विदेशी विद्वान भी इस बात को मानते हैं कि विश्व में सभी ज्ञान पूर्व से ही आया है।

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जैन धर्म अध्ययनपीठ द्वारा संचालित जैन विरासत प्रमाण पत्र पाठ्यक्रम के प्रमाण पत्र वितरित किए।
इंदौर। भारतीय संस्कृति में अनेक संस्कृतियां सम्मिलित हैं, जिसमें वैदिक दर्शन एवं श्रमण संस्कृति जिसमे जैन दर्शन, बौद्ध दर्शन मूल है। विश्व के ज्ञान की उत्पत्ति का मूल भारत ही है। विदेशी विद्वान भी इस बात को मानते हैं कि विश्व में सभी ज्ञान पूर्व से ही आया है।
उक्त विचार देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर की कुलपति प्रोफेसर डाक्टर श्रीमती रेणु जैन ने श्रमण संस्कृति विद्या वर्धन ट्रस्ट कमेटी के अंतर्गत डॉ भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग द्वारा संचालित कोर्स जैन विरासत पत्राचार पाठ्यक्रम के प्रथम सेशन में सफल हुए दीक्षार्थीयों को प्रमाण पत्र वितरित कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर रामदास जी आत्राम कुलपति डॉ बी आर अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विवि द्वारा की गई।
प्रोफेसर डीके वर्मा वरिष्ठ आचार्य, आरके बघेल सा कुल सचिव, भानू कुमार अध्यक्ष विद्या वर्धन ट्रस्ट ने भी अपनी बात रखी। इस अवसर पर डॉ मनीषा सक्सेना के साथ विश्व विद्यालय के अनेक डीन भी उपस्थित थे वहीं विद्या वर्धन ट्रस्ट के महामंत्री कैलाश वेद, रवि गंगवाल, अभिषेक झांझरी, मनीष वेद, ऊषा पाटनी आदि गणमान्य नागरिक की उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का प्रारंभ श्रीमती उषा पाटनी के मंगलाचरण के साथ हुआ । अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया तत्पश्चात अतिथि स्वागत वि वि की ओर से किया गया। सम्पूर्ण कार्यक्रम की जानकारी डॉ अनुपम जैन मानद आचार्य द्वारा दी गई। इस परीक्षा में 54 उपस्थित रहे सभी उत्तीर्ण हुए सभी को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आभार आरके बघेल सा कुल सचिव द्वारा प्रकट किया गया। कार्यक्रम कि सफल संचालन डॉ अनुपम जैन ने किया।
उक्त जानकारी ओम पाटोदी द्वारा दी गई।

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