माता-पिता तो वह दीपक है जो जीवन भर अंधेरे को मिटाकर रोशनी में ले जाते हैं

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जैन मुनि प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज
संवाददाता महावीर कुमार सरावगी
रविवार 20 मई 2024 ग्राम सिहोरा मध्य प्रदेश दिगंबर जैन मंदिर में गणाचार्य108 विराट सागर जी महाराज के परम पावन शिष्य प्रवचन केसरी विश्रांत सागर महाराज ने धर्म सभा को मंगलमय प्रवचन देते हुए बताया
ईश्वर ने तो आनंद ही आनंद दिया है दुख तो हमारी खोज है जीवन में अच्छे लोगों को हम भूल जाते हैं लेकिन ऐसे कुछ ही लोग होते हैं उन्हें हम कभी ना भूल पाए
प्रतिदिन हमारा पूरा दिन मंगलमय हो ऐसी ईश्वर से भावना करने मात्र से हमें आनंद का आभास होता है इतना भी हम नहीं करने पर गलत आचरण गलत कार्य गलत भाषा अविवेक पूर्ण बोलना यह दुख के कारण है और इन्हें हम खोज कर अपने पास बुलाते हैं और इसी कारण संसार का प्राणी दुख से पीड़ित हो रहा है
मुनि ने बताया माता-पिता का ऋण जीवन भर उनकी सेवा करने पर भी नहीं चुकाया जा सकता
माता-पिता तो वह दीपक है जो जीवन भर अंधेरे को मिटाकर रोशनी में ले जाने वाले हैं बचपन में तुम्हें अंगुली पकड़ कर चलने वाले माता-पिता ही हैं उनकी वृद्धा अवस्था आने पर आप अपने हाथ का सहारा देने की जगह वृद्धा आश्रम पहुंचा रहे हो यह बिल्कुल ही युवा वर्ग के लिए मुनि ने गलत आचरण बताया

मुनिराज ने युवाओं को यह भी उपदेश दिया माता पिता की आपको अच्छी सेवा करना ही चाहिए वह तो कुछ समय के तीर्थ हैं जो दर्शनों का लाभ आप प्राप्त कर सकते हो करना चाहिए वह संसार से जाने के बाद कभी लौटकर नहीं आएंगे यही एक सत्य है
उनका आशीष ही जीवन के लिए सबसे अच्छा जीवन का मार्गदर्शन होगा उनके बताए हुए मार्ग पर चलने से संसार की सभी परेशानियां आपसे दूर होगी ऐसा अपार जन समूह को विश्रांत सागर महाराज ने उद्बोधन में बताया
महावीर कुमार जैन सरावगी जैन गजट संवाददाता नैनवा जिला बूंदी राजस्थान

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