संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा दिसंबर 1994 में घोषित किया गया था, 1982 में मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की मूलनिवासी आबादी पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की पहली बैठक का दिन।
इतिहास
विश्व के आदिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस पहली बार संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा दिसंबर 1994 में घोषित किया गया था, जिसे हर साल विश्व के आदिवासी लोगों (1995-2004) के पहले अंतर्राष्ट्रीय दशक के दौरान मनाया जाता है। 2004 में, असेंबली ने “ए डिसैड फ़ॉर एक्शन एंड डिग्निटी” की थीम के साथ, 2005-2015 से एक दूसरे अंतर्राष्ट्रीय दशक की घोषणा की। आदिवासी लोगों पर संयुक्त राष्ट्र के संदेश को फैलाने के लिए विभिन्न देशों के लोगों को दिन के अवलोकन में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। गतिविधियों में शैक्षिक फोरम और कक्षा की गतिविधियाँ शामिल हो सकती हैं ताकि एक सराहना और आदिवासी लोगों की बेहतर समझ प्राप्त हो सके।
23 दिसंबर 1994 के संकल्प 49/214 द्वारा, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने निर्णय लिया कि विश्व के आदिवासी लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दशक के दौरान अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाएगा। पहली बैठक के दिन, 1982 में मानव अधिकारों के संवर्धन और संरक्षण पर संयुक्त राष्ट्र कार्य समूह की आदिवासी आबादी पर अंकन का दिन है।
प्रतीक
बांग्लादेश के एक चकमा लड़के रेवांग दीवान द्वारा कलाकृति को संयुक्त राष्ट्र स्थायी मुद्दे पर दृश्य पहचानकर्ता के रूप में चुना गया था। यह विश्व के आदिवासी लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को बढ़ावा देने के लिए सामग्री पर भी देखा गया है। यह हरे रंग की पत्तियों के दो कानों को एक दूसरे का सामना करते हुए दिखाई देता है और एक ग्रह पृथ्वी जैसा दिखता है। ग्लोब के भीतर बीच में एक हैंडशेक (दो अलग-अलग हाथ) की तस्वीर है और हैंडशेक के ऊपर एक लैंडस्केप बैकग्राउंड है। हैंडशेक और लैंडस्केप बैकग्राउंड को ग्लोब के भीतर ऊपर और नीचे नीले रंग से समझाया गया है।
विश्व के समस्त देशों में इस दिवस को मनाया जाने लगा किन्तु अफसोस ! भारत की सरकारों ने मूलनिवासियों के साथ धोखा करते हुए भारत में इस दिन के बारे में आज तक किसी को नहीं बताया और ना ही आज तक मनाया। जबकि UNO ने पुनः 16 दिसंबर 2004 से 15 दिसंबर 2014 तक फिर “दूसरा मूलनिवासी दशक” घोषित किया। जेनेवा के सम्मेलन में भारत सरकार ने अपने प्रतिनिधि के रूप में डा बाबासाहेब अम्बेडकर के सगे पौत्र मा प्रकाश अम्बेडकर द्वारा UNO को यह अवगत कराया कि “भारत में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा परिभाषित देशज लोग अर्थात मूलनिवासी भारतीय लोग ही ही नहीं है और यहाँ के अनुसूचित जाति, जन जातियों से किसी भी प्रकार का सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक व शैक्षिक पक्षपात हो रहा हैं।”
इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र संघ में ग्लोबल इकनॉमी के संबंध में मूलनिवासियों को जो प्रतिनिधित्व मिलने वाला था, उसे मनुवादियों ने अपने में से एक एक मूलनिवासी के द्वारा ही समाप्त कर दिया। UNO द्वारा पिछले 22 वर्षों से निरन्तर विश्व मूलनिवासी दिवस मनाया जा रहा है, किन्तु भारत के मूलनिवासी बहूजनो को इसकी कोई जानकारी नहीं है। इसी के मद्देनजर अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर मूलनिवासियों की समस्याओं को मजबूती के साथ रखने की पूर्व तैयारी के सन्दर्भ में ही बामसेफ के राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष मा वामन मेश्राम जी ने 23 जुलाई 2016 को लंदन (इंग्लैंड), 26 जुलाई 2016 को पेरिस (फ्रांस) व 01 अगस्त 2016 को रोम (इटली) में बामसेफ द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सेमिनारों का आयोजन किया। इन्हीं दबावों से उबरने की कड़ी में RSS प्रमुख मोहन भागवत अभी अभी लन्दन में बोल कर आये है कि हिन्दु नामक कोई धर्म नहीं बल्कि यह एक परम्परा है।
UNO की स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई एवं इसका मुख्यालय न्यूयार्क में है तथा वर्तमान में इसके 193 देश सदस्य हैं। भारत UNO का 30 अक्टूबर 1945 से सदस्य है। विश्व मूलनिवासी दिवस 9 अगस्त को आपस में “हैप्पी मूलनिवासी डे” की हार्दिक शुभकामनाएं एक दूसरे को देते हुए हक अधिकार प्राप्त करने के लिए संघर्ष का शंखनाद करें।
9 अगस्त को UNO द्वारा वर्ल्ड इंडिजेनस डे मनाया जा रहा है। Indigenous का मतलब होता है मूलनिवासी, परन्तु भारत की सरकारें हमारे लोगों में ही भेद करने मतलब, विभाजन करने, मतलब षडयंत्र करने के लिए Indigenous peoples का हिन्दी अनुवाद मात्र आदिवासी के नाम पर करके SC/ST/OBC, Converted minority और आदिवासी को अलग अलग करने का षडयंत्र कर रही है। विज्ञान के अकाट्य प्रमाण DNA test जिसकी रिपोर्ट Times of India में 21 मई 2001 में छपी, जिसके अनुसार SC/ST/OBC और उससे धर्म परिवर्तित अल्पसंख्यक ही भारत के मूलनिवासी (Indigenous peoples) है, और ब्राह्मण, क्षञिय, वैश्य यह विदेशी युरेशियन नस्ल के हैं, मतलब विदेशी हैं।
परन्तु षडयंत्र यह किया जा रहा है कि, जब UNO द्वारा 9 august को World Indigenous peoples day मनाया जा रहा है, तब भारत में उसको विश्व आदिवासी दिवस के नाम पर मनाये जाने का षडयंत्र किया जा रहा है।
मतलब मूलनिवासी के नाम पर हम आपस में ही लडते रहें। इसलिए विश्व आदिवासी दिवस के नाम पर हमारी आदिवासी जातियों को अलग करने का विदेशी षडयंत्र है।
विश्व आदिवासी दिवस का अंग्रेजी अनुवाद होगा World Tribes day, और UNO मना रहा है विश्व मूलनिवासी दिवस
मतलब world Indigenous peoples day ! Indigenous मतलब Native, मतलब मूलनिवासी, मतलब मूल रहिवासी।
अर्थात, असली नाम विश्व मूलनिवासी दिवस है।
बोल पच्चासी, जय मूलनिवासी ।।
कनाडा में उत्सव
विश्व के आदिवासी लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस को ऑलिन द्वारा किंग्स्टन, ओंटारियो में कलाकारों, वक्ताओं, कवियों, कलाकारों और विक्रेताओं और सामुदायिक सेवा बूथों की एक विस्तृत श्रृंखला के साथ सभी देशों के सामुदायिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026 मोबाइल ०९४२५००६७५३

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