विरागोदय महामहोत्सव मे आदिकुमार के जन्माभिषेक मे उमडा जनसैलाब

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पथरिया/ – ‘न भूतो न भविष्यति’ विरागोदय महामहोत्सव के पंचकल्याणक क्रियाओं के तृतीय दिवस प्रातः माता मरुदेवी के गर्भ से जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ का जन्म बालक आदिकुमार के रूप में होने के उपरांत जन्माभिषेक की क्रियाओं व शोभायात्रा मे अपार जनसमूह ने भाग लेकर खुशियां मनाई, दिव्यघोष व जयकारों ने आकाश गुंजायमान कर दिया।

विरागोदय में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में हर दिन भगवान आदिनाथ के जीवन के विविध प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है। धर्मसभा में हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं के बीच बालक आदिकुमार का जन्म हुआ। सौधर्म इंद्राणी बालक को लेकर श्रद्धालुओं के बीच पहुंचीं। यह सब कुछ एक लघु नाटिका के रूप में मंच कलाकार उमेश जैन भिंड ने प्रस्तुत किया । भगवान की मनमोहक प्रतिमा को करीब पाकर कई श्रद्धालु भक्तिभाव में भावविभोर हो गये। गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज ने प्रवचनों में बताया कि प्रातः काल राजा नाभीराय के यहां माता मरूदेवी से बालक का जन्म हुआ।

धनपति कुबेर के आदेश से ऐरावत हाथी पर सौधर्म इंद्र सचि इंद्राणी को बैठाकर मध्यलोक में प्रवेश करता है और गंधर्व 700 करोड़ देवों के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाने स्वर्ग से उतर कर ऐरावत हाथी पर आते हैं। इसी प्रसंग के साथ पथरिया स्थित विरागोदय में पंचकल्याणक स्थल पर ऐरावत हाथी पर सौधर्म इंद्र अपनी इंद्राणी के पात्र अपने इंद्र परिवार के साथ कमलाकार विशाल मुख्य मंदिर में बने पांडुक शिला का स्वर्ण एवं रजत कलशों से अभिषेक इंद्र इंद्रानियों के साथ ही हजारों भक्त श्रद्धालुओं ने भी किया। इस आवसर पर आहार का सौभाग्य विजय चंद असम वालो को प्राप्त हुआ और धर्मसभा में पूरे भारतभर से आये भक्तों ने श्री फल भेंट कर उनका आशीर्वाद लिया।

आज होगी तप कल्याणक की क्रियायें

विरागोदय महामहोत्सव मीडिया समिति के राजेश रागी बकस्वाहा ने बताया कि आज बुधवार 8 फरवरी को प्रातः बालक्रीड़ा, तीर्थंकर वन लोकार्पण, वृक्षारोपण तथा दोपहर मे राज्याभिषेक, नीलांजना नृत्य, वैराग्य, गृहत्याग, दीक्षाविधि संस्कार और चक्रवर्ती की विशाल दिग्विजय शोभायात्रा निकाली जावेगी।

-राजेश रागी वरिष्ठ पत्रकार बकस्वाहा

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