राष्ट्रगान /राष्ट्रध्वज —-आत्मगान

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हमारे देश और अभी कुछ दिनों पूर्व किसी अन्य देश में राष्ट्रध्वज का अपमान किया ,उसको पैरों से कुचला और अपने देश के निवासियों ने ही देश का अपमान किया और उस पर  ख़ुशी मनाया  जो हम देशवासियों के लिए लज़्ज़ा की बात हुई। राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान  के लिए लाखों लोगों ने अपना बलिदान  दिया। राष्ट्रध्वज  और राष्ट्रगान हमारा गौरव हैं।
भारत वर्ष अनेक विविधाओं का देश हैं .हमारा देश फुरूस्तान  देश हैं और यहाँ के लोग फुरसत अली हैं .कोई को कोई काम नहीं तो वही  कुछ काम हैं .जैसे कोई कहता हैं की हमें कोई चिंता नहीं तो उसे वही चिंता हैं की कोई चिंता नहीं. दो दोस्त एक गुरु जी के पास गए .दोनों सिगरेट पीते थे .गुरु जी से मिलने के बाद एक बोला मुझे गुरु जी ने सिगरेट पीने से मना कर दिया और दूसरा बोला की मुझे सिगरेट  पीने को कह दिया .तब पहले ने पुछा वो कैसे तो दूसरा बोला मेने पूछा था की मै भगवान का नाम लेते हुए सिगरेट पी सकता हु तो गुरु जी बोले हां .और  दूसरे ने पहले से पूछा तुमने क्या कहा था ?तो पहला बोला मेने पूछा था की सिगरेट पीते हुए भगवान् का नाम ले सकता हूँ तो गुरु जी बोले नहीं.जैसे तुलसी दास जी ने कहा की बीज  को उल्टा पुल्टा कैसे भी  बोया जाय फसल मिलती हैं .
जिस प्रकार हमारा नाम कोई पुकारता  हैं ,कभी आपका नाम कही छप जाता हैं  या कोई भी हो भीड़ मै तो आप अपनी फोटो पहचान लेते हो.जैसे कोई आपका नाम ,परिवार का नाम ,जाति का नाम ,मोहल्ले का नाम शहर का नाम और देश का नाम पुकारता हैं तो हमारे कान खड़े  हो जाते हैं. इसी प्रकार हमको स्वंत्रतता के पूर्व और स्वत्नत्रता के बाद मै मूलतः क्या अंतर मिला.देश वही था ,सब कुछ वही था पर हमको अपना देश जो गुलाम था उसे स्वत्रंत कहने मै और अपना राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान की स्वंत्रतता  मिली .किसी भी राज्य या देश का ध्वज पताका विजय  पताका कहलाती हैं .इस झंडे की शान बान के लिए ही लाखों लोंगो ने अपनी बलिदानी दी. कही पर भी राष्ट्र ध्वज गिरने न पाए और न कोई अपमान न करे .इसीलिए की लिए लोग प्राणों की आहुति दे देते हैं .
हमको या वर्तमान मै नवयुवकों को आजादी का अर्थ इसलिए नहीं मालूम कारण हमको आजाद देश ,मिला .जिनके परिवार उजाड़ दिए गए और जिन्होंने अपने आपको बलिदानी कहलाया उनसे पूछते गुलामी का दर्द क्या होता था और अब हम आज़ादी का कष्ट भोग रहे हैं ! जी हाँ हम वर्तमान मै स्वतंत्रता का दंश झेल रहे हैं .कारण हम पूर्ण स्वछन्द हो चुके जैसे हमारे राज नेता और पार्टियां .
आजकल एक बहस चल रही हैं की राष्ट्रगान सिनेमाहाल मै नहीं गाना चाहिए . इस पर दो विचार धारा काम कर रही हैं एक कहते हैं चलना या गाना चाहिए और दूसरे कहते हैं की इसके गाने से इसका अपमान होता हैं लोग चलते फिरते रहते हैं ,और कोई खड़ा भी नहीं होता  और इससे कोई सम्मान नहीं  होता .हम सिनेमा मनोरंजन के आते जाते हैं या राष्ट्रभक्ति  के लिए .हर सिक्के के दो पहलु हैं .जैसे कुरान मै लिखा हैं की ये मुसलंमान तो यदि नापाक हैं तो मस्जिद जाने की जरुरत नहीं हैं .आज हम वर्तमान मै किसकी दम पर जी रहे हैं यही राष्ट्रगान और राष्ट्र्रीय ध्वज ,इसके फहराने और गाने की आज़ादी न मिली होती तो संभवतः हम अभी भी गुलाम होते .और यदि हम अभी भी सम्मान नहीं करते तो मानकर चलो हम मानसिक गुलाम हैं .
हर धरम ,मजहब का व्यक्ति यदि वह अपने मजहब ,धरम को मानाने वाला हैं तो उसके मन मै अपने धरम ,जाति , को कोई भी प्रतीक दिख जाता हैं या सुन लेता हैं तो उसमे आंतरिक प्रेणना और स्वाभिमान पैदा हो जाता हैं .क्योकि उसमे उसकी निष्ठां और उसकी आत्मीयता जुडी होती हैं . वास्तव मै देखा जाय तो हम शब्दों पर ही लड़ रहे हैं .शब्द से भाषा बनती हैं और भाषा से हमारा व्यवहार होता हैं और यह जीभ ही दोस्ती कराती हैं और मित्रता .जीभ बड़ी या दांत तो जीभ कहती मै एक हूँ और बड़ी हूँ और दांत कहता मैं ३२ हूँ और बड़ा हूँ .तो ठीक जीभ ने किसी बलशाली को कुछ बोल दिया तो उसने मुँह पर ठूंसा लगाया तो दांत बाहर आ गए .
राष्ट्र गान और राष्ट्रध्वज हमारी शान हैं इसकी इज़्ज़त से हमारी इज़्ज़त हैं .कोई ऐसा धरम जाति नहीं हैं जो पूर्ण रूप से अपने रीती रिवाज मानते हैं .राष्ट्र्रीय गान हमारे धरम की स्तुति ,.प्रार्थना, इबादत का प्रतीक हैं .हमारी पहचान विश्व मै अपने गान और ध्वज से ही होती हैं .जैसे कोई मस्जिद ,मंदिर, चर्च ,गुरुद्वारा की पहचान उसके ध्वज से होती हैं और हर धरम की अपनी आयते,श्लोक ,प्रेयर शबद से पहचान होती हैं .आज हम सत्तर वर्ष के उपरांत भी अपने ध्वज गान के प्रति आत्माभिमानी नहीं हैं तो किस वास्ते हमने आजादी ली.बस दो दिन गाना गए लिया और फिर चुप .क्या हम धार्मिक होकर नित्य धार्मिक पाठ ,नमाज़ ,प्रेयर नहीं पढ़ते उसमे कोई कोताही नहीं बरतते तब हम राष्ट्रगान मै क्यों नहीं सम्मान देते .उसको सम्मान देने से हमारा सम्मान बढ़ता हैं .वैसे किसी के सम्मान देने या न देने से ध्वहज या गान की प्रतिष्ठा कम नहीं होती .उसको सम्मान न देने से व्यक्ति कीविदीर्ण मनोदशा का ज्ञापन होता हैं .
भारत को हम कैसे विकास शील या विकसित देश कहे.हम आधुनिकता को पसंद करते हैं पर हम आधुनिक नहीं हैं .ऐसा क्यों.? हमारे देश का गौरव ही हमारा गौरव हैं और मात्र एक मिनिट से भी कम समय उसके सम्मान मै नहीं देसकते तो आगे कभी कभी देश पर विपाती आएँगी तो उनसे यह उम्मीद करना बेकाफी होगा .
हम पंजे की ऊँगली है अलग अलग
पर मुठ्ठी मै एक जुट होकर एक हैं
क्यों हम इतने संकीर्ण हो चुके
हम देश के गान और ध्वज के सम्मान
से क्यों इतना परहेज़ करते हैं
ये ध्वज और गान हमारे प्राण हैं
जैसे आत्मा के निकलने से शरीर शव
शव को पालना चाहते हैं रहो तुम कितने
प्रिय और  खूबसूरत ,हो गए निर्जीव
कोई नहीं देगा तुम्हे मान्यता और सम्मान
धरती ,ध्वज ,गान ही हैं हमारी पहचान
जय राष्ट्रगान जय आत्म गान
विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104  पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड   भोपाल 462026  मोबाइल  ०९४२५००६७५३

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