कोटा में 8 महीनों में 24 से अधिक विद्यार्थियों की आत्महत्या का मामला

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जयपुर। विगत 8 माह से प्रदेश की शिक्षा नगरी कोटा शहर में 24 से अधिक विद्यार्थी आत्महत्या कर चुके है, हर आत्महत्या पर जांच भी होती है, नियम, कायदे, कानून भी बनाए जाते है किंतु आत्महत्या रुकने की बजाय बढ़ती चली जा रही है, मामला केवल 8 माह का नही है बल्कि यह आत्महत्याओं का दौर विगत कुछ वर्षों से चलता आ रही है यही कोटा शहर है जिसके पिछले सत्र में भी अनगिनत आत्महत्याएं बच्चों ने की है और इस वर्ष भी केवल 24 विद्यार्थी नही बल्कि 50 से अधिक विद्यार्थियों का मसला है जो पूरे प्रदेश का अघोषित आंकड़ा है, अघोषित आंकड़ा तो आज तक कभी जारी भी नही हुआ। इन सबके बीच पिछले सप्ताह कोटा में 3 विद्यार्थियों की आत्महत्या ने तुल पकड़ा तो पूरे प्रदेश में ही नही बल्कि देशभर में ऐसी घटनाओं की निंदा होने लगी, अभिभावक शिक्षण संस्थाओं, सरकार और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार मान रहे है तो जिम्मेदार लोग अभिभावकों पर अपनी नाकामियों को थोप रहे है।

इस गंभीर विषय पर संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा की ” अभिभावक अपने बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर रख देते है और बड़ी मुश्किलों का सामना कर बच्चों का एडमिशन करवाते है, निजी शिक्षण संस्थाएं एडमिशन के समय शिक्षा, सेफ्टी और व्यवस्थाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे करते है और एडमिशन होते ही वह अपने दावों को भूल जाते है और बच्चों को बच्चों से कंपीटिशन करने पर मजबूर कर देते है। जिससे चलते बच्चों पर कोपिटिशन को लेकर मानसिक तनाव बड़ जाता है और ऐसी घटनाएं घट जाती है जिसकी कल्पना करना भी नामुमकिन है। किंतु इन सबके बावजूद शिक्षण संस्था, प्रशासन और सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने को बजाय अपनी नाकामियों का ठीकरा अभिभावकों पर फोड़ देते तो अभिभावकों को अफसोस होता है क्योंकि अभिभावक शिक्षण संस्थानों की मनमानी झेलता है, मनमानी फीस जमा करवाते है, अपने बच्चों से दूर रहते उसके बावजूद ठीकरा अभिभावकों पर फोड़ देते है। जो सरासर गलत है।

प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया की जब से कोटा नगरी शिक्षा नगरी के नाम से विख्यात हुई है तब से लेकर आजतक पूरा कोटा शहर माफियाओं की चपेट में आ चुका है, अकेला कोटा शहर में शिक्षण संस्थानों में 25 अरब रू से अधिक का कारोबार हो रहा है और करीबन 3 लाख से अधिक विद्यार्थी देशभर से पड़ने के लिए आते है। हालाकि कोचिंग सेंटरों को लेकर सरकार और प्रशासन ने कानून तो बहुत बनाएं हुए है किंतु एक भी कानून की पालना तय नहीं हो रही है, क्योंकि पूरी सरकार और प्रशासन केवल माफियाओं के इशारों पर चल रहा है जिसका खामियाजा केवल और केवल अभिभावकों को उठाना पड़ रहा है।

अभी 3 विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामले पर राज्य सरकार में मंत्री डॉ महेश जोशी ने कहा की कोचिंग सेंटरों पर सख्त पाबंदी लगाए केंद्र सरकार यह केसा तर्क हुआ मतलब राज्य सरकार की प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर कोई जिम्मेदारी नहीं, एक मंत्री जो जल विभाग से है वह केवल राजनीतिक स्टंटबाजी करने को लेकर अपना स्टेटमेंट दे रहे है और जो प्रदेश के शिक्षा मंत्री है वह विद्यार्थियों की आत्महत्या पर मौन धारण कर आत्महत्या को बढ़ावा दे रहे है।

जैन ने कहा की आज अगर कोटा सहित पूरे राज्य में विधार्थी आत्महत्या कर रहे है तो केवल और केवल उसकी जिम्मेदार राज्य सरकार है, राज्य का प्रशासन है जो शिक्षा माफियाओं को अपना संरक्षण देकर अपने कर्तव्यों को भूलकर सत्ता का सुख भोगकर अभिभावकों और विद्यार्थियों को प्रताड़ित कर रहे है उन्हे आत्महत्या के लिए उकसा रहे है। सरकार ने विगत एक वर्षों में जितना खर्चा अपने झूठे विज्ञापनों को प्रकाशित करने और अपना चेहरा चमकाने में खर्च किया है अगर उसका एक चौथाई पैसा विद्यार्थियों की सुरक्षा और व्यवस्था में खर्च होता तो मुख्यमंत्री को अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए झूठे दावे और वादे करने नही पड़ते। किंतु आगामी चुनाव में प्रदेश का 2 करोड़ अभिभावक ही है जो इस गैरजिम्मेदाराना सरकार को सबक सिखाएगा और 50 से अधिक हुई विद्यार्थियों की आत्महत्या का बदला लेकर उनकी दिवंगत आत्माओं को शांति पहुंचाएगा।

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