पिंपल्स (मुहांसे)—- दूर करने के आयुर्वेदिक उपचार—विद्यावाचस्पति डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल

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वैसे यह हॉर्मोनल बीमारी भी मानी जाती हैं .युवान अवस्था में जब शारीरिक विकास के साथ हमारे शरीर में जो हार्मोनल परिवर्तन होते हैं उस समय प्रायः यह रोग देखा जाता हैं .इसके साथ वर्तमान में जो पिज़्ज़ा ,बर्गर मैगी ,और अन्य रासायनिक खाद्यान्नों के कारण इस रोग को बढ़ने में मुख्य योगदान हैं .
युवानपिडका यूनाम  विज्ञेया मुखदूषिकाः!
सेमल के काँटों के समान कफ ,वायु और रक्त से जवानों में (चेहरे पर ) होने वाली पिंडिकाएं युवानपिडका या मुख दुषिका कहलाती हैं .आम बोलचाल में इसे मुहासें कहते हैं .त्वचागत मेदपिंडों का मुख बंद हो जाने से इनकी उत्पत्ति होती हैं .मुख की त्वचा पर इनकी अधिकता होती हैं .इसीलिए यहाँ अधिक होती हैं .इनकी उत्पत्ति से मुख बहुत भद्दा हो जाता हैं .इसे एक्नी वुल्गैरिस कहते हैं .इसका मुख्य कारण एक्नी बेसिलस का संक्रमण हैं .
गोरे चेहरे पर कोई दाग धब्बा या निशान पड़ जाए, तो आप कई तरह के उपचारों के बारे में सोचने लगते हैं। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि पिंपल्स किसी के लिए सबसे खराब दुश्मन है। अगर आप इससे छुटकारा प्राप्त करना चाहते हैं, तो  कुछ उपचारों पर ध्यान देना होगा।
तुलसी एक धार्मिक पौधा है, जो घरों के आँगन मे लगता है जिससे की घर मे ताज़गी आती है और वातावरण को उत्तेजित करता है। हजारों सालो से आयुर्वेद में तुलसी को घाव को ठीक करने के काम में इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसके अलावा तुलसी पेस्ट जब आप नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं, तो मुंहासे या पिंपल्स से छुटकारा पाने का एक शानदार तरीका है।
इसके लिए आप तुलसी के पत्ते का पाउडर लीजिए और उसे गर्म पानी में 2-3 चम्मच मिलाकर पेस्ट बना लीजिए। इस पेस्ट को कुछ सप्ताह तक अपने चेहरे पर लगाइए आपको जल्द ही फायदा मिलेगा।
एंटी बैक्टीरियल और एंटी-फंगल गुणों से भरपूर शहद खांसी और ठंड, पाचन और वजन घटाने में बहुत ही लाभकारी है। मुंहासे या पिंपल्स को दूर करने के लिए शहद और नींबू का रस का मिश्रण, एक सरल और प्रभावी होममेड सौंदर्य प्रसाधनों में से एक है।
इसके लिए आप एक बड़े शहद में एक बड़ा चम्मच नींबू का रस मिलाएं और मुंहासे की दाग वाली जगह पर इसे लगाएं। 10 मिनट तक लगाए रखने के बाद इसे पानी से धो लें। जब आप इसे सप्ताह में 5-6 बार लगाते हैं, तो आपको प्रभावी परिणाम मिलेंगे।
दालचीनी एक लोकप्रिय मसाला है। इसमें पोषक तत्व होते हैं जो कि मल्टीपल स्केलेरोसिस और अन्य बीमारियों के साथ लोगों को लाभ पहुंचा सकते हैं। आपको बता दें कि मल्टीपल स्केलेरोसिस एक तरह की बीमारी है, जिसमें आपकी इम्यून सिस्टम आपकी तंत्रिकाओं को आवरण प्रदान करने वाले सुरक्षात्मक खोल को नुकसान पहुंचाती है।
यदि आप पिंपल्स की समस्या से ग्रसित हैं तो आप थोड़ा भुना हुआ दालचीनी लें और बारीक पीस लें। दालचीनी को शहद के साथ मिलाकर पेस्ट करें और इसे धोने से पहले लगभग 10-15 मिनट के लिए सप्ताह में कम से कम 5-6 बार लगाएं।
एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी, एंटीवायरल आदि गुणों की वजह से पुदीना स्वास्थ के लिए तो अच्छा होता ही है, ये गर्मी के मौसम में आपको कई बड़ी बीमारियों से भी बचाता है। पुदीना मुख्य आहार तो नहीं है, लेकिन इसकी मौजूदगी से खाने का स्वाद बढ़ जाता है। इसके अलावा पुदीने की पत्ती भी  औषधीय गुणों से भरपूर होती है।
मुंहासे को दूर करने के लिए आप कुछ पुदीने के पत्तों को मिला लें और एक ताज़ा पेस्ट करें। इस पेस्ट को मुंहासे वाली जगह पर लगाएं। मुंहासे के लिए इस आयुर्वेदिक दवा का नियमित उपयोग करने से आपको मुंहासे के निशान से छुटकारा मिल सकता है।
कवकरोधी, जीवाणुरोधी, एंटी-वायरल, एंटी-ऑक्सीडेंट, एंटी-सेप्टिक, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एनाल्जेसिक जैसे उत्तम गुणों से भरपूर लौंग में आपके स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने के कई गुण होते हैं।
लौंग हड्डियों को मजबूत बनाने के साथ ही आपके स्कल्प  से डैंड्रफ भगाकर बालों की कंडिशनिंग भी करता है।
मुंहासे की समस्या को दूर करने के लिए आप लौंग के तेल का इस्तेमाल पिंपल्स वाली जगह पर करें। आप चाहे तो इसके जलन से बचने के लिए इसमें दूध या पानी मिला सकते हैं।
नीम का पत्ता कुष्ठ रोग, भूख की कमी, त्वचा के अल्सर, हृदय रोगों और रक्त वाहिकाओं (हृदय रोग), बुखार, मधुमेह, मसूड़े की सूजन, और लिवर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। पिंपल्स या मुंहासे की समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप नीम के पत्तों का पेस्ट बनाओ और इसे मुंहासे वाली जगह पर लगाएं। आपको फायदा मिलेगा।
इसके अलावा जीरक लेप भी बहु उपयोगी हैं .
पुतीकारंजा( बंदूक-नट का तेल लगाने से पिम्पल्स दूर हो जाते हैं .
जायफल (नट मेग ) का पेस्ट दूध में मिलाकर लगाने से फायदा होता हैं .रक्त चन्दन (रेड संदल वुड ) ,हल्दी (टर्मेरिक ) को दूध में मिलकर पेस्ट लगाने से लाभकारी हैं .
चन्दन का पाउडर और दो भाग सरसों का तेल मिलाकर लगाने से प्रभावकारी उपयोग होता हैं
आजकल मैगी .पिज़्ज़ा ,बर्गर ,तली  चीज़ों के खाने से भी यह रोग बहुत होता हैं तथा स्वास्थ्य वर्धन के लिए आजकल होर्मोनेस का उपयोग इसको बढ़ाने में सहायक हैं .
विद्यावाचस्पति  डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन ,संरक्षक शाकाहार परिषद् A2 /104  पेसिफिक ब्लू, नियर डी मार्ट ,होशंगाबाद रोड, भोपाल 462026  मोबाइल ०९४२५००६७५३

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