राहुल गाँधी की भारत जोड़ो यात्रा के क्या मायने ? -विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन

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भारत जोड़ो यात्रा कई मायनों में एक छुपा हुआ सन्देश हैं .पहली बात कांग्रेस के अस्तित्व की जंग हैं या राहुल गाँधी के भविष्य का निर्धारण करेगा. यह बात भारतीय जनता पार्टी के मन में खलबली मचा रही हैं,और इसके अपने अपने मनन चिंतन चल रहे हैं. पर यह यात्रा जागरूकता की यात्रा हैं. जमीनी स्तर पर वास्तविकता को जानने समझने का अवसर हैं.
जैसा गीता में भी कहा गया हैं की कर्म किये जाओ और फल की चिंता मत करो. यह बात बहुत सीमा तक सच हैं, दूसरा हम सब कर्मों का फल भोग रहे हैं, जिसका पुण्य हैं उसको सब संसाधन अनुकूल मिलते या हो जाते हैं और प्रतिकूल स्थिति में अपने भी पराये हो जाते हैं.

एक बात और हैं जो आज अर्श पर हैं वे कब फर्श में आ जाए कोई नही जानता, कर्म का अपना एक सिद्धांत हैं जैसे हम बैंक में जो पैसा जमा करते हैं उसी का आहरण करते हैं बैंक में पैसा नहीं जमा करेंगे तब आहरण कहाँ से कर पाएंगे ?हम भारतीय पुनर्जन्म में विश्वास करते हैं, और एक बात और हैं की हमारा या सृष्टि का कोई निर्माता नहीं हैं .यदि ईश्वर सृष्टि का या हमारा निर्माता होता तो सबको समान बनाता, किसी गरीब अमीर क्यों बनाता ,कोई सामग्री निर्माण करने वाला कारखाना जब किसी सामग्री का निर्माण करता हैं तब वे समान बनती हैं, अलग अलग बनाने के लिए अलग अलग मशीन होती हैं. इसी प्रकार कोई को थोड़ा श्रम करने पर सफलता मिलती हैं और कोई कोई दिन रात मेहनत करने पर भी सफलता नहीं मिलती. इसी समय हमें पुण्य पाप की विवेचना करनी पड़ती हैं. अपने अपने किये गए कर्म और वर्तमान कर्म के अनुसार फल मिलता हैं.

धर्म किये क्या लाभ हैं, यह मत पूछो बात.
देखो नृप की पालकी, वाहक गण ले जात.

मुझसे मत पूछो कि धर्म करने से क्या लाभ हैं ? बस एक बार पालकी उठाने वाले कहारों की ओर देख लो और फिर उस आदमी को देखो,जो उसमे सवार हैं .

तब तक पुजों शत्रु को, जब तक उसका काल.
जब हो अवनति चक्र में, भू में मारो भाल.

अपने बैरी के सामने झुक जाओ, जब तक उसकी अवनति का दिन नहीं आता. जब वह दिन आएगा तब सुगमता के साथ उसे सिर के बल नीचे फेंक दे सकोगे .

जो नर निज को मानता ,गर्वित हो मतिमान .
सचमुच वह ही मूढ़ हैं ,कहते यों धीमान .

क्या तुम यह जानना चाहते हो कि बुद्धि का उथलापन किसे कहते हैं ?बस उसी अहंकार को जिससे मनुष्य मन में समझाता हैं कि मैं बहुत सायना हूँ .

सभी चाहते भोग सुख ,धनादि के अनुरूप ,
किन्तु भोगसुख मनुज को ,सुविहित कृत्यनुरूप .
जम्बू फल की कृष्णता ,स्वाभाविक हैं रूप
कपिथ्य फल हैं सहज से ,धरता वर्तुलरूप

राहुल गाँधी की यात्रा भले ही फल कुछ भी हो पर उनके द्वारा जमीनी स्तर पर जो सच्चाई सामने आएगी उससे सत्ताधारीयों की नींद जरूर उड़ेगी .बात सौलह आने सच हैं कि वर्तमान में महगाई ,बेरोजगारी भ्रष्टाचार ,विकास के नाम पर लूट खसोट जो मची हैं और उस पर कोई नियंत्रण या कोई पूछ परख करने वाला कोई नहीं हैं उसका मुख्य कारण अभी सत्ता में हैं ,ऐसा नहीं हैं कि काबुल घोड़े ही घोड़े होते हैं ,गधे नहीं होते ? ऐसा नहीं हैं की वर्तमान में भ्रष्टाचार नहीं हैं ,पहले से अधिक हैं पर सत्ता से जुड़े हैं तो बचे हैं.

जमीनी हक़ीक़त बहुत ही खौफनाक हैं कारण जिस तरीके से विकास हो रहा हैं पर वह जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं. इस समय जितना पैसा तरह तरह के विकास के नाम पर खर्च किया जा रहा हैं और उससे प्रधान नौकर अपना नाम चिर स्थायी करना चाहते हैं जो असंभव हैं. कारण कौन कौन किस किस को कितना याद रखता हैं और रखेगा. मनुष्य को भूलने की बिमारी यदि न होती तो वह पागल हो जाता.

यम तो रविमय माप से तव जीवन आहार .
लेता हैं हर रोज ही,नहीं रहो अनुदार .
जनता का अनुराग कर ,कर ले सम्यक दान ,
ना तो तेरा जन्म भी ,वृथा रहे सुनसान .

वैसे राजा नरक गामी ही होता हैं कारण उसका प्रतिपल पाप और कषायों में संलिप्त रहता हैं और अंदर से अशांत रहता हैं, कारण वे परपीड़क होते हैं. राहुल गाँधी नेता नहीं हैं, वह सामान्य व्यक्ति हैं, जो छल कपट से दूर हैं, उसमे भोलापन हैं और उसमे निडरता हैं वह हमेशा खुले आम आलोचना का सामना करता हैं और पत्रकारों से बात करने का साहस रखता हैं जबकि वो मन की बात में ही संतुष्ट होते हैं .वो जंगल का शेर हैं तो ये पिंजरे का शेर हैं .

राहुल गाँधी का भविष्य उज्जवल हैं, यात्रा सफल अवश्य होगी और जब तक चलेगा सत्ता की धड़कन बढ़ती रहेंगी.

-विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन
संरक्षक शाकाहार परिषद्
A2 /104 पेसिफिक ब्लू ,नियर डी मार्ट, होशंगाबाद रोड, भोपाल – 462026
मोबाइल ०९४२५००६७५३

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