श्रावकाचार अनुशीलन राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी सम्पन्न

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 विद्वानों ने प्रासंगिक विषयों पर प्रस्तुत किए शोधालेख, संगोष्ठी को  सुनने उमड़ी भीड़
केकड़ी, राजस्थान। श्री चन्द्रप्रभ दिगम्बर जैन चैत्यालय केकड़ी, राजस्थान में चर्या शिरोमणि आचार्य श्री विशुद्धसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के मङ्गल सान्निध्य व शास्त्रि परिषद के अध्यक्ष डॉ श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत के संयोजकत्व में 15 व 16 जून 2024 को दो दिवसीय श्रावकाचार अनुशीलन राष्ट्रीय विद्वत् संगोष्ठी का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। संगोष्ठी के दो सत्रों में आचार्य श्री सुंदरसागरजी महाराज ससंघ का सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।
इस संगोष्ठी में डॉ. शीतल चंद्र जैन जयपुर, डॉ श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, डॉ. श्रीयांस कुमार जैन जयपुर, ब्र. डॉ . अनिल भैया प्राचार्य जयपुर, पंडित विनोद कुमार जैन रजवांस, डॉ अनेकान्त जैन दिल्ली , ब्र. डॉ धर्मेंद्र भैया जयपुर, डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर, डॉ. पंकज कुमार जैन इंदौर, डॉ आशीष जैन आचार्य सागर, डॉ. सोनल कुमार जैन दिल्ली आदि विद्वानों ने अपने महत्वपूर्ण आलेख प्रस्तुत किए। स्थानीय विद्वान देवेंद्र जैन शास्त्री एवं विवेक शास्त्री का सराहनीय योगदान रहा।
संगोष्ठी में चार सत्र हुए जिसकी अध्यक्षता डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत, डॉ. शीतल चंद्र जैन जयपुर, डॉ. श्रीयांस सिंघई जयपुर, डॉ. श्रेयांस कुमार जैन बड़ौत ने की। सत्रों का संचालन क्रमशः पंडित विनोद कुमार जैन रजवांस, डॉ. सुनील जैन संचय ललितपुर, डॉ. अनेकान्त जैन दिल्ली , राजेन्द्र महावीर सनावद ने किया। भंवर लाल जी जैन अध्यक्ष जैन समाज केकड़ी ने सभी विद्वानों का आभार व्यक्त किया।
केकड़ी जैन  समाज द्वारा सभी विद्वानों का स्वागत किया गया।
धर्म को धन से न तौला जाय : मुनि श्री आदित्यसागर जी
इस अवसर पर श्रुतसंवेगी मुनि श्री आदित्य सागर जी महाराज ने कहा कि पूजा में द्रव्य भी प्रासुक हो और भाव भी प्रासुक हों तभी पूजा की सार्थकता है। मंदिर में हाथ-पैर के साथ मन भी धोकर प्रवेश करें। पूजा, अभिषेक पूर्वक ही हो। भगवान न राजी होते हैं न ही नाराज। धर्म को धन से न तौला जाय। बोलियों को व्यापार न बनाया जाय।  स्व संपत्ति का दान देना चाहिए। दान में लूटमारी , मायाचारी , वसूली न हो। ये मेरे गुरु ये तेरे गुरु ऐसा भेदभाव न किया जाय। एक गुरु जरूर बनाएं लेकिन किसी के साथ भेदभाव न किया जाय। साधु को एकल बिहारी नहीं होना चाहिए। आज समाज में कुलाचार पालन की परंपरा टूट रही है जो चिंतनीय है। आचरण की चर्चा तो हो रही है पर उसकी पालना नहीं हो रही है।
मुनियों पर ही जिनशासन टिका हुआ है : आचार्य श्री सुंदरसागर जी
इस अवसर पर आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ने कहा कि अभिषेक, शांतिधारा विशुद्धि बढ़ाने के भाव से की जानी चाहिए। हम लोग कलश देखें , क्लेश न करें। साधु और विद्वान एक हो जायं तो प्रभावना और अधिक बढ़ जाती है। काल कोई भी हो मुनियों के मूलगुण 28 ही रहेंगे। मुनियों से कोई गलती होती है तो उनके गुरु को बताएं, उपगूहन, स्थितिकरण करें, ढ़िढोरा न पीटें। मुनियों पर ही जिनशासन टिका हुआ है।
शास्त्रि परिषद के अध्यक्ष डॉ श्रेयांस कुमार जी जैन का हुआ भव्य सम्मान : पिछले दिन केशोरायपाटन में अखिल भारतवर्षीय दिगम्बर जैन शास्त्रि परिषद के अधिवेशन में सर्व सम्मति से डॉ श्रेयांस कुमार जी जैन बड़ौत को पुनः शास्त्रि परिषद का अध्यक्ष चुना गया था, इस उपलक्ष्य में केकड़ी जैन समाज द्वारा डॉ श्रेयांस कुमार जी जैन का भव्य सम्मान सैकड़ों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच किया गया। समाज ने उन्हें पगड़ी , शाल, श्रीफल, प्रतीक चिह्न भेंटकर सम्मानित किया।

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