प्रसिद्ध अतिशय क्षैत्र बाडा पदमपुरा में वात्सल्य वारिधी आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज,गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी तथा गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी स संघ के पावन सानिध्य में चल रहे भव्य पंचकल्याणक महोत्सव में मोक्ष कल्याणक महोत्सव के बाद हुआ विश्व शांति महायज्ञ
पद्मबल्लभ शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण एवं मंदिर परिसर में 111 फीट की धर्म ध्वजा की हुई भव्य स्थापना
नवनिर्मित निवीन वेदियों में विराजे श्री जी
फागी संवाददाता/
जयपुर /पदमपुरा-
22 फरवरी
श्री दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा में नव निर्मित खड़गासन चौबीसी जिन प्रतिमाओं के पंचकल्याणक एवं नव निर्मित पद्मबल्लभ शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण का पांच दिवसीय भव्य महा-महोत्सव का मोक्ष कल्याणक की क्रियाओं एवं विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान के साथ भव्य समापन हुआ इस मौके पर 121 फीट के पद्मबल्लभ शिखर पर कलश एवं ध्वजारोहण के बाद मंदिर परिसर में 111 फीट की धर्म ध्वजा लगाई गई। अन्त में विशाल रथयात्रा के साथ पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ,कार्यक्रम में अतिक्षय श्रेत्र के यशस्वी अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन एवं महामंत्री हेमन्त सोगानी ने बताया कि वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य वर्धमानसागर महाराज, गणिनी आर्यिका सरस्वती माताजी एवं गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ के पावन सानिध्य एवं प्रतिष्ठाचार्य पं. हंसमुख जैन धरियावद के निर्देशन में विभिन्न मंत्रोच्चारणों के द्वारा मोक्ष कल्याणक को रविवार को प्रातः 6.30 बजे से नित्यनियम पूजा, अभिषेक, शांतिधारा के बाद सौधर्म इन्द्र सुरेन्द्र – मृदुला पाण्डया के निर्देशन में भक्ति भाव से जिनार्चना की गई, कार्यक्रम में प्रचार संयोजक सुरेश सबलावत एवं मीडिया प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा के मुताबिक प्रातः मोक्ष कल्याणक क्रियाओं के बाद भगवान आदिनाथ का जयकारों के बीच सामूहिक रूप से निर्वाण लाडू चढाया गया , भगवान के नख एवं केश ले जाने के लिए अग्नि कुमार देवों का आगमन हुआ ,अग्नि देव द्वारा सत्कार विधि उपरांत मोक्ष कल्याणक पूजा की गई, विश्व शांति महायज्ञ अनुष्ठान में मंत्रोच्चार के साथ विविध आहुतियों सहित पूर्णाहुति दी गई।
उक्त कार्यक्रम में मीडिया प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि इससे मौके पर आचार्य वर्धमान सागर महाराज द्वारा 121 वीं दीक्षा के रूप में जयपुर मूर्ति कला कालोनी निवासी दीक्षार्थी मुन्ना लाल टकसाली को विधि विधान के साथ भव्य जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान की गई ,दीक्षा उपरांत उनका नाम मुनि गुणोदया सागर नाम रखा गया कार्यक्रम में पंचकल्याणक महोत्सव समिति संयोजक राज कुमार कोठ्यारी ने बताया कि इस मौके पर वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाचार्य वर्धमान सागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि जैन श्रावक को अपने जीवन में वैराग्य, संयम का पथ अपनाकर जिनेश्वरी दीक्षा का भाव अवश्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संसार का विस्तृत स्वरूप भी अत्यंत सीमित है, अंदर का राग द्वेष का त्याग करने पर ही मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ा जा सकता है। परिणामों की विशुद्धी संयम से आती है,इस मौके पर समाज श्रेष्ठी भामाशाह अशोक – सुशीला पाटनी आर .के .मार्बल्स , आई .ए .एस रवि जैन आदि ने आचार्य वर्धमान सागर महाराज से मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया,इसके पश्चात आचार्य संघ की आहार चर्या हुई।
कार्यक्रम में बाद में मूलनायक भगवान पद्मप्रभ के ऊपर मंदिर निर्माण के 75 साल बाद बने 121 फीट उतंग शिखर पर कलशारोहण व ध्वज दण्डारोहण, ध्वजारोहण
आर. के .मार्बल्स परिवार के अशोक – सुशीला, सुरेश – शांता एवं विमल – तारिका पाटनी द्वारा किया गया इस मौके पर पूरा परिसर भगवान पदमप्रभू के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
कार्यक्रम में अध्यक्ष सुधीर कुमार जैन एवं महामंत्री हेमन्त सोगानी ने बताया कि प्रदेश के पहले दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र पर 111 फीट की धर्म ध्वजा की विधि विधान से पूजा अर्चना के बाद मंत्रोच्चार के साथ समाजश्रेष्ठी ताराचन्द पोल्याका, सुनील – नीलम, आकार-सोनाली, प्रकर्ष जैन द्वारा मंदिर परिसर में 111 फीट की धर्म ध्वजा लगाई गई ।
कार्यक्रम में संयोजक राजकुमार कोठ्यारी एवं मीडिया प्रभारी विनोद जैन कोटखावदा ने बताया कि पांच दिवसीय पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान पदमपुरा में नवनिर्मित खडगासन चौबीसी प्रतिमाओं के साथ एक भगवान आदिनाथ की अष्ट धातु की विधिनायक प्रतिमा तथा अन्य मंदिरों की 45 जिन प्रतिमाओं सहित कुल 70 जिन प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा कर उन्हें पाषाण से परमात्मा बनाया गया,इसी के साथ पूर्व की स्थापित 27 फीट की भगवान पदमप्रभू की खडगासन प्रतिमा की मंत्रोच्चार के साथ शुद्धि की गई,कार्यक्रम में जैन गजट संवाददाता राजाबाबू गोधा ने शिरकत करते हुए कहा कि इस मौके पर नवनिर्मित खडगासन चौबीसी परिसर के मुख्य द्वार के निर्माण के लिए श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष स्व. निर्मल सेठी के सुपुत्र धर्मेंद्र सेठी दिल्ली द्वारा घोषणा की गई।
उक्त कार्यक्रम में विशाल रथयात्रा निकाली गई,यह रथ यात्रा कार्यक्रम संयोजक योगेश टोडरका के निर्देशन में बैण्ड बाजों के साथ पाण्डाल से मंदिर तक विसर्जन रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा में सौधर्म इन्द्र सुरेन्द्र – मृदुला पाण्डया हाथी पर तथा कुबेर इन्द्र पारस-पूजा पाटनी, यज्ञनायक रितेश-सुमिता पाटनी सहित अन्य इन्द्र – इन्द्राणी एवं पुण्यार्जक परिवार बग्गियों में बैठकर तथा श्रावक – श्राविकाऐं नाचते गाते शामिल हुए यह रथयात्रा विभिन्न मार्गो से होती हुई मंदिर प्रांगण पहुची जहां जयकारों के बीच जिन बिम्बों को वेदी में विराजमान किया गया।
महोत्सव में बडी संख्या में गणमान्य श्रेष्ठीजनो ने सहभागिता निभाई, कार्यक्रम में जैन गजट संवाददाता राजाबाबू गोधा ने जैन समाज की 135 वर्ष सबसे पुरानी पत्रिका जैन गजट आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज, एवं गणिनी आर्यिका स्वस्ति भूषण माताजी के कर कमलों में सोंपकर मंगलमय आशीर्वाद प्राप्त किया उक्त पत्रिका का अवलोकन करने के बाद जैन गजट को मंगलमय आशीर्वाद प्रदान कर कहा कि उक्त पत्रिका सारे समाज को मंगानी चाहिए जिससे सारे साधु संतों एवं समाज की गतिविधियों की जानकारी प्राप्त होती रहे, कार्यक्रम में
महोत्सव समिति के महामंत्री हेमन्त सोगानी ने सभी का आभार व्यक्त किया।
राजाबाबू गोधा जैन गजट संवाददाता राजस्थान
























